तमिलनाडु की राजनीति में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (AIADMK) का उदय द्रविड़ आंदोलन के दूसरे चरण का सफल प्रयोग था। साल 1970 तक, करुणानिधि के साथ तमिल सिनेमा के सुपररस्टार एमजी रामचंद्रन (MGR) की  AIADMK के बीच कई मामलों को लेकर मतभेद पनपने लगे थे। साल 1972 में उन्होंने तय किया कि अब, करुणानिधि से अलग होने का समय आ गया है। द्रविड़ मुनेत्र कझगम, द्रविड़ राजनीति से ही भटक रही है, जिसके लिए राज्य में नई पार्टी की जरूरत है। तब इस पार्टी का द्रविड़ और जन कल्याणकारी नीतियों पर जोर था, अब इन्हीं नीतियों से भटकने के आरोप AIADMK पर लग रहे हैं। कांग्रेस ने यहां तक कह दिया है कि राष्ट्रवादी रंग में यह पार्टी इतना रंग गई है कि यह बीजेपी हो गई है। 

AIADMK की स्थापना 1972 में तमिल सिनेमा के दिग्गज एमजी रामचंद्रन ने की थी। एमजी रामचंद्रन, अन्नादुरई और पेरियार की राजनीति पर काम कर रहे थे। उन्होंने अपनी छवि मसीहा की बना ली। लोग उन्हें गरीबों और वंचितों की आवाज मानने लगे। अब पार्टी पर, मूल उद्देश्यों से ही भटकने के आरोप लग रहे हैं। AIDMK पर बीजपी के इशारे पर राष्ट्रवादी और पूंजीवादी राह पर बढ़ने के आरोप लग रहे हैं। कांग्रेस के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष के सेल्वापेरुन्थगई ने कहा है कि बीजेपी, अब AIADMK को चला रही है। 

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के सेल्वापेरुन्थगई, अध्यक्ष, तमिलनाडु कांग्रेस:-
AIADMK अब BJP के नियंत्रण में है। AIADMK को BJP चला रही है। BJP ही AIADMK के भविष्य का फैसला करती है। पार्टी अब तमिलनाडु के लोगों के अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है। यह गठबंधन, दिल्ली गठबंधन है। 

के सेल्वापेरुन्थगई ने AIADMK महासचिव एडाप्पादी के पलानीस्वामी पर तंज कसते हुए कहा, 'दिल्ली कितनी बार भी जाएं, चुनाव के बाद वे BJP की शाखा बन जाएंगे।'

 

ज्योतिमणि ने भी दिखाया AIADMK को आइना

कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने भी कुछ ऐसा ही है। उन्होंने कहा है, 'AIADMK के मालिक अमित शाह हैं। अब यह पार्टी अपने नेतृत्व पर नियंत्रण खो चुकी है। जयललिता के बाद पार्टी कमजोर हो गई और BJP ने CBI, ED जैसी एजेंसियों से दबाव बनाकर इसे निगल लिया है।'

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ज्योतिमणि, सासंद, कांग्रेस:
BJP का तरीका यही है। पहले भी उन्होंने जिस भी पार्टी के साथ गठबंधन किया है, उस पार्टी को ही खत्म कर दिया है। कुछ राज्यों को छोड़कर, BJP ने अपने दम पर कोई जीत हासिल नहीं की है।

क्यों AIADMK पर ऐसे आरोप लग रहे हैं?

भारतीय जनता पार्टी, तमिलनाडु में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रही है। AIADMK, एनडीए गठबंधन का हिस्सा है। डीएमके, कट्टर द्रविड़ और एंटी हिंदी राजनीति के लिए चर्चा में रहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि AIADMK का हिंदी विरोध, DMK के स्तर का नहीं है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन और काग्रेस नेता, हिंदुत्व और हिंदी के खिलाफ कई मोर्चे पर मुखर होते हैं, सेक्युलर राजनीति पर जोर देते हैं। AIADMK द्रविड़ पहचान पर जोर देती है लेकिन न हिंदी से परहेज है, न हिंदुत्व से। 

कांग्रेस का तर्क यह रहा है कि AIADMK के बड़े फैसले अक्सर बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व लेता है। कांग्रेस का जोर है कि दिल्ली की नीतियां, बीजेपी, AIADMK के सहारे, तमिलनाडु पर थोप रही है। कांग्रेस का कहना है कि जयललिता के निधन के बाद AIADMK कमजोर हुई और उसे बीजेपी का पिछलग्गू बनना पड़ा है। तमिलनाडु की राजनीति में द्रविड़ पहचान बहुत मजबूत है। बीजेपी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर जोर देती है। तमिल संस्कृति के साथ-साथ बीजेपी चाहती है कि हिंदी संस्कृति को हाशिए पर न रखा जाए।  

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कांग्रेस और DMK अक्सर यह नैरेटिव सेट करने की कोशिश करते हैं कि AIADMK भी बीजेपी के इशारे पर तमिल विरोधी हो गई है। यह पार्टी, अब स्वतंत्र नहीं रही और उसे अमित शाह या पीएम मोदी रिमोट कंट्रोल से चला रहे हैं। उनका कहना है कि AIADMK को वोट देने का मतलब परोक्ष रूप से बीजेपी को ही वोट देना है। 

विपक्ष का दावा है कि AIADMK के नेताओं को केंद्रीय एजेंसियों से डर लगता है। वे स्थानीय हितों की उपेक्षा कर, बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं। बीजेपी की बातों को AIADMK के नेता अब आदेश की तरह मान रहे हैं।  

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क्या इस दावे में दम है?

AIADMK और बीजेपी के रिश्ते कभी नरम-नरम, कभी गरम-गरम रहे हैं। साल 2024 में ही यह गठबंधन टूट गया था। पार्टी ने तर्क दिया है कि वह अपनी स्वतंत्र द्रविड़ पहचान को कायम रखना चाहती है। साल 2026 तक, एक बार फिर बीजेपी और AIADMK के बीच बात बन गई और फिर से गठबधन धर्म में आ गए। 

तमिलनाडु में बीजेपी का व्यापक जनाधार नहीं है।

तमिलनाडु में द्रविड़ संस्कृति और तमिल राष्ट्रवाद पर राजनीतिक पार्टियां जोर देती हैं। बीजेपी की राजनीति ही इससे अलग है। AIADMK एक तरफ स्थापित पार्टी है, बीजेपी जड़ें जमाने की कोशिशों में जुटी है। AIADMK के नेता, अपने अनबन को कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं। गठबंधन में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला भी अभी पूरी तरह तय नहीं हो पाया है।

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तमिलनाडु में कौन किसके साथ है, एक नजर में समझिए 

NDA गठबंधन में AIADMK के साथ BJP और पक्काली मक्कल काची (PMK) शामिल हैं। मुख्य मुकाबला DMK के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) और AIADMK के NDA के बीच माना जा रहा है। SPA में DMK, कांग्रेस और कुछ अन्य छोटी पार्टियां हैं।

अभिनेता विजय अपनी नई पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के साथ पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। यह मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। 

तमिलनाडु में चुनाव कब है?

तमिलनाडु में एक ही चरण में 23 अप्रैल 2026 को मतदान होगा और वोटों की गिनती 4 मई को होगी। राज्य की 234 सीटों वाली विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को खत्म हो रहा है।