देशभर में कल भारतीय गणतंत्र की 77वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाई गई। दिल्ली स्थित कर्तव्य पथ पर देश के विकास और सैन्य ताकत की झलक दिखी तो कई जगहों पर बड़े आयोजन किए गए। देशभर के स्कूलों में भी गणतंत्र का जश्न मनाया गया लेकिन मध्य प्रदेश के मैहर जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जो गणतंत्र के 77 वर्ष पूरे होने के बावजूद भी हमारी व्यवस्थाओं की पोल खोल रही है। सरकारी स्कूल में बच्चों को थाली के बजाय फटे कागजों पर खाना परोसा गया। इस घटना के बाद प्रशासन और सरकार पर सवाल उठने लगे हैं।
एमपी के सरकारी हाई स्कूल भटिगंवा में आयोजित मिड-डे-मील के दैरान बच्चों को थाली या फिर डिस्पोजेबल प्लेट के बजाय फटी हुई किताबों के पन्नों पर खाना परोसा गया। इस घटना की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बच्चे जमीन पर कतार में बैठे हैं और कागज के पन्नों पर खाना खा रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद लोग स्कूल प्रशासन पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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स्कूल में लापरवाही
हर साल गणतंत्र दिवस पर स्कूलों में झंडा फहराया जाता है और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। एमपी के सरकारी हाई स्कूल भटिगंवा में भी हर साल की तरह कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम खत्म होने के बाद बच्चों के लिए खाने का इंतजाम किया गया था। हालांकि, खाने की व्यवस्था स्कूल प्रशासन ने सही से नहीं की।
बच्चों के लिए खाने का इंतजाम तो किया गया लेकिन खाना खिलाने के लिए थाली या प्लेट का इंतजाम स्कूल प्रशासन ने नहीं किया। थाली के बजाय स्कूल प्रशासन ने पुरानी किताबों और कॉपियों के फटे पन्नों को बिछाकर उन पर ही हलवा और पूड़ी परोसी।
वायरल हुई तस्वीरें
स्कूल प्रशासन ने बच्चों के स्वास्थ्य को नजरअंदाज करते हुए कागजों पर खाना परोसा। कागजों पर स्याही के दाग और गंदगी भी नजर आ रही है। इन गंदे कागजों पर बच्चे कतार में बैठकर खाना खा रहे हैं। सोशल मीडिया पर अब यह वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो को शेयर कर लोग सरकार और स्कूल प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं।
वहीं, मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से यह वीडियो शेयर कर सरकार पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने पोस्ट में लिखा, 'मध्य प्रदेश में मासूम कब तक सरकार की लापरवाही से शर्मिंदगी और अपमान झेलते रहेंगे? मैहर में गणतंत्र दिवस पर बच्चों को किताब, कॉपी के फटे पन्नों में खाना परोस दिया गया! यह ना सिर्फ बच्चों बल्कि विद्यादायिनी देवी का भी अपमान है! मोहन सरकार और उसके प्रशासन की मासूमों को लेकर संवेदना शून्य हो चुकी है!'
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क्या बोले अधिकारी?
इस घटना के बाद जब वीडियो वायरल हुआ तो प्रशासन पर सवाल खड़े होने लगे। इसके बाद इसके बाद डीसीपी विष्णु त्रिपाठी ने कहा कि यह वीडियो उन्होंने देखा है और इस मामले की जांच के आदेश ब्लॉक रिसोर्स सेंटर को दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल में जाकर मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इश मामले में लापरवाही पाई गई तो दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।