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24 नहीं, 25 घंटे का हो जाएगा पृथ्वी पर एक दिन! वैज्ञानिकों का क्या है अनुमान?

हो सकता है कि भविष्य में पृथ्वी पर एक दिन 24 घंटे का हो जाए। हालांकि, ऐसा होने में अभी सदियां लग सकती हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर। (AI Generated Image)

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क्या हो कि एक दिन में 24 की बजाय 25 घंटे हो जाएं? क्या ऐसा हो भी हो सकता है? ये सवाल आपके मन में भी कभी न कभी आए ही होंगे। अगर नहीं भी आए तो भी ऐसा बिल्कुल हो सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में एक दिन 25 घंटे का हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि कभी पृथ्वी पर दिन 10 घंटे का ही होता था लेकिन आज 24 घंटे का है और भविष्य में यह 25 घंटे का हो सकता है।

 

25 घंटे का दिन अभी शायद सिर्फ अनुमान हो सकता है। मगर वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 20 लाख साल बाद ऐसा हो जाएगा। क्योंकि पृथ्वी के घूमने की रफ्तार कम हो गई है। साथ ही साथ चंद्रमा भी अब पृथ्वी से दूर होता जा रहा है।

 

ऐसा अनुमान क्यों लगाया जा रहा है? और क्यों आने वाले समय में 25 घंटे का एक दिन हो सकता है? समझते हैं।

 

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24 घंटे का ही एक दिन कैसे हुआ?

इसका आइडिया प्राचीन मिस्र से निकला। सिडनी ऑब्जर्वेटरी में एस्ट्रोनॉमी के कंसल्टेंट क्यूरेटर डॉ. निक लोम्ब ने ABC को बताया कि 'हर दिन 24 घंटे और हर घंटे में 60 मिनट और हर 60 मिनट में 60 सेकंड का आइडिया काफी दिलचस्प है।'

 

उन्होंने बताया, 'प्राचीन मिस्र के लोग धूपघड़ी का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने दिन को 10 घंटे में बांटा था। सुबह और शाम के एक-एक घंटे को ट्वाइलाइट पीरियड यानी अर्धरात्रि कहते थे। रात 12 घंटे की ही होती थी। इस तरह से 24 घंटे का कॉन्सेप्ट आया।'

 

डॉ. लोम्ब का कहना है कि बाद में बेबोलियन सभ्यता के लोगों ने घंटों और मिनटों को 60-60 यूनिट में बांटा। इसके लिए बेस-60 सिस्टम का इस्तेमाल किया, जिसका उपयोग सुमेरियन लोग करते थे। इस तरह से 1 घंटा 60 मिनट और 1 मिनट 60 सेकंड का हो गया।

 

उन्होंने बताया कि 16वीं सदी में जब यूरोप में मैकेनिकल घड़ियां बननी शुरू हुईं तो यह सिस्टम मैच हो गया और तब से ही 24 घंटे का एक दिन हो गया।

 

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तो क्या 25 घंटे का दिन हो सकता है?

ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि पृथ्वी का घूमना धीमा हो रहा है। और ऐसा चंद्रमा की ग्रेविटी के कारण होता है।

 

NASA का कहना है कि चंद्रमा की ग्रेविटी के कारण ज्वार-भाटा आता है। इससे समंदरों में उभार आता है जो एक ब्रेक की तरह काम करता है। इस कारण पृथ्वी के घूमने की रफ्तार कम हो जाती है।

 

यह असर न के बराबर होता है। यह घड़ी में सेकंड नहीं, बल्कि मिलीसेकंड में जुड़ता है। लगभग 1.7 मिलीसेकंड प्रति सदी। हालांकि, जब लाखों या अरबों साल में मापा जाता है तो यह असर बहुत बड़ा हो जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि 20 लाख साल बाद पृथ्वी पर एक दिन 25 घंटे का हो सकता है।

 

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क्या ऐसा होता रहता है?

MIT में फिजिक्स की असिस्टेंट प्रोफेसर सारा मिलहॉलैंड ने लाइव साइंस को बताया, 'पृथ्वी ने इतिहास के अलग-अलग समय पर ऐसे दिन देखे हैं जो अभी के दिनों से छोटे और लंबे दोनों थे।' उन्होंने बताया कि लगभग एक अरब साल पहले एक दिन में सिर्फ 19 घंटे ही होते थे।

 

वैज्ञानिकों को इस बात के सबूत मिले हैं कि करोड़ों साल पहले पृथ्वी पर हर साल 400 से ज्यादा दिन का होता था और दिन 21 घंटे का होता था। पृथ्वी पर जीवन शुरू होने के बाद कई सालों तक दिन 10 घंटे का भी होता था। ऐसे समय भी आए हैं जब दिन 24 घंटे से ज्यादा लंबे होते थे।

 

वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी के घूमने की गति धीरे-धीरे बदल रही है। यह दिखाता है कि समय जैसी स्थिर शक्ति ब्रह्मांड की शक्ति से अछूती नहीं है।

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