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'एक दिन तो कुर्सी जानी ही है...', ऐसा क्यों बोले CM योगी आदित्यनाथ?

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की एक सभा में CM योगी आदित्यनाथ का दिया गया बयान खूब चर्चा में है। CM ने अपने बयान में यहां तक कह डाला कि कुर्सी एक दिन जानी ही है तो मोह में क्यों रहना है?

Yogi Adityanath opens up on CM visit Noida myth

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। (Photo Credit: ANI)

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा से जुड़े दशकों पुराने उस राजनीतिक अंधविश्वास पर बड़ा प्रहार किया है, जिसके डर से पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री इस शहर में कदम रखने से भी कतराते थे। लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने पुरानी यादें शेयर करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने कुर्सी जाने के डर को दरकिनार कर जनता के हितों को सर्वोपरि रखा। अपने बयान में आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि कुर्सी एक दिन जानी ही है तो मोह में क्यों रहना है? उन्होंने साफ किया कि वह आस्था में विश्वास रखते हैं लेकिन विकास की राह में रोड़ा बनने वाले किसी भी अंधविश्वास के लिए उनके पास कोई जगह नहीं है।

 

योगी आदित्यनाथ ने उन दिनों को याद किया जब उन्हें नोएडा न जाने की सलाह दी गई थी। उन्होंने कहा कि पहले के मुख्यमंत्रियों में यह डर बैठा दिया गया था कि नोएडा जाने वाले की सत्ता छिन जाती है लेकिन उन्होंने इस मिथक को न केवल चुनौती दी, बल्कि वहां बार-बार जाकर विकास कार्यों की समीक्षा की और दोबारा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर इस अंधविश्वास को जड़ से खत्म कर दिया। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नेताओं का मोह जनता की सेवा में होना चाहिए न कि महज सत्ता की कुर्सी से।

 

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नोएडा जाने पर योगी आदित्यना का बयान

मुख्यमंत्री ने उस वाकये का जिक्र किया जब अफसरों और सलाहकारों ने उन्हें नोएडा जाने से रोका था। योगी ने बताया, 'मुझसे कहा गया कि वहां मत जाइए, जो जाता है उसकी कुर्सी चली जाती है। मैंने पूछा कि क्या नोएडा उत्तर प्रदेश का हिस्सा नहीं है? जब जवाब हां में मिला, तो मैंने साफ कह दिया कि कुर्सी तो एक दिन जानी ही है, तो फिर इससे इतना मोह क्यों? मैं जरूर जाऊंगा।' उन्होंने कहा कि उनके लिए जनता की समस्याओं का समाधान करना किसी भी अंधविश्वास से कहीं बड़ा था।

 

नोएडा पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री के सामने जो सच्चाई आई जो चौंकाने वाली थी। उन्होंने देखा कि लगभग 4 लाख घर खरीदार बिल्डरों के चक्कर काटकर थक चुके थे। लोगों ने अपने जीवन भर की जमापूंजी लगा दी थी लेकिन उन्हें घर नहीं मिल रहा था। योगी ने बताया, 'जब मैंने नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों की बैठक ली तो पता चला कि वे 9,000 करोड़ रुपये के कर्ज में डूबे हैं। अथॉरिटी खुद को भिखारी बता रही थी। मैंने ठान लिया कि चाहे जो हो, हमें इन बेघर हो रहे लोगों को न्याय दिलाना ही होगा।'

 

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'कर्ज में डूबी अथॉरिटी मुनाफे में आई'

योगी सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए कड़ी नीतियां बनाईं और भ्रष्टाचार में लिप्त तत्वों को सिस्टम से बाहर किया। मुख्यमंत्री ने गर्व से बताया कि उनकी सरकार के प्रयासों से आज उन 4 लाख परिवारों को उनके सपनों का घर मिल चुका है। इतना ही नहीं, जो अथॉरिटी कर्ज के बोझ तले दबी थी वह आज सुशासन और पारदर्शी नीतियों की बदौलत 6,000 करोड़ रुपये के फायदे में है। आज नोएडा न केवल प्रदेश बल्कि देश के बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश के हब के रूप में नई पहचान बना चुका है।


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