ईरान के साथ में पश्चिम एशिया में जारी जंग तेज हो गई है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हमले तेज हो गए हैं। ताजा मामले में इजरायल ने ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला बोला तो ईरान ने कतर के सबसे बड़े LPG इंफ्रास्ट्रक्चर और रिफाइनरी को हमले में भारी नुकसान पहुंचाया। इस बीच अमेरिका की आर्मी पेंटागन ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध के लिए 200 बिलियन डॉलर की बड़ी फंडिंग की मांग की है। 

 

इससे पहले अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को कहा था कि 'बुरे लोगों को मारने के लिए पैसे लगते हैं।' रक्षा मंत्री के इस बयान के बाद ही पेंटागन ने यह मदद मांगी। वहीं, इजरायल ने ईरान के ऊपर हमले तेज कर दिए हैं। उसने ने गुरुवार को कैस्पियन सागर में ईरान की नेवी को निशाना बनाया।

पेंटागन ने संसद से मांगी मदद

ईरान के साथ चल रहे बीच युद्ध का फिलहाल कोई अंत नजर नहीं आ रहा है, इसलिए पेंटागन ने कांग्रेस से 200 बिलियन डॉलर की फंडिंग मांगी है। AP की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए व्हाइट हाउस को एक पत्र भेजा गया है। डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने भी कहा है कि पेंटागन ने फंडिंग के लिए अप्लाई किया है।

 

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होर्मुज स्ट्रेट खोलने की कोशिश

इस बीच, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और जापान समेत छह देशों ने कहा है कि वे होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता पक्का करने की कोशिशों में अमेरिका की मदद करेंगे। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग तब और बढ़ गई जब इजरायल ने ईरान में साउथ पारस गैस फील्ड पर हमला कर दिया। इस हमले के बाद ईरान ने सऊदी अरब, UAE, कतर और कुवैत में एनर्जी साइट्स को निशाना बनाकर जवाबी हमले किए।

ईरान में सैनिक नहीं भेजेंगे- ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि वह युद्ध क्षेत्र में अमेरिकी सैनिक नहीं भेजेंगे। ट्रंप का यह जवाब ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ युद्ध बढ़ता जा रहा है। हालांकि, ट्रंप अपने बयानों को लगातार बदल भी रहे हैं।

 

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होर्मुज में रास्ते में मदद करेंगे कई देश

ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड्स ने गुरुवार को कहा कि वे सभी मिलकर होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता पक्का करने के लिए सही कोशिशों में मदद करने के लिए तैयार हैं। छह पश्चिमी सहयोगी देशों के एक साझा बयान में कहा गया, 'हम उन देशों की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं जो तैयारी की प्लानिंग में लगे हुए हैं।'

 

बता दें कि ईरान अपने कब्जे वाले होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल इस युद्ध में एक हथियार की तरह कर रहा है, जिसका असर दर्जनों देशों पर पड़ रहा है। इसी की वजह से भारत-पाकिस्तान समेत कई देशों में गैस और तेल की कमी देखी जा रही है।