बेंगलुरु के एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने पुरानी यादों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अनोखा मेल पेश किया है। पंकज ने अपने दादाजी के 1970 के दशक के पुराने रोटरी फोन को पूरी तरह फंक्शनल AI असिस्टेंट में बदल दिया है। इस अनोखे डिवाइस का नाम उन्होंने 'हे किरी' रखा है। सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही पंकज फोन का रिसीवर उठाकर हाय किरी कहते हैं, फोन तुरंत ऐक्टिवेट हो जाता है।
AI असिस्टेंट कमांड सुनने लगता है। इसके बाद पंकज फोन के जरिए कई काम करते दिखाई देते हैं जैसे कैब बुक करना, ईमेल का समरी सुनना, लाइट्स कंट्रोल करना और यहां तक कि खाने का ऑर्डर देना।
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Raspberry Pi बना विंटेज AI फोन
यह पूरा सिस्टम Raspberry Pi नाम के छोटे कंप्यूटर पर आधारित है। जिसकी कीमत करीब 25 डॉलर बताई जा रही है। बाहर से देखने पर यह एक साधारण 50 साल पुराना रोटरी फोन लगता है। इसके अंदर माइक्रोफोन, स्पीकर, छोटे हार्डवेयर मॉड्यूल और एक लोकल AI एजेंट लगाया गया है। खास बात यह है कि यह सिस्टम क्लाउड पर निर्भर नहीं करता बल्कि लोकल प्रोसेसिंग के जरिए काम करता है। जिससे डेटा प्राइवेसी भी बनी रहती है।
पंकज ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'मैं प्लास्टिक के साधारण स्मार्ट स्पीकर्स से बात करते-करते थक गया था। इसलिए मैंने सोचा कि क्यों न दादाजी के पुराने फोन को ही AI असिस्टेंट बना दिया जाए। बाहर से यह बिल्कुल विंटेज फोन दिखता है लेकिन अंदर एक छोटा AI एजेंट काम कर रहा है'। उन्होंने बताया कि यह एक डमी रोटरी फोन था। जिसमें उन्होंने Raspberry Pi, माइक्रोफोन, स्पीकर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स जोड़कर इसे स्मार्ट डिवाइस में बदल दिया है।
इस डिवाइस में हाय किरी नाम का वेक-अप वर्ड इस्तेमाल किया गया है। खास बात यह है कि AI केवल तब सुनता है जब फोन का रिसीवर उठाया जाता है। जिससे अनावश्यक रिकॉर्डिंग का खतरा नहीं रहता और प्राइवेसी सुरक्षित रहती है।
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नॉस्टैल्जिया और AI का कमाल का कॉम्बिनेशन
वीडियो पोस्ट होने के कुछ ही घंटों में हजारों लाइक्स, रीपोस्ट और कमेंट्स मिलने लगे है। कई यूजर्स ने इसे नॉस्टैल्जिया और AI का परफेक्ट कॉम्बिनेशन बताया है। एक यूजर ने कमेंट किया यह सबसे क्रिएटिव AI प्रोजेक्ट्स में से एक है जो मैंने देखा है। वहीं, एक अन्य यूजर ने सुझाव दिया कि ऐसा डिवाइस डिमेंशिया या बुजुर्ग मरीजों की मदद के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
कई लोगों ने इस प्रोजेक्ट का DIY गाइड भी मांगा है। हालांकि, पंकज ने फिलहाल इसे एक स्टुपिड फन प्रोजेक्ट बताया है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर लोगों की मांग बढ़ती है तो वे इसके निर्माण की प्रक्रिया शेयर कर सकते हैं।
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पहले भी बना चुके हैं AI प्रोजेक्ट
पंकज इससे पहले भी कई दिलचस्प AI प्रोजेक्ट्स बना चुके हैं। हाल ही में उन्होंने एक AI रूममेट तैयार किया था। AI रूममेट किचन में कैमरे के जरिए गतिविधियों पर नजर रखता था और फ्रिज से फल चुराने की कोशिश करने वाले को पकड़ लेता था। एक अन्य प्रोजेक्ट में उन्होंने ऐसा डिवाइस बनाया था जो व्यक्ति की नींद के दौरान बॉडी पोजिशन के आधार पर पंखे को ऑटोमैटिक ऑन या ऑफ कर देता था।
यह नया प्रोजेक्ट दिखाता है कि तकनीक केवल आधुनिक गैजेट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरानी चीजों को भी नई जिंदगी दे सकती है। किरी जैसे प्रयोग यह साबित करते हैं कि जब क्रिएटिविटी और टेक्नोलॉजी साथ चलते हैं तो अतीत और भविष्य के बीच एक खूबसूरत पुल बन जाता है।