बांग्लादेश चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को बहुमत मिल गया है। बीएनपी ने 300 संसदीय सीटों में से 151 से अधिक पर जीत हासिल की है। माना जा रहा है कि बीएनपी के मुखिया तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री होंगे। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि बांग्लादेश के अंतरिम सलाहकार मोहम्मद यूनुस को अगली सरकार में कोई पद मिलेगा या नहीं।
बांग्लादेश के चुनाव पर भारत की गहरी दिलचस्पी थी। यह चुनाव भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को नया आयाम देने में अहम भूमिका निभाएंगे। अगर जमात को जीत मिलती तो यह भारत के लिए बड़ा झटका होता, लेकिन तारिक रहमान की जीत को बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। आइये जानते हैं कि तारिक रहमान की सरकार में भारत के साथ बांग्लादेश के संबंध कैसे हो सकते हैं?
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बीएनपी पहले ही तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनाने की घोषणा कर चुकी है। अगर तारिक शपथ लेते हैं तो 36 साल बाद बांग्लादेश को पुरुष प्रधानमंत्री मिलेगा। उनकी पार्टी 2001 से 2006 के बीच बांग्लादेश की सत्ता में रही। उस वक्त जमात-ए-इस्लामी भी गठबंधन का हिस्सा थी। उसके दो नेता मंत्री थे। तब भारत और बांग्लादेश के संबंध बेहद खराब हो गए थे।
भारत के प्रति कैसा है तारिक का रवैया?
तारिक रहमान करीब 17 साल तक निर्वासन में रहे। पिछले साल दिसंबर में वे बांग्लादेश लौटे थे। जमात की तुलना में तारिक का रवैया भारत के प्रति अधिक सकारात्मक है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने जहां भारत के खिलाफ रुख अपनाया, चीन और पाकिस्तान से करीबी बढ़ाई। मगर अभी तक तारिक रहमान के व्यवहार में ऐसा रुख नहीं देखने को मिला।
वे साफ कह चुके हैं कि चीन, भारत और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ समान दूरी बनाए रखेंगे। उन्होंने खुलकर नारा दिया कि ' न दिल्ली, न पिंडी, बांग्लादेश फर्स्ट।' मतलब साफ है कि बांग्लादेश में रावलपिंडी की उतनी दखल नहीं होगी, जितनी यूनुस सरकार में देखने को मिली।
बीएनपी की जीत पर हिंदुओं को क्या लगता?
शेख हसीना के पदस्थ होने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा में बाढ़ सी आ गई। मगर तारिक रहमान ने अपने मंच से कभी कट्टरपंथी भाषणों को हवा नहीं दी। उन्होंने जनता से एक सुरक्षित बांग्लादेश बनाने का वादा किया और कहा कि बांग्लादेश सभी का है। उनके इस बयान से हिंदुओं को बड़ी राहत मिली। उन्हें उम्मीद है कि तारिक के शासन में हिंदुओं पर हिंसा यूनुस सरकार की तरह नहीं होगी।
कहां बढ़ सकती है भारत की टेंशन?
एक राहत की बात यह है कि तारिक रहमान ने अपने भाषणों में कभी भारत विरोधी रुख नहीं अपनाया, जबकि मोहम्मद यूनुस ने ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ा। हालांकि कुछ मुद्दों पर तारिक रहमान और भारत के बीच मतभेद हो सकते हैं। इनमें तीस्ता और पद्मा नदियों का पानी शामिल है। तारिक इन्हें अपने अस्तित्व का मुद्दा बता चुके हैं।
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बीएनपी की पिछली सरकार का रुख भारत विरोधी रहा है। 2001 से 2006 तक तारिक रहमान की मां खालिदा जिया ने बांग्लादेश की गद्दी संभाली। उस वक्त भारत के साथ उनके रिश्ते बेहद खराब थे। पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकियों ने सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां पैदा कीं।
भारत ने भांप लिया था रुख
भारत ने बांग्लादेश में बदले रुख को पहले ही भांप लिया था। जब पिछले साल खालिदा जिया का निधन हुआ तो विदेश मंत्री एस. जयशंकर ढाका पहुंचे। यहां उन्होंने तारिक रहमान से मुलाकात करके उनकी मां के निधन पर दुख व्यक्त किया था। उससे पहले जिया की तबीयत खराब होने पर पीएम मोदी शीघ्र स्वस्थ्य होने की शुभकामना दी थी। अब संसदीय चुनाव में मिली जीत पर पीएम मोदी ने तारिक रहमान को बधाई दी।