असम में कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) किसी जमाने में कट्टर दोस्त हुआ करते थे। दोस्ती थी दो अल्पसंख्यक बाहुल सीटों में दोनों दलों दबदबा था। अब बिखराव हुआ तो AIUDF के संस्थापक बदरुद्दीन अमजल भी कांग्रेस को कोसने लगे। असम कांग्रेस के मुखिया गौरव गोगोई और उनकी जंग, सुर्खियों में रही। अब उन्होंने कांग्रेस की तुलना एक बार फिर मुस्लिम लीग से की है। 

बदरुद्दीन अजमल होजाई जिले की नई बिन्नाकांडी सीट से चुनाव में उतरे। उन्होंने  119721 वोटों से असम जतिया परिषद के रेजाउल करीम चौधरी को बुरी तरह से हराया। बदरुद्दीन अजमल, लोकसभा चुनाव में हार गए थे लेकिन यह सीट, बचाने में कामयाब हो गए। उनकी विधानसभा सीट पर असम गण परिषद के शाहाबुद्दीन मजूमदार तीसरे स्थान पर रहे।

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बदरुद्दीन अजमल, अध्यक्ष, AIUDF:-
दूसरे के लिए जो कुआं खोदता है, उनके सामने कुआं है। कांग्रेस ने AIUDF को खत्म करने के लिए कुआं खोदा, उसी में खुद गिर गई। कांग्रेस असम से खत्म हो गई। कांग्रेस मुस्लिम लीग हो गई है, इसका मुझे दुख है। सब हार गया है, बहुत-बहुत मुबारक हो। 

कांग्रेस का चुनाव में हाल क्या रहा?

कांग्रेस का प्रदर्शन असम के विदानसभा चुनावों में बेहद खराब रहा है। कांग्रेस पार्टी का अंजाम बुरा हुआ है। गौरव गोगोई, जोरहाट विधानसभा सीट तक नहीं बचा पाए, जहां से वह खुद सियासी मैदान में उतरे हैं। असम की 126 विधानसभी सीटों में सिर्फ 19 सीटें कांग्रेस के हाथ में आईं। बीजेपी ने अपने दम पर 82 सीटें हासिल की है, असम में सरकार बनाने के लिए सिर्फ 64 सीट चाहिए। बीजेपी के पास यह संख्या अपने दम पर ही है। 

 

 

मुस्लिम लीग बताने की वजह समझिए 

बदरुद्दीन अजमल खुद को मुसलमानों का नेता बताते हैं। अपनी चुनावी मुहिम को अल्पसंख्यकों की राजनीतिक पहचान बचाने का मुद्दा बनाया है। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कांग्रेस को मुस्लिम लीग इसलिए बताया है कि क्योंकि कांग्रेस के जीते हुए विधायकों की संख्या सबसे ज्यादा मुसलमानों की है। कांग्रेस के 18 उम्मीदवार मुसलमान हैं। 

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कौन हैं बदरुद्दीन अजमल?

 बदरुद्दीन अजमल तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। वह इस्लामिक स्कॉलर हैं, बंगाली भाषी मुसलमानों के बड़े चेहरे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें करारी हार मिली थी, लेकिन अब वह असम की राजनीति में वापसी करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बार AIUDF ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा।