logo

मूड

ट्रेंडिंग:

वोटर लिस्ट लेट, पंचायत चुनाव टले तो उत्तर प्रदेश के प्रधानों का क्या होगा?

अब इस बात की पूरी संभावना है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत के चुनाव टल जाएंगे। अगर ऐसा होता है तो प्रधानों का क्या होगा यही सबसे बड़ा सवाल है।

ai generated image of gram pradhan

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Sora AI

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

उत्तर प्रदेश में पंचायत के चुनाव साल 2021 में हुए थे। पांच साल का कार्यकाल खत्म होने वाला है लेकिन अब लग रहा है कि चुनाव टल जाएगा। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद इशारों ही इशारों में ऐसी बात कह चुके हैं। विपक्ष भी लगभग यही चाहता है और आरक्षण को लेकर मामला कोर्ट में है इसलिए पूरी संभावना है कि पंचायत चुनाव टल जाएंगे। अगर ऐसा होता है तो पंचायत के चुनाव अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाएंगे। इस स्थिति में मौजूदा प्रधानों का क्या होगा? उनका कार्यकाल बढ़ेगा या नहीं, वे काम कर पाएंगे या नहीं, यही सबसे बड़ा सवाल है।

 

पिछले चुनाव के बाद 27 मई 2021 से पंचायतों का कार्यकाल शुरू हुआ था जो 26 मई 2026 तक चलेगा। मौजूदा स्थिति के मुताबिक, अब 26 मई से पहले तो चुनाव ही नहीं हो सकते हैं। ऐसे में चुनाव में देरी तो तय है। कुछ दिन पहले ही एक इंटरव्यू के दौरान उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा था कि मामला कोर्ट में है और जैसा कोर्ट का आदेश होगा, उसके हिसाब से ही सरकार काम करेगी।

क्यों हो रही देरी?

पंचायत चुनाव में पहली समस्या यह है कि अभी तक वोटर लिस्ट ही नहीं प्रकाशित की गई है। प्रकाशित करना तो दूर वोटर लिस्ट का प्रकाशन बार-बार टलता जा रही है। अब राज्य निर्वाचन आयोग ने एक बार फिर तारीख आगे बढ़ा दी है और कहा है कि अंतिम वोटर लिस्ट 22 अप्रैल को जारी की जाएगी। इससे पहले, 15 अप्रैल को ही इसे प्रकाशित किया जाना था।

 

यह भी पढ़ें: 'रीलबाजी ले गई जान...', स्टंट के चक्कर में डिवाइडर से भिड़ी बाइक, लड़की की मौत

 

बता दें कि 23 दिसंबर 2025 को अनंतिम वोटर लिस्ट जारी की गई थी। इस लिस्ट में कुल 12.59 करोड़ मतदाता थे। इस पर आपत्तिंयां मांगी गईं तो लाखों की संख्या में नाम ना जुड़ने या कट जाने की शिकायतें सामने आईं। इन्हीं शिकायतों का निपटारा करने में समय लगने के चलते अभी तक लिस्ट प्रकाशित नहीं हो पाई है। यही लिस्ट आने पर पता चलेगा कि कुल मतदाताओं की संख्या कितनी हुई।

 

दूसरी समस्या आरक्षण को लेकर है। राज्य में पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन होना है। इसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि कौन सी सीट किसके लिए आरक्षित होगी। अब जब आयोग ही नहीं बना है तो आरक्षण कैसे तय हो, यह भी देरी की एक वजह है। 

 

यह भी पढ़ें: 'वोटिंग के दिन घर पर ही रहें TMC के गुंडे', पश्चिम बंगाल में अमित शाह की चेतावनी

प्रधान, BDC और अन्य प्रतिनिधियों का क्या होगा?

आमतौर चुनाव से पहले ही प्रधान और अन्य जनप्रतिनिधियों का बस्ता जमा हो जाता है यानी उनसे कार्यभार ले लिया जाता है। फिर वे कोई भी काम नहीं कर सकते हैं। इस स्थिति में प्रशासक तैनात कर दिए जाते हैं। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त कर दिया जाता है और औपचारिक काम करने की जिम्मेदारी उन्हीं की होती है। ग्रामसभा से जुड़े दैनिक कार्य देखने की जिम्मेदारी भी उन्हीं को दे दी जाती है।

 

अब जब स्थिति ऐसी बन रही है कि पंचायत के चुनाव एक साल के बाद हो सकते हैं तो तमाम संगठन मांग कर रहे हैं कि मौजूदा प्रधान को ही प्रशासन नियुक्त किया जाए। एक मांग यह भी है कि एक साल के लिए प्रधानों का कार्यकाल बढ़ा दिया जाए ताकि वे ग्रामसभा के काम जारी रख सकें। नियमों के मुताबिक, ग्राम पंचायत सचिव, किसी अन्य सरकारी अधिकारी या फिर मौजूदा प्रधान को ही 6 महीने के लिए या फिर चुनाव होने तक प्रशासक बनाया जा सकता है।

Related Topic:#UP News

और पढ़ें