इस साल देश में मानसून के आखिरी दिनों में उम्मीद से कम बारिश होने के कारण चावल की पैदावार में बड़ी गिरावट देखी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, पिछले 10 सालों में यह पहली बार है जब चावल का उत्पादन घटेगा। यह पिछले 20 सालों की सबसे बड़ी गिरावट हो सकती है। सूखे जैसे हालात की वजह से दक्षिण और पूर्वी भारत के राज्यों में धान की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इससे देश में चावल के दाम बढ़ने की पूरी संभावना है।
हालांकि, सरकार के पास पहले से ही बहुत बड़ा स्टॉक मौजूद है इसलिए हमारे बजट पर इसका कोई खासा असर नहीं पड़ने वाला है। पिछले कुछ सालों में अच्छी उपज के कारण सरकारी गोदामों में अनाज भरे हुए हैं।
यह भी पढ़ें: ग्रीन जोन में ओपन हुआ शेयर मार्केट, IT शेयरों में आज भी दिखी गिरावट
उत्पादन में 6.5% की कमी का अनुमान
राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, बारिश की कमी के कारण इस बार पैदावार काफी कम रहेगी। पिछले साल देश में रिकॉर्ड 15.4 करोड़ टन चावल हुआ था। इस साल लगभग 100 लाख मीट्रिक टन यानी करीब 6.5% की कमी आ सकती है। साल 2009-10 में पड़े भीषण सूखे के बाद यह उत्पादन में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
बारिश में कमी और कम बुआई
इस मानसून सीजन में 1 जून से अब तक देश भर में सामान्य से 15% कम बारिश दर्ज की गई है। कुछ प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में तो यह कमी 42% तक पहुंच गई है। बारिश न होने के कारण इस साल गर्मी की फसल (खरीफ) भी घटकर 4.26 करोड़ हेक्टेयर रह गया है। यह पिछले साल से लगभग 4% कम है।
देश के कुल चावल उत्पादन में 80% से ज्यादा हिस्सेदारी गर्मी की फसल की होती है। साथ ही बाकी बची पैदावार सर्दियों की फसल यानी रबी से मिलती है। इस बार डैम और तालाबों में पानी का लेवल भी काफी नीचे चला गया है। इस कारण इस बार सर्दियों के मौसम में भी धान की बुआई का इलाका घटने की आशंका जताई जा रही है।
यह भी पढ़ें: माया टाटा संभालेंगी वेस्टसाइड की कमान, जानें कौन हैं टाटा ग्रुप की नई लेडी बॉस?
मंडियों में चावल का दाम बढ़ा
उत्पादन घटने की आशंका मात्र से ही स्थानीय मंडियों में चावल के दाम अभी से बढ़ने लगे हैं। इसका सीधा असर बाहर के बाजारों पर पड़ा है। भारत से बाहर भेजे जाने वाले चावल की कीमतें एक साल के सबसे ऊपरी लेवल पर पहुंच गई हैं। वहीं वियतनाम और थाईलैंड जैसे अन्य निर्यातक देशों में भी कीमतें पहले से ही तेज हैं।
इन सब में हमारे लिए राहत की बात यह है कि भारत के पास चावल का भरपूर रिजर्व मौजूद है। 1 सितंबर तक सरकारी गोदामों में करीब 5.96 करोड़ टन चावल और धान जमा था। यह सरकार के तय लक्ष्य से लगभग 6 गुना ज्यादा है। इसी मजबूत स्टॉक के दम पर भारत बिना किसी रोक-टोक के दुनिया भर में अपना चावल भेजना जारी रख सकेगा।
