सीबीएसई बोर्ड ने 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए एक बहुत ही जरूरी नियम लागू किया है जिसे समझना हर छात्र के लिए बेहद अहम है। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि अब से साल की पहली मुख्य बोर्ड परीक्षा, जो फरवरी में होती है, उसे देना हर हाल में अनिवार्य है। इससे पहले बोर्ड को ऐसी कई खबरें मिल रही थीं कि कुछ छात्र और स्कूल पहली परीक्षा को सिर्फ एक ऑप्शन समझ रहे थे और उसे छोड़कर सीधे मई वाली परीक्षा में बैठने की योजना बना रहे थे। इस भ्रम को दूर करते हुए बोर्ड ने सख्त चेतावनी दी है कि पहली परीक्षा कोई ऑप्शन नहीं है, बल्कि यह मुख्य आधार है जिसे छोड़ने पर छात्र का पूरा साल दांव पर लग सकता है।

 

CBSE ने साफ किया है अगर कोई छात्र पहली परीक्षा के दौरान तीन या उससे अधिक मुख्य विषयों में अनुपस्थित रहता है, तो उसे दूसरी परीक्षा में बैठने का मौका ही नहीं दिया जाएगा। ऐसे छात्र को सीधे 'एसेंशियल रिपीट' की लीस्ट में डाल दिया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि उस छात्र को उसी क्लास में अगले साल फिर से पढ़ना पड़ेगा।

 

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दूसरी परीक्षा क्यों दी जाती है?

सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने इस बारे में स्थिति और भी साफ की है। उन्होंने कहा है कि सभी छात्रों के लिए पहली बोर्ड परीक्षा में बैठना अनिवार्य है। जो छात्र पहली परीक्षा में पास हो जाएंगे, केवल उन्हें ही दूसरी परीक्षा में अपने प्रदर्शन को सुधारने का मौका दिया जाएगा। छात्र विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषाओं जैसे विषयों में से किन्हीं भी तीन विषयों में सुधार के लिए दोबारा परीक्षा दे सकते हैं। 

CBSE के कड़े निर्देश 

परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ बोर्ड ने स्कूल के अनुशासन के लेकर भी कड़े निर्देश दिए हैं। अब सिर्फ घर पर पढ़कर परीक्षा देना मुमकिन नहीं होगा क्योंकि बोर्ड ने 75 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता को फिर से लागू कर दिया है। जिन छात्रों की अटेंडेंस इससे कम होगी, उन्हें बोर्ड परीक्षा का एडमिट कार्ड नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, एग्जाम वाले दिन समय का पालन करना सबसे बड़ी चुनौती होगी क्योंकि सुबह 10:00 बजे के बाद किसी भी छात्र को परीक्षा केंद्र के अंदर घुसने नहीं दिया जाएगा। बोर्ड चाहता है कि छात्र समय की कीमत समझें और परीक्षा शुरू होने से पहले मिलने वाले समय का सही उपयोग करें।

 

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बदला परीक्षा पैटर्न

अब बोर्ड परीक्षा में रट्टा मारकर पास होना मुश्किल होगा क्योंकि 50% सवाल 'योग्यता-आधारित' (Competency-Based) होंगे। ये सवाल आपकी याददाश्त के बजाय आपकी समझ और दिमाग के इस्तेमाल को परखेंगे। बोर्ड का मकसद छात्रों को किताबी कीड़ा बनाने के बजाय उन्हें यह सिखाना है कि पढ़ाई असल ज़िंदगी में कैसे काम आती है।