भारत और अमेरिका के बीच होने वाला व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर तभी होंगे, जब अमेरिका में नया टैरिफ ढांचा पूरी तरह लागू हो जाएगा। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने सोमवार को एक ट्रेड डेटा ब्रीफिंग के दौरान कही। अमेरिकी सरकार, टैरिफ नीतियों को लेकर अदालतों के निशाने पर है। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ नियमों पर फटकार लगाई थी।
फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप सरकार के रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द कर दिया था। अदलती फैसले के कुछ घंटों बाद ही डोनाल्ड ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया, जिसमें कुछ टैरिफ हटाए गए। अमेरिका में आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत की एडिशनल इम्पोर्ट सरचार्ज लगाया गया।
डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया कि नई टैरिफ दरें, अब 15 प्रतिशत होंगी।
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क्यों टैरिफ समझौता होल्ड रहेगा?
कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने कहा, 'भारत और अमेरिका के बीच अभी डील के डिटेल्स पर बातचीत चल रही है। हम चाहते हैं कि अमेरिका ग्लोबल टैरिफ रेट्स को बहाल करे, जिससे समझौता अंतिम रूप ले सके। दोनों देश एक अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट पर काम कर रहे हैं, जिसे मार्च 2026 के अंत तक फाइनल और साइन करने की उम्मीद है।'
डोनाल्ड ट्रंप भारत को उलझा रहे हैं?
डोनाल्ड ट्रंप:-
'कोर्ट रिपब्लिकन और मेरे साथ बहुत गलत बर्ताव करते हैं। कोर्ट ने हमेशा उनका साथ दिया, जिन्हें नहीं बचाना चाहिए। वे बहुत ज्यादा राजनीतिक हो गए हैं। केस मायने नहीं रखते, जज मायने रखते हैं।'
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डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है, 'अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण और बेवजह है। यह उन देशों और कंपनियों के लिए एक तोहफा था जो दशकों से यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका को लूट रहे थे। मेरे पास अधिकार हैं। एक राष्ट्रपति के तौर पर, मैं बस इतना ही कर सकता हूं कि उनके बुरे बर्ताव के लिए उनकी आलोचना करूं। यूनाइटेड स्टेट्स सुप्रीम कोर्ट के बारे में दिया गया यह बयान भविष्य में मेरे लिए सिवाय मुश्किलों के और कुछ नहीं लाएगा, लेकिन मुझे लगता है कि सच बोलना मेरा फर्ज है।'
डोनाल्ड ट्रंप के फैसले यह साफ है कि वह नई टैरिफ नीतियों को लेकर कोई न कोई योजना जल्द बना सकते हैं। उन्होंने कोर्ट के फैसले को पहले ही मूर्खतापूर्ण बताया था। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी इशारा किया है कि वह अब राष्ट्रपति के तौर पर अपनी ताकत का इस्तेमाल करेंगे।
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अमेरिका के साथ नया टैरिफ समझौता क्या था?
फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौता हुआ था। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले 'रेसिप्रोकल टैरिफ' को 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी किया था। रूस के साथ तेल खरीदने की वजह से लगाया गया 25 फीसदी टैक्स भी हटा दिया था।
भारत ने रूसी तेल की खरीद कम करने और ऊर्जा के लिए अमेरिका की ओर रुख करने पर सहमति जताई थी। भारत ने बादाम, अखरोट, वाइन और चिकित्सा उपकरणों पर टैरिफ कम करने की सहमति जताई थी।
यह तय किया गया था कि भारत अगले कुछ साल में अमेरिका के टेक्नोलॉजी और एनर्जी सेक्टर में करीब 500 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा। इस समझौते पर अंतिम हस्ताक्षर अमेरिकी अदालती फैसलों और नई टैरिफ व्यवस्था लागू होने के कारण थोड़े समय के लिए लंबित हैं।
