अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ न केवल यूरोप, बल्कि एशिया में भी आवाज उठने लगी है। अमेरिका के साथ तनातनी के बीच ईरान ने ट्रंप के उस दावे की पोल खोल दी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उनके दखल के बाद ईरान में 800 अधिक कैदियों की फांसी रोक दी गई। ईरान की न्यायपालिका ने कहा कि यह दावा पूरी तरह से झूठा है।

 

मिजान समाचार एजेंसी ने ईरान के शीर्ष अभियोजक मोहम्मद मोवाहेदी का एक बयान प्रकाशित किया। इसमें उन्होंने ट्रंप के दावे को गलत बताया और कहा कि न्यायपालिका ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है। न ही इस तरह की कोई संख्या मौजूद है। यह दावा पूरी तरह से झूठा है।

 

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अभी टला नहीं ईरान पर खतरा

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया था कि ईरान ने 800 से ज्यादा कैदियों की फांसी रोक दी गई है। इसके बाद ट्रंप ने ईरान के प्रति नरम रुख अपनाया था और ईरान पर हमले के फैसले को भी टाल दिया था। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अब भी ईरान पर से खतरा टला नहीं है। अमेरिका इस समय का इस्तेमाल अपनी सैन्य तैयारियों में कर रहा है। 

ट्रंप की नई धमकी से हलचल

हाल ही में दावोस से डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक नई धमकी दी है। उन्होंने कहा कि हम ईरान पर नजर रख रहे हैं। एक बड़ी सैन्य टुकड़ी तेहरान की तरफ भेज रहे हैं। मैं नहीं चाहता कि कुछ भी हो, लेकिन हम उन पर बहुत बारीक निगाह रख रहे हैं। ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि अमेरिका कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा। अगर तेहरान अपना परमाणु कार्यक्रम शुरू करता है तो कार्रवाई जरूर होगी। ट्रंप ने यह भी धमकी दी कि वे (ईरान) परमाणु हथियार नहीं बना पाएंगे।

 

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हिंसक प्रदर्शन में हजारों की मौत

पिछले साल 28 दिसंबर को महंगाई के खिलाफ पूरे ईरान में जनता सड़कों पर उतर आई थी। 10 विश्वविद्यालयों के छात्रों के शामिल होने के बाद प्रदर्शन हिंसक हो उठे थे। करीब 15 दिनों तक ईरान के कई शहर हिंसा की आग में जले। सरकार को इंटरनेट और फोन सेवा बंद करने पड़ी। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़े एक्शन लेने के बाद हिंसा पर काबू पाया गया। प्रदर्शनकारियों की मौत के बीच ट्रंप ने सैन्य दखल की बात कही थी। मगर अभी तक ऐसा नहीं किया। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक प्रदर्शन में कुल 3117 लोगों की जान गई है।