हरियाणा के पलवल जिले से एक बहुत ही दुखद खबर सामने आ रही है, जहां के छांयसा गांव में पिछले 15 दिनों के अंदर 12 लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों में 5 मासूम बच्चे भी शामिल हैं, जिससे पूरे इलाके में मातम और दहशत का माहौल है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि गांव में सप्लाई होने वाला पीने का पानी पूरी तरह से जहरीला हो चुका था। इसकी वजह से लोग हेपेटाइटिस और पेट की गंभीर बीमारियों की चपेट में आ गए।
जैसे ही मौतों का आंकड़ा बढ़ा, प्रशासन में हड़कंप मच गया और स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमों को गांव में स्थायी रूप से तैनात कर दिया गया है। अब तक करीब 800 लोगों की ओपीडी जांच की जा चुकी है और स्वास्थ्य विभाग घर-घर जाकर सर्वे कर रहा है ताकि संक्रमण के फैलने की गति को रोका जा सके।
इस परेशानी की शुरुआत दो हफ्ते पहले हुई जब गांव के कई लोगों को एक साथ तेज बुखार, उल्टी और पेट दर्द की शिकायत शुरू कर दी। देखते ही देखते स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई मरीजों को इलाज मिलने से पहले ही अपनी जान गंवानी पड़ी। ग्रामीणों का कहना है कि गांव का शायद ही कोई ऐसा घर बचा हो जहां बीमारी ने दस्तक ना दी हो। प्रशासन अब घर-घर जाकर सर्व कर रहा है ताकि संक्रमित लोगों की पहचान की जा सके।
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क्यों हुआ पीने का पानी जहरीला?
स्वास्थ्य विभाग और जन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब गांव के पानी के सैंपल लिए तो बेहद चौंकाने वाले नतीजे आए। जांच में पाया गया कि पीने के पानी की पाइपलाइनों में कई जगह लीकेज थे और लोगों ने अवैध कनेक्शन ले रखे थे। इन लीकेज की वजह से सीवर का गंदा और बदबूदार पानी पीने वाली पाइपलाइन में मिल रहा था। लैब रिपोर्ट में पानी के अंदर ई-कोलाई और कोलीफॉर्म जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। साथ ही, सप्लाई वाले पानी में क्लोरीन की मात्रा भी शून्य मिली, जिसका मतलब है कि लोग लंबे समय से सीधा जहर पी रहे थे।
बचाव के उपाय
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने गांव में 24 घंटे चलने वाला एक मेडिकल सेंटर खोल दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें खून के सेंपल ले रही हैं, जिनमें से कई लोगों में हेपेटाइटिस-B और C की पुष्टि हुई है। राहत के तौर पर गांव में हजारों की संख्या में क्लोरीन की गोलियां बांटी गई हैं और लोगों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे पानी को उबालकर ही पीएं। साथ ही जल विभाग ने उन अवैध पाइपलाइनों को काटना शुरू कर दिया है, जहां से गंदगी अंदर आ रही थी और अब टैंकरों के जरिए साफ पानी पहुंचाया जा रहा है।
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डॉक्टरों की सलाह
कैंप में तैनात वरिष्ठ डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति दूषित जल से होने वाली महामारी की है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि वे स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और शरीर में कमजोरी या पीलिया जैसे लक्षण दिखने पर उसे नजरअंदाज न करें। प्रशासन की ओर से सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों को भी गांव में लगाया गया है। फिलहाल पूरा गांव डर के साये में है और प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।