बिहार के सारण जिले की परसा विधानसभा ने राज्य को मुख्यमंत्री दिया है। 10 महीने बिहार के सीएम रहे दरोगा प्रसाद राय परसा से कुल सात बार चुनाव जीते। फिर उनके बेटे चंद्रिका राय लंबे समय तक चुनाव जीतते रहे। अब चंद्रिका राय राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से अलग हैं और पिछला चुनाव जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर लड़कर हार भी चुके हैं। वैशाली जिले से लगती हुई यह विधानसभा पिछले चुनाव में लालू परिवार बनाम चंद्रिका राय परिवार की लड़ाई का केंद्र बनी थी। अभी यह लड़ाई खत्म नहीं हुई है लेकिन एक लड़ाई आरजेडी ने 2020 में जीत ली थी जब चंद्रिका राय यहां से चुनाव हार गए थे।
यहां पर मुस्लिम और यादव यानी MY जनसंख्या निर्णायक स्थिति में है। यही वजह है कि चंद्रिका राय जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़े फिर भी आरजेडी ने यहां जीत हासिल कर ली। मुस्लिम और यादवों के अलावा कुशवाहा और दलित मतदाता भी अच्छी खासी संख्या में हैं। बिहार की कई विधानसभाओं की ही तरह परसा में भी सड़क खस्ताहाल है, रोजगार के अवसर कम हैं और मूलभूत सुविधाओं के लिए भी लोग जनप्रतिनिधियों का सरकार का मुंह देखने को मजबूर होते हैं। स्थानीय स्तर पर डेरनी इलाके को प्रखंत बनाने की मांग भी काफी पुरानी रही है। तटबंधों की मरम्मत कराने की मांग, नहरों और जल स्रोतों की साफ-सफाई की मांग भी लंबे समय से पूरी नहीं हो पा रही है। उम्मीद है कि इस चुनाव में भी यह मुद्दा हावी हो सकता है।
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मौजूदा समीकरण
चंद्रिका राय जैसे दिग्गज नेता को तीन बार चुनाव हराने वाले छोटे लाल राय अपने क्षेत्र में खूब सक्रिय हैं। वह हर हाल में परसा को अपने किले में बदलने को बेताब हैं। दूसरी तरफ चंद्रिका राय भी अपनी हार का बदला लेने और अपनी पारंपरिक सीट से चुनाव जीतने के लिए क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले साल चर्चा थी कि वह जेडीयू छोड़ सकते हैं लेकिन उन्हें इन खबरों को गलत बताया। आरजेडी और जेडीयू के अलावा जन सुराज के मोसाहेब महतो भी खूब प्रचार करने में जुटे हुए हैं।
हालांकि, यह माना जा रहा है कि चंद्रिका राय और छोटे लाल राय में ही एक बार फिर से जोरदार मुकाबला हो सकता है। इसके बावजूद, जेडीयू के प्रभुनाथ सिंह कुशवाहा भी क्षेत्र में सक्रिय हैं।
2020 में क्या हुआ था?
साल 2019 के आखिर तक लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और उनकी पत्नी ऐश्वर्या के बीच अनबन हो चुकी थी। सितंबर 2019 में ऐश्वर्या तेज प्रताप के घर से रोते हुए निकली थीं। फरवरी 2020 में ऐश्वर्या के पिता यानी चंद्रिका राय ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) छोड़ने का एलान कर दिया। 2015 में चंद्रिका प्रसाद राय ही परसा से आरजेडी के टिकट पर जीते थे। 2015 में वह जेडीयू में चले गए तो आरजेडी उनका मुकाबला करने के लिए जेडीयू के पूर्व विधायक रहे छोट लाल राय को ले आई।
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परसा से ही पूर्व सीएम दरोगा प्रसाद राय कुल 7 बार चुनाव जीते थे। चंद्रिका राय खुद यहां से 6 चुनाव जीत चुके थे। उन्हें उम्मीद थी कि आरजेडी छोड़कर भी वह परसा से जीत लेंगे। 2015 में सिर्फ 34,876 वोट पाने वाले छोटे लाल राय इस बार आरजेडी में थे और मुकाबला जबरदस्त हुआ। छोटे लाल राय ने आरजेडी के सहारे कुल 68,316 वोट हासिल कर लिए। वहीं, चंद्रिका राय को 51,023 वोट मिले। तीसरे उम्मीदवार थे लोक जनशक्ति पार्टी के राकेश कुमार सिंह और उन्हें मिले 12,186 वोट। नतीजा हुआ कि चंद्रिका राय अपनी पारंपरिक सीट पर चुनाव हार गए।
विधायक का परिचय
चंद्रिका राय जैसे दिग्गज नेता को हराने वाले छोटे लाल राय ने यह कारनामा पहली बार नहीं किया था। साल 2005 (अक्टूबर) और साल 2010 के चुनाव में भी जेडीयू के चुनाव पर लड़े छोटे लाल राय ने चंद्रिका राय को परसा से चुनाव हराया था। साल 2002 में जिला पंचायत सदस्य के तौर पर राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले चंद्रिका राय जेडीयू और आरजेडी के अलावा एलजेपी में भी रह चुके हैं।
10वीं तक पढ़े छोटेलाल राय ने 2020 में अपने चुनावी हलफनामे में बताया था कि उनके पास कुल 2.36 करोड़ की संपत्ति है। उनकी पत्नी चिमनी के कारोबार से जुड़ी हुई हैं और छोटेलाल खुद मुख्य रूप से खेतीबाड़ी का ही काम करते रहे हैं।
विधानसभा का इतिहास
इस विधानसभा को मुख्य रूप से पूर्व सीएम दरोगा प्रसाद राय और उनके बेटे चंद्रिका राय की वजह से जाना जाता है। दरोगा प्रसाद राय 1952 से 1977 तक लगातार कांग्रेस के टिकट पर यहां से चुनाव जीतते रहे। 1977 में जनता पार्टी की लहर में वह चुनाव हारे लेकिन 1980 में ही फिर से चुनाव जीत गए। 1985 से चंद्रिका राय की जीत का सिलसिला शुरू हुआ। वह एक बार कांग्रेस के टिकट पर जीते, फिर निर्दलीय जीते, फिर जनता दल के टिकट पर जीते और दो बार आरजेडी के टिकट पर चुनाव जीते।
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2005 के अक्तूबर वाले चुनाव में पहली बार छोटे लाल राय ने चंद्रिका राय को यहां से चुनाव हरा दिया। 2010 में भी चंद्रिका राय हारे लेकिन 2015 में वापसी कर ली। हालांकि, 2020 में छोटे लाल राय ने एक बार फिर से चंद्रिका राय को चुनाव हरा दिया।
1952-दरोगा प्रसाद राय-कांग्रेस
1957-दरोगा प्रसाद राय-कांग्रेस
1962-दरोगा प्रसाद राय-कांग्रेस
1967-दरोगा प्रसाद राय-कांग्रेस
1969-दरोगा प्रसाद राय-कांग्रेस
1972-दरोगा प्रसाद राय-कांग्रेस
1977-रामानंद प्रसाद यादव-जनता पार्टी
1980-दरोगा प्रसाद राय-कांग्रेस
1981-पार्वती देवी-कांग्रेस
1985-चंद्रिका राय-कांग्रेस
1990-चंद्रिका राय-निर्दलीय
1995-चंद्रिका राय-जनता दल
2000-चंद्रिका राय-RJD
2005-चंद्रिका राय-RJD
2005-छोटे लाल राय-JDU
2010-छोटे लाल राय-JDU
2015-चंद्रिका राय-RJD
2020-छोटे लाल राय-RJD
