भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने फाइलेरिया (हाथीपांव) बीमारी से लोगों को बचाने के लिए अहम कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्रालय एक विशेष अभियान चलाएगा, जिसके तहत लोगों को मुफ्त में दवाइयां बांटी जाएंगी। यह अभियान 10 फरवरी से शुरू होगा। भारत के 12 राज्यों के 124 प्रभावित जिलों में दवाइयां वितरित की जाएंगी।

 

स्वास्थ्यकर्मी लोगों को यह भी बताएंगे कि इस बीमारी से बचने के उपाय क्या-क्या हैं? यह दवाइयां प्रभावित जिलों के हर व्यक्ति को दी जाएंगी, ताकि फाइलेरिया बीमारी के फैलाव को रोका जा सके। फाइलेरिया (हाथीपांव) बीमारी मच्छर के काटने की वजह से होती है। इस बीमारी की वजह से लोगों के हाथ- पैर सूज जाते हैं। यह सूजन कई बार जीवनभर के लिए हो जाती है, जिसका खामियाजा यह होता है कि लोग जीवनभर के लिए विकलांग हो जाते हैं।

 

यह भी पढ़ेंः 300 AQI में रहने का मतलब है जिंदगी के 7.5 साल पर चली कैंची

कैसे होता है फाइलेरिया बीमारी

फाइलेरिया बीमारी उन मच्छरों के काटने की वजह से होती है, जिनकी प्रजाति क्यूलेक्स और मैन्सोनाइडिस होती है। यह मच्छर इंसान को काटने के बाद उनके शरीर में धागे के समान छोटे-छोटे वायरस छोड़ देते हैं। इसके बाद ये वायरस व्यक्ति के शरीर में घुस जाते हैं और धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं। कुछ सालों बाद सामान्य और स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति के पैरों, हाथों या शरीर के अन्य अंगों में सूजन होने लगती है।

 

 

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल के अनुसार, फाइलेरिया का असर सिर्फ हाथ और पैरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है। इससे किडनी पर भी असर पड़ता है, साथ ही हाथ-पैर और त्वचा को नुकसान पहुंचता है। इस बीमारी से इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो जाता है।

कहां पनपते हैं मच्छर?

क्यूलेक्स और मैन्सोनाइडिस मच्छर आमतौर पर गंदे पानी, नालियों और तालाबों में पनपते हैं। खासकर रुके हुए पानी जैसे नालियां, पुराने टायर, नारियल के खोल, गड्ढे, कूलर और डिब्बों में जमे पानी में ये मच्छर तेजी से प्रजनन करते हैं, जिससे इनकी संख्या बढ़ जाती है।

फाइलेरिया के लक्षण

शुरुआत में इस बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। हालांकि, जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, वैसे-वैसे इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। जैसे बुखार आना, शरीर में दर्द होना और शरीर के अंगों में, खासकर हाथों और पैरों में सूजन होना।

 

यह भी पढ़ें: 7000 रुपये प्रति लीटर मिलता है इस जानवर का दूध, जानिए इसकी खासियत

क्या है इलाज?

अगर किसी व्यक्ति को बुखार, शरीर में दर्द और सूजन हो रही है, तो उसे जल्द से जल्द ब्लड टेस्ट कराना चाहिए। इसके बाद डॉक्टर नियमित दवाइयां देते हैं, जिससे बीमारी का समय रहते इलाज हो सकता है। इस बीमारी में छोटे वायरस व्यक्ति के शरीर में घुसने के बाद खून में फैल जाते हैं और शरीर के अंदर प्रजनन करने लगते हैं, जिससे उनकी संख्या बढ़ जाती है। फाइलेरिया का पता चलने के बाद डॉक्टर ऐसी दवाइयां देते हैं, जो खून में कीड़ों के प्रजनन को रोकती हैं, ताकि उनकी संख्या कम हो सके।

भारत में कितने मामले?

इंडियन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ के 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 3.1 करोड़ लोग फाइलेरिया बीमारी से ग्रसित हैं। इनमें से 2.3 करोड़ ऐसे लोग हैं, जिनके शरीर में इसके लक्षण साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिन्हें इस बीमारी के लक्षणों का पता ही नहीं चल पा रहा है। इसके बावजूद उनके शरीर में अंदरूनी रूप से किडनी डैमेज हो रहा है। इसी वजह से भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय यह अभियान चलाने वाली है। ताकि देश को फाइलेरिया मुक्त हो जाए।