सावन का महीना हो या कार्तिक का, कांवड़ निकल रहा हो या नवरात्रि चल रही हो, इन दिनों अक्सर सुनने को मिलता है कि इस इलाके में मांस-मछली की दुकानें बंद रहेंगी। मथुरा हो, अयोध्या हो या जगन्नाथपुरी, धार्मिक केंद्रों के तौर पर मशहूर जगहों में तो यह आदेश और भी सख्त होता है। ज्यादातर ऐसे फैसले उन राज्यों से आते हैं, जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव कई बार, मांस खाने को लेकर बीजेपी नेताओं के निशाने पर भी आए हैं। बीजेपी का यह रवैया, बंगाल में बवाल मचा रहा है। "
बंगाल में ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) बार-बार दावा कर रहीं हैं कि अगर भारतीय जनता पार्टी की सरकार आ गई तो आप मछली-भात नहीं खा सकेंगे। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को बार-बार सफाई में कहना पड़ रहा है कि बीजेपी आपके मछली-भात खाने पर रोक नहीं लगाएगी। खुद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन यह बात दोहरा चुके हैं।
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मछली पर बंगाल में क्यों घिरी बीजेपी?
पश्चिम बंगाल में 'माछ-भात' संस्कृति का हिस्सा रहा है। लोग चाव से मछलियां खाते हैं। बंगाल में मछली से जुड़े कई व्यंजन लोकप्रिय रहे हैं। नॉनवेज खाने को यूपी या गुजरात वाले नजरिए से नहीं देखा जाता है। मिथिला और पश्चिम बंगाल, दोनों संस्कृतियों में मछली खाने की धार्मिक स्वीकृति भी रही है। टीएमसी का दावा है कि यूपी, ओडिशा और गुजरात की तरह, अहम आयोजनों पर बीजेपी मछली और मांस पर ही प्रतिबंध लगा देगी।
बीजेपी को कैसे घेर रही है TMC?
TMC का आरोप है कि बीजेपी बंगाल पर शाकाहारी संस्कृति थोपना चाहती है। TMC नेताओं का तर्क है कि मछली और मांस बंगाली खान-पान और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। वे इसे बंगाली बनाम बाहरी की लड़ाई के रूप में पेश कर रहे हैं। बीजेपी पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि यह दल, बाहरी है और हिंदी-पट्टी की परंपरा को जबरन हम पर थोप रहा है।
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बीजेपी कैसे बचाव कर रही है?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हों, नितिन नवीन हों या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सबने यह तो जाहिर कर दिया है कि किसी को कुछ भी खाने से नहीं रोका जाएगा। अध्यक्ष नितिन नवीन तो बिहार से आते हैं, वहां भी मछली परंपरा में शामिल रही है। मिथिला क्षेत्र में मखाना और मछली लोक संस्कृति का हिस्सा है।
जय श्री राम का नारा, हाथ में मछली, यह कैसी सियासत?
बीजेपी के कई प्रत्याशी, अपनी-अपनी विधानसभाओं में मछली लेकर घूम रहे हैं। उनके हाथों में मछली है, समर्थक लोग जय श्री राम के नारे लगा रहे हैं। कोलकाता पोर्ट सीट से बीजेपी उम्मीदवार राकेश सिंह ने लाल कुर्ता और सफेद धोती पहनकर रैली निकाली। उन्होंने मछली दिखाकर बंगाली संस्कृति से अपना जुड़ाव बताया।
बैरकपुर से उम्मीदवार कौस्तव बागची ने सफेद कुर्ता-लाल धोती में घर-घर जाकर मछली लेकर प्रचार किया। बिधाननगर से शरद्वत मुखोपाध्याय ने भी मछली दिखाकर प्रचार की शुरुआत की थी। लोग सोशल मीडिया पर बीजेपी को जमकर घेर रहे हैं। उनका कहना है कि जय श्री राम बोलकर, मछली खाने देने का दिखावा, ऐसी सियासत से बीजेपी क्या हासिल करना चाहती है।
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BJP को सफाई क्यों देनी पड़ रही है?
ममता बनर्जी और TMC के अन्य नेता अक्सर रैलियों में कहते हैं कि BJP देश के अन्य हिस्सों की तरह बंगाल में भी खान-पान पर पाबंदी लगाना चाहती है। मछली और नॉनवेज को लेकर पहले भी बीजेपी और टीएमसी में टकराव होता रहा है। TMC का आरोप है कि BJP खाने के मुद्दे को उठाकर वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है।
TMC के अनुसार, बंगाल में हिंदू और मुस्लिम दोनों ही बड़ी संख्या में मछली और मांस का सेवन करते हैं, इसलिए BJP का विरोध केवल एक धर्म के लिए नहीं बल्कि पूरी बंगाली जीवनशैली के खिलाफ है।
पश्चिम बंगाल में अगर यह संदेश गया कि बीजेपी मछली खाने के ही खिलाफ है तो चुनावी घाटा होगा। स्थानीय स्तर पर अब बीजेपी इसे लेकर सतर्क हो गई है। उम्मीदवार खुद मछली लेकर अपनी जनसभाओं और डोर-टू-डोर कैंपेनिंग में जा रहे हैं।
