स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय विमान फंसे हैं। इजरायल, अमेरिका और ईरान की जंग में भारत में तेल संकट गहराता जा रहा है। भारत सरकार ईरानी अधिकारियों से संपर्क में है, करीब 30 भारतीय ध्वज वाले जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने की व्यवस्था की जा सके। ईरानी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है, जिसकी वजह से भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। भारत, अपने जहाजों को भारतीय नौसेना के एस्कॉर्ट के साथ मर्चेंट शिपिंग की सुरक्षित आवाजाही चाहता है।

पिछले कुछ हफ्तों में ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने फारस की खाड़ी में टैंकरों और बल्क कैरियर्स पर कई हमले किए हैं, जिसमें अमेरिका को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। इन हमलों में अब तक तीन भारतीय नाविक मारे गए हैं और एक लापता बताया जा रहा है। तीन अलग-अलग जहाजों पर हुए हमलों में भारत ने भी बहुत कुछ खोया है। 

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प्रधानमंत्री ने ईराने के राष्ट्रपति से क्या बात की?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बात की। उन्होंने बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर लिखा, 'ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बातचीत की, जिसमें क्षेत्र की गंभीर स्थिति पर चर्चा हुई। तनाव बढ़ने, आम नागरिकों की जान जाने और नागरिक बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई है। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षण पर बात हुई है। सामान और ऊर्जा के निर्बाध आवागमन की जरूरत, भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और बातचीत और कूटनीति की राह अपनाने की अपील की है।'

कहां फंस रही है बातचीत?

भारत और ईरान संपर्क में हैं लेकिन समाधान नहीं बन पा रहा है। अमेरिका होर्मुज में हमले कर रहा है, ईरान भी हमले कर रहा है। ऐसे में विमानों की आवाजाही कैसे सुरक्षित हो, भारत इस पर नजर रख रहा है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अरागची के बीच 10 मार्च को हुई फोन वार्ता में भारतीय ध्वज वाले जहाजों तथा भारत जाने वाले मर्चेंट शिपिंग की सुरक्षा पर चर्चा हुई थी। यह दोनों नेताओं की ईरान-अमेरिका संघर्ष शुरू होने के बाद तीसरी बातचीत थी।

 

 

 

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विदेश मंत्रालय ने क्या बताया है?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'विदेश मंत्री और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हाल के दिनों में तीन वार्ताएं हुई हैं। पिछली वार्ता में शिपिंग की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके अलावा अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।'

भारतीय जहाजों पर ईरान का रुख क्या है?

ईरान ने पिछले चार-पांच दिनों में किसी भी भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाज को होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं दी है। हालांकि गुरुवार को सऊदी क्रूड ऑयल से लदा लाइबेरिया के ध्वज वाला सुएजमैक्स टैंकर शेनलॉन्ग मुंबई पहुंचा है। यह 28 फरवरी के बाद पहला टैंकर है जो भारत पहुंच रहा है। 

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कितने विमान फंसे हैं?

शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने गुरुवार को कहा, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिम में 24 भारतीय ध्वज वाले जहाज खड़े हैं। उन पर 677 भारतीय नाविकों सवार हैं। पूर्व में चार जहाज हैं, जहां 101 भारतीय नाविक फंसे हैं। सभी भारतीय जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा की सक्रिय निगरानी की जा रही है। 

फारस की खाड़ी में भारतीय विमानों का हाल क्या है?

हाल के दिनों में विदेशी ध्वज वाले जहाजों पर हुए हमलों में भीषण तबाही मचाई है। इन विमानों पर करीब 78 भारतीय क्रू मेंबर भी रहे, जिनमें 3 की जान चली गई, 1 लापता है। 4 लोग घायल हैं। बुधवार को भारत ने मर्चेंट शिपिंग पर हमलों की निंदा की थी। गुजरात के कांडला पोर्ट जाने वाले थाई ध्वज वाले जहाज पर IRGC ने फायरिंग की थी। 

भारतीय नाविकों का क्या होगा?

थाईलैंड के जहाज मयूरी के 20 क्रू मेंबर को बचाया गया है, 3 लापता हैं।  विदेश मंत्रालय ने कहा है, 'भारत इस बात की निंदा करता है कि वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष में कमर्शियल शिपिंग को सैन्य हमलों का निशाना बनाया जा रहा है। हम फिर कह रहे हैं, कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना, निर्दोष नागरिक चालक दल सदस्यों को खतरे में डालना या नेविगेशन और कॉमर्स की स्वतंत्रता में बाधा डालना टाला जाना चाहिए।'

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ईरान का पक्ष क्या है?

ईरान के विदेश मंत्रालय ने 10 मार्च की बातचीत पर कहा है कि दोनों पक्षों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग सुरक्षा पर अमेरिका और इजरायल की सैन्य झड़पों पर बातचीत हुई है। ईरान का कहना है कि फारस की खाड़ी में असुरक्षा अमेरिका की आक्रामक और अस्थिर करने वाली कार्रवाइयों का नतीजा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका को इसके लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए।

होर्मुज के बंद होने से हुआ क्या?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लगभग बंद होने से तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ रही हैं। भारत जैसे देश में LPG संकट पैदा हो गया है। लोगों को सिलेंडर नहीं मिल रहा है। तेल और गैस की कीमतें बेतहाशा बढ़ गईं हैं। गैस शिपमेंट का 20 फीसदी हिस्सा यहीं से गुजरता है। ईरान के तेवर अभी नरम नहीं पड़े हैं। अमेरिका और इजरायल, इस जंग को और उलझा रहे हैं।