संजय सिंह, पटना: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग की तपिश अब बिहार की सिल्क सिटी भागलपुर के बुनकरों तक पहुंचने लगी है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आई इस उथल-पुथल ने भागलपुर के सिल्क उद्योग को एक बड़ा झटका दिया है। जानकारी के मुताबिक, वैश्विक तनाव और शिपमेंट के जोखिमों को देखते हुए विदेशी खरीदारों ने सिल्क उत्पादों का करीब 25 करोड़ रुपये का बड़ा निर्यात ऑर्डर अचानक रद्द कर दिया है।
इस खबर के सामने आते ही शहर के बुनकरों और सिल्क कारोबारियों में चिंता का माहौल बन गया है। भागलपुर का सिल्क उद्योग लंबे समय से देश और विदेश में अपनी खास पहचान रखता है। यहां तैयार होने वाली तसर और मल्बरी सिल्क की साड़ियां, दुपट्टे और फैब्रिक यूरोप, अमेरिका और मिडिल ईस्ट के कई देशों में निर्यात किए जाते हैं लेकिन हाल के दिनों में बढ़ते वैश्विक तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी का असर अब इस पारंपरिक उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है।
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25 करोड़ का निर्यात ऑर्डर हुआ रद्द
सिल्क कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार मिडिल ईस्ट के एक बड़े आयातक ने भागलपुर से करीब 25 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर दिया था। इस ऑर्डर के तहत बड़ी मात्रा में सिल्क फैब्रिक और तैयार परिधान विदेश भेजे जाने थे। कई बुनकरों ने इसके लिए उत्पादन शुरू कर दिया था। करघों पर लगातार काम चल रहा था और कच्चे माल की खरीद भी की जा चुकी थी लेकिन अचानक ऑर्डर रद्द होने से पूरा व्यापार प्रभावित हो गया।
कारोबारियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सैन्य तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार अस्थिर हो जाता है। ऐसे हालात में विदेशी खरीदार जोखिम से बचने के लिए नए ऑर्डर रोक देते हैं या पहले से दिए गए ऑर्डर भी रद्द कर देते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण शिपमेंट और व्यापार से जुड़े जोखिम बढ़ गए हैं। जिसके चलते विदेशी खरीदार ने यह बड़ा ऑर्डर रद्द कर दिया।
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बुनकरों और मजदूरों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
निर्यात ऑर्डर रद्द होने से भागलपुर के बुनकरों और मजदूरों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय बुनकरों का कहना है कि बड़े निर्यात ऑर्डर उनके लिए जीवनरेखा की तरह होते हैं। एक ऑर्डर पर सैकड़ों करघों का काम चलता है और हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। ऑर्डर रद्द होने से तैयार माल फंस गया है और कई बुनकर आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।
सिल्क व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल का सीधा असर छोटे उद्योगों पर पड़ता है। जब भी वैश्विक स्तर पर राजनीतिक या सैन्य तनाव बढ़ता है तो विदेशी खरीदार सतर्क हो जाते हैं। वे नए ऑर्डर रोक देते हैं या पहले से दिए गए ऑर्डर भी रद्द कर देते हैं। यही वजह है कि भागलपुर का यह बड़ा ऑर्डर भी रुक गया।
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बुनकरों को अब भी है उम्मीद
भागलपुर की पहचान और हजारों परिवारों की आजीविका से जुड़ा है। ऐसे में निर्यात बाजार को मजबूत करने और नए देशों में व्यापार बढ़ाने के लिए विशेष पहल जरूरी है। रेशम नगरी के बुनकर फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। करघों की खनक के साथ अब एक चिंता भी जुड़ गई है। कहीं वैश्विक सियासत की आंच से उनका पारंपरिक उद्योग ठंडा न पड़ जाए। हालांकि उम्मीद अभी बाकी है कि हालात सामान्य होंगे और भागलपुर का सिल्क फिर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी रफ्तार पकड़ लेगा।