असम के बिहू डांस और हुसोरी पर संस्कृति मंत्रालय का एक पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह पूरा मामला गलत नाम लिखे जाने के कारण शुरू हुआ। दरअसल इस पोस्ट में असम के सांस्कृतिक रूप 'Husori' को 'Husari' और 'Bihu Naas' को 'Bihuna' लिख दिया गया था।जैसे ही यह पोस्ट सामने आई, असम के लोगों और सांस्कृतिक जानकारों ने मंत्रालय की इस लापरवाही पर कड़ी आपत्ति जताई।
बढ़ते विरोध को देखते हुए मंत्रालय ने पुराना पोस्ट हटा दिया और एक माफीनामा जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि उनसे 'Bihunas' को गलती से 'Bihuna' लिखने की चूक हुई है, जिसके लिए वे माफी मांगते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे भारत की परंपराओं का सम्मान करते हैं और आगे से ऐसी गलती नहीं होगी।
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माफी के बाद भी क्यों बढ़ा विवाद?
बढ़ते विरोध के बाद जब मंत्रालय ने अपना पोस्ट बदल कर सही लिखने का दावा किया तभी एक और गलती सामने आ गई। सबको यह देख कर हैरानी हुई कि मंत्रालय ने अपनी सफाई मे जिस शब्द का इस्तेमाल कर सही बताया, वह भी गलत था। असमिया संस्कृति के जानकारों और फिल्ममेकर उत्पल बोरपुजारी जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि सही शब्द 'Bihu Naas' जो कि दो अलग-अलग शब्द है, न कि 'Bihunas'।
असमिया में 'नास' का मतलब नाच या नृत्य होता है। लोगों का कहना है कि मंत्रालय ने एक गलती सुधारने के चक्कर में दूसरी गलती कर दी, जिससे उनकी सांस्कृतिक समझ पर सवाल उठ रहे हैं।
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सांस्कृतिक पहचान का सवाल
असम में 'हुसोरी' और 'बिहू' केवल लोक नृत्य नहीं बल्कि वहां की पहचान हैं। हुसोरी में टोलियां घर-घर जाकर आशीर्वाद देती हैं, जबकि बिहू (रंगाली, कंगाली और भोगाली) असम के जीवन का आधार है।
इस पूरे विवाद ने एक नई बहस छेड़ दी है कि सरकारी संस्थाओं को क्षेत्रीय भाषाओं और परंपराओं के बारे में जानकारी देते समय कितनी सावधानी बरतनी चाहिए।