भारत के ज्यादातर मोबाइल फोनों में दोपहर करीब 12 बजे से कुछ मिनट पहले अचानक एक तेज अलर्ट बजा। यह किसी सायरन की तरह था, जो बेहद तेज था, जिसने भी सुना, चौंक गया कि अचानक यह क्या हो गया। एक साथ ही हर किसी का फोन बजने लगा। कुछ लोग घबराए, कुछ लोगों को लगा कि यह क्या हो गया कि आसपास के सारे मोबाइल फोन, इस तरह से बजने लगे, वाइब्रेट होने लगे।
जिन्होंने फोन देखा, वह यह समझ गए कि यह मैसेज, सरकार ने भेजा है। यह एक ट्रायल था, जिसके गंभीर और गहरे मायने छिपे हैं। यह अलर्ट तो था लेकिन इस अलर्ट के बाद लोगों को न तो भागना था, न ही कुछ करना था। यह सिर्फ एक ट्रायल था, जिससे यह पता लग सके कि आपदा की स्थिति में क्या लोगों तक, सरकार ऐसे ही सूचना फैला सकती है या नहीं। अब इस मैसेज पर उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और अब राज्यसभा सांसद, दिनेश शर्मा ट्रोल हो रहे हैं।
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दिनेश शर्मा, राज्यसभा सांसद, बीजेपी:-
आज तो मोबाइल पर एक साथ अलार्म बजा है। यह संकेत है कि भारत अब विकसित राष्ट्र बनता जा रहा है। अब वह नहीं है कि जब सायरन बजेगा तब लोगों को अलर्ट होगा। यह डिजिटल इंडिया के रूप में भारत बहुत आगे जा रहा है।
दिनेश शर्मा ट्रोल क्यों हो रहे हैं?
सुप्रिया श्रीनेत, राष्ट्रीय प्रवक्ता, कांग्रेस:-
'आज मोबाइल पर एक साथ अलार्म बजा है, मतलब भारत अब विकसित है।' यह BJP के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा जी हैं, कह रहे हैं। BJP में एक से एक शिरोमणि भरे पड़े हैं दुख इस बात का है कि यह एक पढ़े लिखे व्यक्ति हैं, लखनऊ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रह चुके हैं।
दिनेश शर्मा के ट्रोल होने की यह वजह यह है कि वह अलार्म बजने को डिजिटल भारत की उपलब्धि बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह कोई उपलब्धि नहीं है, दूसरे देशों में ऐसी चीजें बेहद सामान्य हैं। सरकार पहले भी SMS और नोटिफिकेशन के जरिए ऐसे संदेश देती रही है।
लोग क्या लिख रहे हैं?
सुप्रिया श्रीनेत के X पोस्ट पर संजीव शर्मा नाम के एक शख्स ने लिखा, 'भाजपाइयों ने तो ताली भी एक साथ बजाई थी पूरे देश में।' संजीव सिंह नाम के एक शख्स ने लिखा, 'यह भी संकेत है कि आप देश को किस दिशा में ले जा रहे हैं।'
आर्यन नाम के एक शख्स ने लिखा, 'हमारे देश में प्रोफेसर बनने के लिए 'दिमाग' से ज्यादा 'डिग्री' और 'डिग्री' से ज्यादा 'सही गोत्र' की जरूरत होती है। जब यूनिवर्सिटी की कुर्सियां काबिलियत के बजाय 'खास वंशावली' के आधार पर बांटी जाएं, तो वहां से निकलने वाले लोग ऐसे ही 'अलार्म-वादी' होते हैं। अगर फोन की घंटी बजना ही विकास है, तो मंदिर का घंटा तो सदियों से विकसित भारत की घोषणा कर रहा है। त्रासदी यह नहीं है कि उन्होंने यह कहा, त्रासदी यह है कि वे 'पढ़ा' चुके हैं। अक्ल और पद के बीच का फासला ही इस तंत्र की असली उपलब्धि है।'
हेमंत गुप्ता ने लिखा, 'बीजेपी में जाने की पहली स्थिति यही है कि अपनी बुद्धि को इस्तेमाल नहीं करना है, जितना बताया जाए उतना ही बोलना है। वर्ना महाराज भी प्याज से गरमी नहीं भगाते।'
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क्या है थी ये बला?
ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय दूरसंचार मंत्री:-
NDMA के साथ मिलकर दूरसंचार विभाग ने सी-डॉट के जरिए एक सेल ब्रॉडकास्टिंग सॉल्युशन की शुरुआत की है। जब कभी देश में कहीं भी कोई आपदा आए तो लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई यह स्वदेशी तकनीक है जो 21 भाषाओं में लोगों तक मैसेज भेज सकती है। इससे हिमालय की पहाड़ियों से लेकर समुद्र के तट और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों तक हर जगह, हर गांव और कस्बे तक लोगों की जान और माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह सुविधा बहुत ही उपयोगी रहेगी।
केंद्र सरकार ने इसे 'सचेत नाम दिया है। यह सूचना प्रसारण मंत्रालय का इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम है, जो बाढ़, भूकंप, चक्रवात जैसी आपदाओं की सूचना देकर आपको अलर्ट कर सकता है।