logo

मूड

ट्रेंडिंग:

'हमारे बच्चे बदल दिए गए', IVF सेंटर में धांधली का दावा, इंसाफ के लिए भटक रहा कपल

IVF तकनीक से बच्चे को जन्म देना एक कपल पर भारी पड़ा है। कपल का कहना है कि उनके बच्चे ही बदल दिए गए हैं।

IVF Treatment

राहुल राठौर और मीनू राठौर। Photo Credit: Social Media

दिल्ली में एक दंपति ने आरोप लगाए हैं कि उनके बच्चे बदल दिए गए है। ग्रेटर कैलाश के लिए फर्टिलिटी क्लीनिक में IVF ट्रीटमेंट के दौरान उन्होंने धांधली का दावा किया है। उनका आरोप है कि बच्चों की अदलाबदली हो गई है। जब डीएनए टेस्ट कराया गया तो पता चला कि बच्चों की अदलाबदली हुई है, दंपति उन बच्चों के जैविक माता-पिता नहीं हैं। 

दंपति के पास पहले से ही दो बेटियां थी। दो और बेटियां हो गईं। राहुल राठौर ने कहा है कि IVF ट्रीटमेंट उन्होंने परिवार बढ़ाने के लिए कराया था लेकिन उनके साथ यह धांधली हो गई। अब उनका कहना है कि अस्पताल अपनी गलती मानने के लिए तैयार नहीं है, पुलिस से लेकर अदालत तक यह कपल गुहार लगा चुका है। कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है। 

यह भी पढ़ें: IVF स्कैम: एक महिला ने 37 बार डोनेट किए अपने अंडे, भारत में इससे जुड़े नियम क्या

किस्सा क्या है?

फरवरी 2025 की बात है। गायनोकोलॉजिस्ट की सलाह पर यह कपल SCI IVF क्लीनिक के पास पहुंचा। मई 2025 में यह बताया गया कि तीनों भ्रूण ट्रांसफर किए गए हैं। 5 जनवरी 2026 को उनकी पत्नी ने दिल्ली के एक प्राइवेट अस्पताल में जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया। 

क्यों शक हुआ?

डिलीवरी के बाद तत्काल शक बढ़ने लगा। बच्चों के चेहरे अभिभावकों से नहीं मिलते थे। पहले लगा कि बच्चों की अदला-बदली हो गई है, क्योंकि उसी दिन कई डिलीवरी हुई थी। शक को दूर करने के लिए डीएनए टेस्ट कराया, जिसमें यह निकला कि दोनों में से किसी का भी जैविक बच्चा नहीं है। 

IVF सेंटर ने क्या बताया?

IVF सेंटर पर गए, जहां बच्चों की डिलीवरी हुई थी। IVF सेंटर से बात किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। कपल अपने बच्चों के बारे में पूछता रहा लेकिन उन्हें कुछ पता नहीं चला। कपल का कहना है कि या तो IVF के दौरान भ्रूण बदले गए हैं या बच्चों को बदल दिया गया है।

 

यह भी पढ़ें: कोमा में पड़ा सैनिक, पत्नी ने IVF के लिए मांगा स्पर्म, हाई कोर्ट ने इजाजत दी

अब आगे क्या?

राहुल राठौर ने कहा है कि अब वह कोर्ट का रुख करेंगे। 17 जनवरी को उन्होंने इस संबंध में शिकायत दी थी। 3 महीने बीत गए हैं कोई जांच नहीं हुई है। 31 मई 2026 को ग्रेटर कैलाश थाने में FIR दर्ज हुई कोई कार्रवाई नहीं हुई। 10 जून को दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के तह काम करने वाली ART और सेरोगेसी अथॉरिटी ने नोटिस जारी किया। 12 जून को दिल्ली सचिवालय में सुनवाई थी। 

क्या चाहता है परिवार?

शुक्रवार को हुई सुनवाई में दंपति ने क्लीनिक से मिले दस्तावेजों को जमा कर दिया है। 3 महीने बाद अगली सुनवाई है। अब दंपति जवाबदेही चाहता है। दंपति चाहता है कि उनका अपना बच्चा कहां है, यह पता चल जाए। 

Related Topic:#Viral News

और पढ़ें