'खामेनेई' जिंदा, IRGC मजबूत, खाड़ी तबाह, ईरान से कैसे जंग हार रहे ट्रंप? समझिए
डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ छिड़ी जंग में अब तक जीत नहीं मिली है। इजरायल को भीषण नुकसान हो रहा है। ईरान, इस जंग में भारी पड़ रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Photo Credit: PTI
अमेरिका और इजरायल मिलकर भी ईरान के खिलाफ 15 दिनों से जारी जंग नहीं जीत पाए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप
ने 28 फरवरी को इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की शुरुआत की थी, जिसमें वह बुरी तरह फेल होते नजर आ रहे हैं। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइट्स और न्यूक्लियर सुविधाओं पर हमले किए। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत भी हुई है, फिर भी यह जंग, अमेरिका और इजरायल दोनों को भारी पड़ रही है।
डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि युद्ध जीत लिया गया है और अमेरिकी सेना ने ईरान को बुरी तरह हराया है। लेकिन हकीकत में युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है और कई चुनौतियां बनी हुई हैं। डोनाल्ड ट्रंप, अभी न तो ईरान से युद्ध जीत पाए हैं, न ही उसके हथियारों के जखीरों को तबाह कर पाए हैं। ईरान तनकर खड़ा है और हर दिन अमेरिका, इजरायल और खाड़ी के देशों को ऐसे जख्म दे रहा है, जिनसे उबरने में कई साल लग सकते हैं।
यह भी पढ़ें: खाड़ी देशों की वह कमजोरी, जिस पर हमला कर सकता है ईरान
ईरान से भिड़कर अमेरिका ने क्या-क्या आफत मोल ली है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बेबस हो गई है दुनिया
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है। दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान के हमलों और ड्रोन की धमकियों से जहाजों का आना-जाना लगभग रुक गया है। तेल की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं और पेट्रोल महंगा हो गया है। भारत जैसे देश में पेट्रोलियम संकट पैदा हो रहा है। अमेरिकी नौसेना के लिए इसे जबरदस्ती खोलना बहुत मुश्किल और खतरनाक है। सस्ते ड्रोन से ईरान इसे बंद रख सकता है। बिना राजनीतिक समझौते के यह समस्या हल नहीं हो रही। ट्रंप बिना शर्त सरेंडर मांग रहे हैं, लेकिन ईरान मानने को तैयार नहीं है।
'खामेनेई' तो जिंदा हैं, वह उदार थे, नए सुप्रीम लीडर और भी कट्टर
अमेरिका-इजरायल के पहले हमलों में पुराने सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई मारे गए। उनकी जगह उनके बेटे मोहताबा खामेनेई को नया लीडर बना दिया गया। वह अपने पिता से भी ज्यादा कट्टर हैं। इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स पर उनका नियंत्रण अपने पिता से भी बेहतर है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में सत्ता परिवर्तन का दावा किया था। ईरान और मजबूती से खड़ा हो गया है। उनका दावा कमजोर पड़ गया है। ईरान का रिजीम अभी भी मजबूत है और कोई बड़ा विद्रोह नहीं हुआ।
यह भी पढ़ें: 'भारत हमारा दोस्त है', होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान ने भारतीय हितों का किया वादा
इजरायल ही नहीं दे रहा है अमेरिका का साथ
डोनाल्ड ट्रंप की आदत है हर जंग में वह तत्काल ऐलान करते हैं। यह जंग अमेरिका पर भारी पड़ रही है। पश्चिम एशिया में ज्यादातर सैन्य बेस वह गंवा चुके हैं। अब वह जल्दी जंग खत्म करना चाहते हैं, लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ऐसा नहीं चाहते। इजरायल के लिए यह क्षेत्रीय सुरक्षा का लंबा संघर्ष है। इजरायल ने ईरान के तेल ठिकानों पर भी हमले किए हैं। डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि युद्ध खत्म करने का फैसला दोनों मिलकर लेंगे, लेकिन इजरायल का रुख अमेरिका से अलग है। डोनाल्ड ट्रंप, जिस ठसक से आए थे, वह अब भारी पड़ रही है।
जंग का मकसद ही हासिल नहीं कर पाए डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप प्रशासन युद्ध के लक्ष्य बार-बार बदल रहा है। कभी न्यूक्लियर प्रोग्राम खत्म करने की बात, कभी मिसाइल प्रोग्राम, कभी रिजीम चेंज। लेकिन साफ जीत की कहानी नहीं बन पा रही। इससे अमेरिकी लोग और दुनिया को समझ नहीं आ रहा कि आखिर जीत क्या होगी।
ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम भी नहीं रोक पाए ट्रंप और नेतन्याहू
डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया था कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम रोक देंगे। डोनाल्ड ट्रंप दावा करते हैं कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम तबाह हो गया है। ईरान के पास अभी भी काफी मात्रा में अत्याधिक संवर्धित यूरेनियम बचा है। अगर यह स्टॉक बचा रहा तो ईरान भविष्य में दोबारा न्यूक्लियर बम बना सकता है। इसे हटाने के लिए ग्राउंड ऑपरेशन की जरूरत है। न तो ईरान, न ही अमेरिका इस स्थिति में है कि ईरान जैसे देश में घुसकर ग्राउंड ऑपरेशन कर सकें।
यह भी पढ़ें: ईरान से दुश्मनी और अमेरिका भी छोड़ रहा साथ, नए संकट में फंसे खाड़ी देश
ईरान में सत्ता परिवर्तन वाला दावा भी फेल हो गया
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानियों से कहा था कि अब तुम्हारी आजादी का समय आ गया है, उठो और सरकार के खिलाफ विद्रोह करो। अभी तक ईरान में कोई बड़ा विरोध या विद्रोह नहीं हुआ। उल्टा, रिजीम और सख्ती से दबाव बढ़ा सकता है। ईरान का शासन गिरने की बजाय और मजबूत हुआ है। जो जनता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत पर जश्न मना रही थी, उसे अब लग रहा है कि उनके देश की संप्रभुता तार-तार हो रही है। अमेरिका के खिलाफ माहौल बन गया है।
अमेरिका में ही अलग-थलग पड़ गए हैं डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिका में सैनिकों की मौत हो रही है, तेल महंगा होने से पेट्रोल और सामान की कीमतें बढ़ रही हैं। मध्यावधि चुनाव नजदीक हैं। अमेरिकी लोग युद्ध से थक रहे हैं। जोनाल्ड ट्रंप के 'हम जीत गए' वाले दावों पर भी लोगों को यकीन नहीं है। घरेलू मुद्दे अमेरिका के लोगों को ज्यादा अहम लग रहे हैं। डेमोक्रेट्स का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के इशारे पर काम कर रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की सेना ने ईरान को सैन्य तौर पर काफी नुकसान पहुंचाया है। अमेरिका की मिसाइल और ड्रोन क्षमता कम हुई है। ईरान सस्ते ड्रोन से जंग लड़ रहा है, अमेरिका के ड्रोन काफी महंगे हैं। युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ। होर्मुज मुद्दे पर अमेरिका पर वैश्विक दबाव बढ़ रहा है। ईरान के आत्मरक्षा के अधिकार का लोग समर्थन भी कर रहे हैं। अमेरिका को आर्थिक नुकसान हो रहा है। अगर यह जंग कुछ दिन और खिंची तो एशिया तेल संकट के मुहाने पर खड़ा होगा।
और पढ़ें
Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies
CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | EDITORIAL POLICY | Sitemap




