डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल 20 जनवरी को दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। अभी उनका एक वर्ष का कार्यकाल पूरा हुआ है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक साल में उनसे सातवीं बार मुलाकात की है। जब भी अमेरिका और इजरायल के बीच कुछ मामला फंसता है, तब ही नेतन्याहू वाशिंगटन पहुंच जाते हैं। पिछले साल जून में ट्रंप ईरान पर बमबारी के पक्ष में नहीं थे। मगर ऐन वक्त में नेतन्याहू ने उन्हें मना लिया था, लेकिन अबकी फिलहाल उनकी दाल गलती नहीं दिख रही है। नेतन्याहू का मानना है कि अमेरिका को हमला करना चाहिए, लेकिन ट्रंप अभी तैयार नहीं है। ऐसे में आइये जानते हैं कि ट्रंप नेतन्याहू की बात क्यों नहीं मान रहे हैं?

 

डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को व्हाइट हाउस में मुलाकात की। दोनों ने ईरान मामले पर व्यापक बातचीत की। नेतन्याहू हमले पर बल दे रहे थे, लेकिन ट्रंप ईरान के साथ बातचीत के पक्ष में है। तीन घंटे तक चली बैठक के बाद दोनों नेताओं ने कोई बयान नहीं दिया। पिछले बैठकों में अक्सर होता था कि दोनों नेता प्रेस से बात करते थे। मीडिया के सवालों के जवाब देते थे, लेकिन अबकी ऐसा नहीं हुआ। कुछ विश्लेषक इसे ठंडी मुलाकात बता रहे हैं। उनका मानना है कि नेतन्याहू को ट्रंप से वैसा समर्थन नहीं मिला, जैसा वह सोचकर इजरायल से चले थे।

 

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डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि ईरान को एक समझौते पर राजी किया जा सकता है। वे अगली दौर की बैठक के पक्ष में है, जबकि नेतन्याहू का तर्क है कि ईरान पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। ट्रंप ने साफ शब्दों में नेतन्याहू से कहा कि ईरान के साथ परमाणु समझौता करना बेहद जरूरी है। उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने संकेत दिया कि अमेरिका ईरानी सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश नहीं रच रहा है। उसका ध्यान ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने पर टिका है।

बातचीत से ईरान को आजमाना चाहते हैं ट्रंप

बैठक के बाद ट्रंप ने कहा, 'यह एक बहुत अच्छी बैठक थी, हमारे दोनों देशों के बीच शानदार संबंध जारी हैं। कोई निर्णायक निष्कर्ष नहीं निकला, सिवाय इसके कि मैंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान के साथ बातचीत जारी रखी जाए, ताकि यह देखा जा सके कि कोई समझौता हो सकता है या नहीं।' उधर, नेतन्याहू ने सिर्फ इतना ही कहा कि दोनों पक्षों ने ईरान, गाजा और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। इजरायल की सुरक्षा जरूरतों पर जोर दिया और दोनों इस बात पर सहमत हुए कि घनिष्ठ समन्वय और निरंतर संचार बनाए रखा जाएगा। 


इजरायल लौटने के बाद नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा कि ट्रंप का मानना ​​है कि ईरानियों को एक अच्छे समझौते को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जा सकता है, लेकिन मैंने अपनी शंकाओं पर जोर दिया।

यहां पेंच फंसना तय

ट्रंप का मानना है कि अगले महीने तक ईरान के साथ वार्ता का हासिल निकल आएगा। अमेरिका और इजरायल चाहते हैं कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़े। संवर्धित यूरेनियम को किसी तीसरे देश के हवाले करे। बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करे और अपने प्रॉक्सी से संबंध तोड़े। इन शर्तों पर ईरान का सहमत होना लगभग नामुमकिन है, क्योंकि ईरान की सरकार ने साफ कर दिया है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम पर होगी।

 

यह आशंका: हालांकि ट्रंप बार-बार भले कह रहे हैं कि ईरान पर अमेरिका हमला नहीं करेगा। अभी सिर्फ बातचीत पर फोकस किया जाएगा। मगर ट्रंप जो कहते हैं, करते उससे उलट हैं। पिछली बार भी उन्होंने दावा किया था कि ईरान पर हमले का कोई प्लान नहीं है और अगले दिन ही बमबारी शुरू कर दी थी।

इजरायल को कौन सी चिंता सता रही?

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू किसी भी हाल में ईरान पर हमला करने के पक्ष में है। उनका कहना है कि ईरान के साथ समझौता हो या न हो, लेकिन इजरायल के पास हमला करने की आजादी हो। वहीं इजरायली अधिकारियों ने आशंका जताई है कि ईरान के साथ कोई समझौता होने की उम्मीद बिल्कुल नहीं है। इजरायली चैनल 12 ने भी अपनी रिपोर्ट में इजरायली और अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिका को भी समझौते पर संदेह है। अधिकारियों का कहना है कि अगर समझौता नहीं होने पर अमेरिका और इजरायल एक साथ हमले पर सहमत होते हैं तो यह हमला अधिक प्रभावशाली होगा। 

सबसे बड़ा युद्धपोत भेज रहा अमेरिका

बातचीत के बीच ईरान और अमेरिका में तनाव भी है। ट्रंप अभी तक हमले से बच रहे हैं, लेकिन ईरान पर दवाब की रणनीति पर डटे हैं। अब अमेरिकी नौसेना ने मध्य पूर्व में दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत गेराल्ड आर. फोर्ड की तैनाती का प्लान बनाया है। कैरेबियन सी से पोत को मध्य पूर्व की तरफ रवाना कर दिया गया है। अमेरिका और ईरान के बीच एक दौर की बातचीत ओमान की राजधानी मस्कट में हो चुकी है। इसी महीने अगली बैठक की भी उम्मीद है। ट्रंप ने गुरुरुवा को भी ईरान को अपनी चेतावनी दोहराई। उन्होंने कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान को बेहद गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे।

ईरान की हिट लिस्ट में सात शख्सियत

ईरान को पता है कि अमेरिका किसी भी वक्त हमला कर सकता है। यही वजह है कि उसने अमेरिका के खिलाफ इजरायल को मोहरा बनाया है। ईरान बार-बार धमकी दे रहा है कि अगर हमारे ऊपर हमला किया गया तो बदले में हम इजरायल पर हमला करेंगे। अमेरिका के खिलाफ उसका रुख नरम है, लेकिन क्षेत्रीय युद्ध की धमकी देकर ट्रंप को भी झांसे में ले रहा है। इस बीच ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने सात लोगों की तस्वीरें जारी हैं। इसमें इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी मारने की धमकी दी गई है। इसे भी अमेरिका पर ईरान की एक दबाव वाली रणनीति के तहत देखा जा रहा है।

 

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ईरान की हिट लिस्ट में कौन-कौन?

  • इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू
  • मोसाद के निदेशक डेविड बार्निया 
  • रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज, 
  • आईडीएफ प्रमुख एयाल जमीर
  • वायुसेना प्रमुख तोमर बार 
  • सैन्य खुफिया निदेशालय के प्रमुख श्लोमी बाइंडर
  • संचालन निदेशालय के प्रमुख इट्जिक कोहेन

इजरायल को क्या धमकी मिली?

ईरान के सरकारी ओफोग नेटवर्क ने अपने टीवी चैनल में बेंजामिन नेतन्याहू समेत सात अधिकारियों की हत्या की खुल धमकी दी। हिब्रू भाषा में एंकर ने कहा, 'हम तुम्हारी मौत का समय तय करेंगे, अबाबिल का इंतजार करो।' बता दें कि ईरान में निर्मित एक ड्रोन का नाम अबाबिल है। अब आशंका जताई जा रही है कि क्या ईरान ड्रोन हमले में नेतन्याहू को मारने की साजिश रच रहा है।