तमिलनाडु में जिस सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) को 9 साल से मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, सहेज कर चल रहे थे, उसका एक अहम और बड़ा धड़ा, पार्टी से अलग हो गया है। द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) के अध्यक्ष एमके स्टालिन ने तमिलगा वाझवुरिमई काची (TVK) को सिर्फ 1 सीट ऑफर की, नाराज होकर पार्टी ने गठबंधन तोड़ दिया। 

तमिलगा वाझवुरिमई काची (TVK), सुपरस्टार विजय की पार्टी, तमिलगा वेट्री कझगम से अलग है। इसके अध्यक्ष, वेलमुरुगन हैं। वेलमुरुगन पहले SPA के ही एक दल पट्टाली मक्कल काची के बड़े नेताओं में शुमार थे। उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर नई पार्टी बनाई और डीएमके गठबंधन का हिस्सा बने। 

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वेलमुरुगन अलग क्यों हुए?

वेलमुरुगन, तमिलगा वाझवुरिमई काची के लिए 2 से ज्यादा सीटें मांग कर रहे थे। एमके स्टालन की अगुवाई वाले SPA गठबंधन ने सिर्फ एक सीट ऑफर किया। वेलमुरुगन का कहना था कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक, अगर उन्होंने DMK का साथ निभाया है तो उन्हें ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए थीं। 

एमके स्टालिन, कांग्रेस जैसी दिग्गज पार्टी को 28 से ज्यादा सीट देने के लिए तैयार नहीं हुए तो वेलमुरुगन की पार्टी के लिए कैसे तैयार होते। गठबंधन के दूसरे दल भी उन पर दबाव देते। यह संधि, वेलमुरुगन को अपमानजक लगा और उन्होंने अपनी राहें अलग कर लीं। अब वह बिना गठबंधन के स्वतंत्र चुनाव लड़ेंगे। 
 
वेलमुरुगन, पनुरित सीट से विधायक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके नजरअंदाज कर रही है, इसलिए गठबंधन में बने रहना मुश्किल है। वह सत्तारूढ़ पार्टी के बड़े भाई वाले रवैये से परेशान थे। उन्होंने पार्टी के सामने बार-बार गठबंधन में ज्यादा सीटें देने की मांग की लेकिन इसे नजरअंदाज किया गया। 

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क्या है वेलमुरुगन की ताकत?

वेलमुरुगन, वन्नियार समुदाय से आते हैं। यह समुदाय, तमिलनाडु में प्रभावी है। करीब 10 फीसदी वोट बैंक है। वन्नियार, जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर मुखर रहे हैं। अपने समुदाय के वोटरों में उनकी लोकप्रियता है। राज्य की 10 से 12 सीटों पर वेन्नियार वोटर, मजबूत स्थिति में हैं। 
 
वेलुमुरगन ने पहली बार साल 1996 में अपना विधानसभा चुनाव लड़ा। वह थिरुवेट्टियूर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे। वह राज्य के युवा सचिव रहे, तब वह पट्टाली मक्कल काची से जुड़े थे। साल 2001 में वह पहली बार विधायक बने और 2006 का भी विधानसभा चुनाव जीत लिया।

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कौन हैं वेलुमुरगन?

वेलमुरुगन कुड्डालोर जिले के कुरिनचिपडी के रहने वाले हैं। वह पुलिसयूर कट्टुसागई गांव में एक किसान घर में पैदा हुए थे। वह तमिलनाडु मुक्ति बल में पहले शामिल हुए। तत्कालीन सरकार ने तमिलनाडु मुक्ति बल पर कार्रवाई शुरू की तो उनका परिवार चेन्नई चला गया। उन्होंने पट्टाली मक्कल काची  की सदस्यता ली और यहीं से उनका करियर ऊपर उठना शुरू हुआ। अब वह वेन्नियार समुदाय के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं।