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एंड्रॉइड से महंगा सामान Iphone पर? जानिए इसका सच

बीते कुछ समय से यह चर्चा है कि आईफोन पर एंड्रॉइड से महंगा समान मिलता है। जानिए क्या है सच।

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सांकेतिक चित्र। (Canva)

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सोशल मीडिया पर एक रोचक चर्चा ने ध्यान आकर्षित किया है कि क्या कैब बुकिंग ऐप्स के एल्गोरिद्म आईफोन यूजर्स से ज्यादा किराया वसूलते हैं। कुछ यात्रियों ने देखा कि एक ही डेस्टिनेशन के लिए एंड्रॉइड और आईफोन पर दिखाए गए किराए में अंतर था। अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या इन ऐप्स पर प्राइस एल्गोरिद्म, डिवाइस के आधार पर अलग हो सकता है।

एंड्रॉइड और आईफोन पर किराए में अंतर

एक साइट द्वारा चेन्नई में तीन जगहों से एक ही गंतव्य के लिए एंड्रॉइड और आईफोन पर एक साथ कैब सर्च किया। हर बार आईफोन पर किराया अधिक दिखाया गया। हालांकि, यह अंतर सिर्फ छोटे दूरी के सफर और सिंगल राइड्स में अधिक स्पष्ट दिखा। हालांकि, जब Khabargaon की टीम ने नोएडा में इस बात की पुष्टि की तो एंड्रॉइड और आईफोन का किराया एक जैसा ही आया।

 

कैब कंपनियों ने इस पर पहले भी कहा था कि उनके एल्गोरिद्म डिवाइस के आधार पर किराया तय नहीं करते। उनका कहना है कि रियल-टाइम डिमांड, समय, और दूरी जैसे कारक किराया निर्धारित करते हैं।

क्या है विशेषज्ञों का मानना?

विशेषज्ञों का मानना है कि कैब ऐप्स इंस्टॉल करते समय यूजर्स से लिए गए डेटा का उपयोग किराया निर्धारित करने के लिए किया जाता है। कुछ तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनियां हार्डवेयर डेटा का उपयोग कर सकती हैं, जिससे डिवाइस के आधार पर किराए में अंतर उत्पन्न हो सकता है।

 

यह भी माना जाता है कि मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स, जो इन ऐप्स में उपयोग किए जाते हैं, यूजर की ऐप गतिविधि और डिवाइस का डेटा लेकर एल्गोरिद्म को ज्यादा स्मार्ट बनाते हैं। इसके तहत ऐप्स यूजर्स की सर्च हिस्ट्री, ऐप इस्तेमाल करने की लिमिट और कुछ दूसरे डाटा के आधार पर भी किराया तय कर सकते हैं।

 

ऐसा सिर्फ डिवाइस तक सीमित नहीं है। यूजर्स के ऐप इस्तेमाल करने के तरीके का भी किराए पर असर पड़ सकता है। अगर कोई व्यक्ति बार-बार कैब के किराए की जांच करता है, तो ऐप यह समझ सकता है कि वह यूजर कैब बुक करने के लिए इच्छुक है। ऐसे में ऐप्स किराए में वृद्धि कर सकते हैं, यह विश्वास करते हुए कि यूजर बुकिंग कर ही लेगा।

खाने की चीजों पर भी एंड्रॉइड vs आईफोन

एंड्रॉइड और आईफोन पर छिड़ी ये बहस सिर्फ कैब सर्विस तक सीमित नहीं है। कई लोग ये भी दावा कर रहे हैं कि फूड डिलीवरी ऐप पर इसका अंतर देखा जाता है। ये दावा किया जाता है कि आइओएस में खाना एंड्रॉइड कि तुलना में महंगा मिलता है। हालांकि इस दावे पर टीम ने पुष्टि की जो गलत साबित हुआ। दोनों फोन्स पर कीमत लगभग एक जैसी आईं।

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