हमारे देश में चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि हर जज्बात का साथी है। सुबह की पहली किरण हो या ऑफिस की  थकान, हर मूड में बस चाय चाहिए होती है। कभी यह हमें नींद से जगाने वाली 'बेड टी' बनकर आती है। तो कभी तनाव कम करने का जरिया बनती है। खुशी हो तो चाय, गम हो तो चाय, और अगर सिर में हल्का सा भी दर्द हो, तो हमारा मन सबसे पहले कड़क चाय की ही मांग करता है। चाय के लिए हमारी यह दीवानगी इस कदर बढ़ चुकी है जैसे हम इसके बिना दिन की शुरुआत करने की सोच ही नहीं सकते।

 

लेकिन चाय के प्रति यही अंधा प्यार तब भारी पड़ने लगता है जब हम इसे सुबह उठते ही, खाली पेट पीना अपनी आदत बना लेते हैं। रात भर के 8 घंटे के आराम के बाद जब हमारा पेट पूरी तरह खाली होता है। शरीर को पानी या ड्रिंक की तलाश होती है, तब हम उसे हर मूड में साथ देने वाली वही कड़क चाय थमा देते हैं। हमें लगता है कि यह चाय हमें एनर्जी दे रही है, पर असल में यह हमारे बॉडी को अंदर से धीमा कर देता है।

जनरल फिजीशियन और आयशा हेल्थ के चीफ डॉ. शाहिद अख्तर बताते हैं कि अगर यहीं चीज हम लगातार 30 दिनों तक करें, तो हमारा शरीर अंदर से किस तरह बदलने लगता है, यह जानना बहुत जरूरी है।

 

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खाली पेट चाय पीने से क्या होता है? डॉक्टर से समझिए 

पेट में एसिड का सैलाब- खाली पेट चाय पीते ही पेट में एसिड का सैलाब आ जाता है। यह पेट के डाईजस्टिव जूस के संतुलन को बिगाड़ देती है। पहले हफ्ते में आपको पेट फूलना और खट्टी डकारों जैसी समस्या शुरु होने लगेगी, क्योंकि चाय पेट की नाजुक दीवारों को सीधे प्रभावित कर रही होती है।

 

पोषण पदार्थ का रिजेक्शन- शरीर में मौजूद जरूरी पदार्थ जैसे आयरन और कैल्शियम कम होने लगता है। चाय में मौजूद 'टैनिन' आपके खाने से मिलने वाले पोषण को सोखने की शरीर की क्षमता को ब्लॉक कर देता है। इसे धीरे-धीरे आपके शरीर में खून की कमी और हड्डियों में कमजोरी की शुरुआत होने लगती है।

 

भूख का गायब होना और शरीर में सुस्ती- 20 दिनों के बाद यानी तीसरे हफ्ते में आपको सुबह ठीक से भूख नहीं लगेगी। खाली पेट चाय आपकी भूख को मार देती है, जिसे 'मेटाबॉलिज्म का सुस्त होना' कहते हैं। इससे शरीर की नेचूरल एनर्जी खत्म होने लगती है और आप पूरी तरह से चाय के कैफीन पर निर्भर हो जाते हैं। अब चाय ताजगी के लिए नहीं, बल्कि सुस्ती हटाने के लिए पीते हैं।

 

स्वभाव में चिड़चिड़ापन और घबराहट- महीने के चौथे हफ्ते तक, खाली पेट कैफीन का सीधा असर आपके नर्वस सिस्टम पर दिखने लगता है। चाय न मिलने पर हाथ-पैर कांपना, सिर में तेज दर्द होना और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना। इसी वजह से होता है,  जिसे हम 'हर मूड की दवा' समझते थे, वह अब हमारे मूड को कंट्रोल करने लगती है।

 

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छोटा सा बदलाव, बड़ा फायदा

एक्सपर्ट बताते हैं कि चाय पीजिए, क्योंकि यह आपके हर मूड का हिस्सा है, लेकिन इसे पीने का तरीका बदल लीजिए। सुबह उठकर पहले एक गिलास गुनगुना पानी पिएं और उसके साथ कुछ भी हल्का खाएं जैसे मखाना, बिस्किट या बादाम। इसके 20 मिनट बाद जब आप अपनी मनपसंद चाय पिएंगे, तो वह आपके शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाएगी।

डिस्क्लेमर: बेहतर जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें। यह खबर सामान्य जानकारी और डॉक्टर से बातचीत पर आधारित है। हर व्यक्ति में अलग लक्षण नजर आ सकते हैं।