पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) एक अहम मुद्दा रहा। पूरे प्रदेश में लाखों लोगों के वोट लिस्ट से बाहर हो गए और इसमें से ज्यादातर लोग अभी भी अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। वोट करने को लेकर तृणमूल कांग्रेस काफी हमलावर रही और इसी के आधार पर वह सैकड़ों सीटों पर चुनाव चोरी के आरोप लगा रही है। चुनाव के नतीजे बता रहे हैं कि जहां SIR के तहत खूब वोट कटे वहां बीजेपी को जबरदस्त फायदा हुआ। हालांकि, वोट कम कटे उनमें से भी कई सीटों पर बीजेपी को बंपर वोट मिले हैं और उसकी जीत का अंतर काफी है।

 

पश्चिम बंगाल में SIR के चलते लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से बाहर कर दिए गए थे। कई चुनाव अधिकारी तक ऐसे थे जो चुनाव में ड्यूटी कर रहे थे लेकिन उनके नाम लिस्ट से बाहर हो गए थे। ट्राइब्यूनल में अपना केस लेकर पहुंचे लाखों मतदाताओं में से कुछ सौ को ही अब तक राहत मिली है और उनके नाम आखिरी वक्त में लिस्ट में शामिल किए गए। एक रोचक बात यह भी देखी गई कि जिन सीटों पर खूब वोट कटे वहां वोटिंग का प्रतिशत काफी ज्यादा था। हालांकि, इसे इस तरह भी देखा जा रहा था कि कहीं और शिफ्ट हो चुके, मर चुके या डुप्लीकेट वोटर के नाम कटने से सिर्फ वास्तविक मतदाता ही बचे और उन सबने खूब वोट डाले।


क्या कहते हैं आंकड़े?

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है कि जिन 169 सीटों पर 25 हजार से ज्यादा वोट कटे हैं, उन पर साल 2021 में टीएमसी को 128 और बीजेपी को 41 सीटों पर जीत मिली थी। इस बार स्थिति पूरी तरह से उलट गई। SIR के बाद बीजेपी की सीटें दोगुनी से ज्यादा हो गईं और टीएमसी की सीटें आधे से भी कम हो गईं। इस बार बीजेपी को इनमें से 104 और टीएमसी को 63 सीटों पर जीत मिली है।

 

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वहीं, जिन सीटों पर 25 हजार से कम वोट कटे वहां पर भी बीजेपी को फायदा हुआ। ऐसी कुल 124 सीटों में से बीजेपी को साल 2021 में सिर्फ 36 सीटों पर जीत मिली थी। इस बार बीजेपी को इसमें से 108 सीटों पर जीत मिली है। इसी तरह जिन 38 सीटों पर 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के चलते सबसे ज्यादा वोट कटे, साल 2021 उनमें से 34 पर टीएमसी को जीत मिली थी। इस बार टीएमसी उनमें से 16 सीटें ही जीत पाई है।

जहां खूब वोट कटे वहां क्या हुआ?

 

पश्चिम बंगाल की चौरंगी में 40 प्रतिशत, जोरासांको में 38 प्रतिशत, शमशेरगंज में 36 प्रतिशथ, हावड़ा उत्तर में 33 प्रतिशत और कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट पर 30 प्रतिशत मतदाताओं के मतदाताओं के नाम SIR में कट गए थे। इन सीटों पर वोटिंग में जबरदस्त उछाल देखने को मिला था। साल 2021 की तुलना में इस बार चौरंगी में वोटिंग में 33 प्रतिशत, जोरासांको में 36.5 प्रतिशत, शमशेरगंज में 16 प्रतिशत, हावड़ा नॉर्थ में 19.6 प्रतिशत और कोलकाता पोर्ट में 24.8 प्रतिशत ज्यादा मतदान हुआ।

 

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चौरंगी विधानसभा सीट पर वोट कटने के बावजूद टीएमसी अपनी सीट को बचाने में कामयाब रही और नयना बंदोपाध्याय 22 हजार वोटों के अंतर से चुनाव जीत गईं। जोरासांको विधानसभा सीट पर टीएमसी 2001 से ही नहीं हारी थी लेकिन SIR के बाद टीएमसी के विजय उपाध्याय बीजेपी के विजय ओझा से 5797 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए।

 

शमशेरगंज सीट पर टीएमसी ने फिर से जीत हासिल की है। वहीं, हावड़ा उत्तर सीट पर लगातार जीत रही टीएमसी को बीजेपी ने 11250 वोटों के अंतर से हराया है। कोलकाता पोर्ट सीट पर टीएमसी के दिग्गज नेता फिरहाद हाकिम ना सिर्फ चुनाव जीते हैं बल्कि उनकी जीत का अंतर 56080 वोटों का है।