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रिकॉर्ड में 2 का जिक्र, 12 मजारें कैसे हो गईं? बहराइच में बुलडोजर ऐक्शन की कहानी

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में कई मजारों पर बुलडोजर चला है। प्रशासनिक कार्रवाई का कुछ जगहों पर विरोध हो रहा है। ऐसी नौबत क्यों आई, क्या है विवाद, पढ़ें अपने हर सवाल का जवाब।

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बहराइच में ध्वस्तीकरण अभियान। Photo Credit: ANI

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उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में एक के बाद एक 10 से ज्यादा मजार और मस्जिदों को तोड़ दिया गया। बहराइच जिला प्रशासन ने इन मजारों को अवैध बताया और ध्वस्त करा दिया। ये मजारों महाराजा सुहलदेव मेडिकल कॉलेज के पास थीं। साल 2002 से ही इन मजारों के बनने और हटाने की कवायद की जा रही थी, अब प्रशासन ने इन्हें एक झटके में ढहा दिया है। संवेदनशील मामला होने की वजह से बहराइच में स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। लोगों ने ताबड़तोड़ कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर की है।

जिला प्रशासन का कहना है कि इन मजारों को अदालत और प्रशासनिक दोनों आदेशों में अवैध कहा गया था। लोग इस पर ऐतराज जता रहे थे। बात साल 2002 की है। बहराइज जिला मजिस्ट्रेट ने इन मजारों को अवैध घोषित किया था। मजारों की प्रबंधन समिति ने जिला प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ जिला अदालत में चनौती दी लेकिन साल 2004 में यह याचिका ही खारिज कर गई।

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अवैध मजारों के इस मुद्दे पर लंबे वक्त तक तकररार रही। मजारों की प्रबंधन समिति ने थक-हारकर डिविजनल कमिश्नर से अपील की। लंबे वक्त तक टाल-मटोल के बाद यह आदेश जारी किया गाय कि मजारें अवैध हैं, इन्हें गिरा देने की जरूरत है। 

मजारों को तोड़ने की नौबत क्यों आई?

मजारें जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के पास में ही हैं। मूल रूप से पहले यहां सिर्फ 2 मजारें थीं। मजारों के आसपास फिर कई मजारें बना दी गईं। प्रशासन ने बार-बार आगाह किया कि ये निर्माण अवैध हैं। वक्फ बोर्ड के दस्तावेज बताते हैं कि सिर्फ 2 मजारें ऐसी थीं, जो यहां रजिस्टर्ड थीं। उसके आसपास मजारों के प्रबंधन में जुड़े लोगों ने 10 अतिरिक्त मजारें बना लीं। न तो इनके बारे में वक्फ बोर्ड को सूचित किया गया, न ही किसी सक्षम अधिकारी के पास इसे रजिस्टर्ड कराया गया। साल 2023 में जब महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज की जब स्थापना की गई, तब ये मजारें कॉलेज कैंपस के दायरे में आ गईं। हंगामा इसी वजह से शुरू हुआ। 

क्या हुई कार्रवाई की गई है?

बहराइच जिला प्रशासन ने सोमवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मेडिकल कॉलेज परिसर के भीतर बनी 10 मजारों को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई सिटी मजिस्ट्रेट के एक आदेश की वजह से हुई है। सिटी मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में इन ढांचों को अवैध बताया था।  

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केस की टाइमलाइन क्या है?

  • साल 2002: सिटी मजिस्ट्रेट ने 10 मजारों को अवैध घोषित कर हटाने का आदेश दिया था।
  • साल 2004: प्रबंधन समिति ने इस आदेश को जिलाधिकारी के सामने चुनौती दी, लेकिन अपील खारिज हो गई।
  • साल 2019: डिविजनल कमिश्नर के पास मामला पहुंचा। लंबी सुनवाई के बाद 2002 का फैसला बरकरार रखा गया। 

शिकायत किसने की थी?

प्रशासनिक रिकॉर्ड बताते हैं कि यहां मूल रूप से सिर्फ 2 मजारें थीं, जो वक्फ बोर्ड में दर्ज थीं। उन्हीं मजारों के आसपास 10 और छोटी मजारें बनाई गईं। साल 2023 में यहीं, महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज की नींव रखी गई। ये सभी ढांचे कॉलेज कैंपस के अंदर आ गए। कॉलेज के प्रिंसिपल ने इन मजारों पर आपत्ति जताई और प्रशासन से औपचारिक शिकायत की। प्रशासन ने फिर इस पर संज्ञान लिया।  

मजारों के गिरने पर प्रशासन क्या कह रहा है?

राजेश प्रसाद , सिटी मजिस्ट्रेट:-
2002 से आदेश होने के बाद भी मजारें नहीं हटाई जा रही थी। इन लोगों ने धीरे धीरे विस्तार करके 10-12 मजारें अवैध तौर पर बना ली थी। इन लोगों ने लगभग 2 हजार वर्ग फुट में अवैध निर्माण कर लिया था। आज यहां पुलिस  और प्रशासन की उपस्थिति में अवैध अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। 

10 जनवरी को नोटिस, 17 को सब जमींदोज

सिटी मजिस्ट्रेट राजेश प्रसाद ने अवैध मजारों के ध्वस्तीकरण पर कहा कि उन्होंने पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है। 10 जनवरी को नोटिस जारी कर मजार प्रबंधन को 17 जनवरी तक खुद अवैध ढांचे हटाने को कहा गया था। प्रशासन ने अपने आदेश में कहा था कि अगर अवैध निर्माण खुद नहीं हटाए गए तो प्रशासन इन्हें गिराएगा और खर्च भी प्रबंधन को ही देना होगा। मस्जिद प्रबंधन ने मजारों को ध्वस्त नहीं किया। 19 जनवरी को बहराइच प्रशासन ने ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया। 

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जब सब ढहा तो बचा क्या?

सिटी मजिस्ट्रेट राजेश प्रसाद ने ANI से बताया है कि जो दो मूल मजारें वक्फ बोर्ड में रजिस्टर्ड थीं, उन्हें छुआ भी नहीं गया है। केवल उनके नाम पर जो अतिरिक्त 10 अवैध ढांचे खड़े किए गए थे, उन्हें ही हटाया गया है। 

विरोध हुआ?

कुछ जगहों पर मजारों के प्रबंधन से जुड़े लोगों ने प्रशासन का विरोध किया था। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे थे। अब स्थितियां सामान्य हैं। बातचीत से विरोध को शांत कराया गया है।

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