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वारंट लेकर गई थी पुलिस, जज को ही समझ बैठी चोर, नप गया SI

फिरोजाबाद में चोरी से जुड़े एक केस में पुलिसिया लापरवाही की ऐसी कहानी आई है, जिसके चलते विभाग की जमकर किरकिरी मची है। क्या हैं मामला, पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

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AI Generated Image. (Photo Credit: Meta AI)

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उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में दशकों पुराने चोरी के मामले में पुलिस, चोर नहीं पुराने जज को ही तलाशने में जुट गई। सब इंस्पेक्टर ने ऐसी लापरवाही बरती, जिसकी वजह से जज को ही असहज हो जाना पड़ा। अधिकारी ने संदिग्ध के ठिकाने की रिपोर्ट तैयार करने की जगह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) नगमा खान की कोर्ट को ही बता दिया कि आरोपी 'नगमा खान' अपने घर पर नहीं मिल पाई।

 

24 साल पुराने चोरी के इस केस में पुलिस को कोर्ट ने आदेश दिया था कि आरोपी को कोर्ट में पेश कर दिया जाए। CJM के खिलाफ पुलिस विभाग ने ऐसी गुस्ताखी की तो अधिकारियों को गुस्सा आ गया। जांच पर गए SI और SSP दोनों को लाइन हाजिर कर दिया गया है, दोनों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो गई है।  


जज को ही आरोपी समझ बैठा SI
पुलिस अधिकारी बनवारीलाल ने गंभीर लापरवाही बरती। CJM नगमा खान ने CrPC की धारा 82 के तहत 2001 के एक मामले में आरोपी राजकुमार उर्फ पप्पू को समन किया किया था। उस पर चोरी करने और बंधक बनाने के आरोप थे। SI बनवारीलाल ने दस्तावेज को ध्यान से नहीं पढ़ा और गलती से जज का नाम आरोपी के रूप में दर्ज कर लिया।

 

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कोर्ट से कहा- 'नगमा' घर पर नहीं है
जब यह मामला अदालत में पहुंचा, तो बनवारीलाल ने कहा कि आरोपी घर पर नहीं थीं, इसलिए उनके खिलाफ अगले आदेश जारी किए जाएं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बनवारीलाल ने समन को गैर-जमानती वारंट समझने की भूल की और पूरी तरह से बिना कुछ देखे, जज का ही नाम डाल दिया। कोर्ट ने कहा कि बनवारीलाल ने दस्तावेज को ठीक से नहीं पढ़ा और उनकी इस साफ और गंभीर गलती से उनकी कार्यक्षमता और फर्ज से संबंधित जानकारी संदेह के घेरे में है।ऑ

क्या था मामला?
साल 2001 में फिरोजाबाद नॉर्थ पुलिस स्टेशन में एक केस सामने आया। मामला चोरी और बंधक बनाने से जुड़ा था। साल 2012 में यह कोर्ट में एडमिट हुआ। पहली सुनवाई 2013 में हुई। जून 2024 में इसे फिरोजाबाद के एडिशनल सिविल जज की अदालत में पेश किया गया।  जब आरोपी राजकुमार उर्फ पप्पू अदालत में पेश नहीं हुआ तो चीफ ज्युडीशियल मजिस्ट्रेट नगमा खान ने 23 मार्च को CrPC की धारा 82 के तहत समन जारी किया। 

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कोर्ट ने जमकर लताड़ा
बनवारीलाल को लगा कि यह गैर जमानती वारंट है, उन्होंने ऑर्डर ही ठीक से नहीं पड़ा। उन्होंने ध्यान नहीं दिया और मजिस्ट्रेट का नाम ही आरोपी के तौर पर दर्ज कर लिया। कोर्ट ने इसे आंखमूंदकर की गई गलती करार दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यह लापरवाही है, जिससे पता चल रहा है कि बनवारी लाल ने अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरती है।

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SI लाइनहाजिर, अब चल रही विभागीय जांच
अदालत ने कहा कि ऐसी लापरवाही से नागरिकों के मौलिक अधिकारों को खतरा है, उनकी आजादी प्रभावित हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि SI की कार्यशैली जांची-परखी जाए और सुधार किया जाए। कोर्ट ने आदेश की प्रतियां, आदेश की प्रतियां डीजीपी, फिरोजाबाद डीपी, और आगरा रेंज के इंस्पेक्टर जनरल को भेजी हैं। फिरोजाबाद के एसएसपी ने कहा है कि बनवारीलाल को तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन्स में ट्रांसफर कर दिया गया है, उनके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। 

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