आजकल के भागदौड़ भरे जीवन में जिस प्रकार शरीर को रेस्ट देना जरूरी है, उसी प्रकार दिन भर काम कर रहे दिमाग को भी आराम देना बेहद अहम हो जाता है। दिमाग को रेस्ट तभी मिल पाएगा जब व्यक्ति डिजिटल गैजेट जैसे फोन और लैपटॉप से दूरी बनाकर रखेगा। तभी दिमागी शांति की उम्मीद की जा सकती है। डिजिटल गैजेट से डिजिटल डिटॉक्स प्रक्रिया के जरिए किया जा सकता है। आजकल की कॉरपोरेट लाइफ में दिमाग को रेस्ट देना थोड़ा मुश्किल हो गया है, क्योंकि कभी ऑफिस का जरूरी मैसेज आ जाता है तो कभी काम का मेल आ जाता है। जिस वजह से व्यक्ति हर वक्त फोन या लैपटॉप से चिपका रहता है। ज्यादा फोन और लैपटॉप के इस्तेमाल से व्यक्ति का दिमाग हर वक्त कुछ न कुछ सोचता रहता है। साथ ही ज्यादा फोन के इस्तेमाल से व्यक्ति को फोन की लत लग जाती है। इस वजह से लोगों को अपने दिमाग को आराम देने के लिए डिजिटल डिटॉक्स करना चाहिए।
डिजिटल डिटॉक्स हमारे दिमाग के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया है। डिजिटल डिटॉक्स में लोगों को अपने फोन और लैपटॉप से दूरी बनानी होती है। यानी कुल मिलाकर डिजिटल प्लेटफॉर्म से दूरी बनानी होती है ताकि दिमाग को कुछ समय के लिए आराम और शांति मिल सके। अब सवाल उठता है कि दिमाग के आराम के लिए डिजिटल डिटॉक्स क्यों जरूरी है, डिजिटल डिटॉक्स की प्रक्रिया क्या है और डिजिटल डिटॉक्स के फायदे क्या हैं।
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डिजिटल डिटॉक्स दिमाग के लिए क्यों जरूरी?
डिजिटल डिटॉक्स दिमाग के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि हद से ज्यादा फोन चलाने से व्यक्ति को फोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म की लत लग जाती है। जेनरेशन Z के कई युवा फोन में रील्स स्क्रॉल करते ही रहते हैं। जिस वजह से दिमाग में लगातार विचार चलते रहते हैं, जिससे दिमाग को रेस्ट नहीं मिलता है। दिमाग को आराम न मिल पाने के कारण दिमाग थक जाता है। दिमाग के थकने के बाद व्यक्ति का काम करने का मन कम हो जाता है। इससे ऑफिस में काम करने का मन नहीं करता, मानसिक तनाव महसूस होता है, व्यक्ति की फोकस करने की क्षमता कमजोर हो जाती है और नींद भी कम हो जाती है।
अगर हम समय रहते डिजिटल डिटॉक्स की प्रक्रिया अपना लें तो हमें जल्द ही दिमाग से संबंधित परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की एक स्टडी के मुताबिक, सिर्फ एक हफ्ते के डिजिटल डिटॉक्स में भाग लेने वाले लोगों में चिंता 16.1 प्रतिशत, डिप्रेशन के लक्षण 24.8 प्रतिशत और नींद न आने की समस्या 14.5 प्रतिशत कम हो गई। इन आंकड़ों से साफ होता है कि आज के दौर में डिजिटल डिटॉक्स कितना जरूरी है।
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डिजिटल डिटॉक्स की प्रक्रिया
दिन में कुछ घंटों के लिए फोन से दूरी बना लें। जैसे सुबह उठते समय फोन न चलाएं और रात में सोने से पहले फोन का इस्तेमाल न करें ताकि समय पर नींद आ सके। इससे व्यक्ति का स्लीप साइकल भी ठीक हो जाता है। अगर बेहद जरूरी हो तभी फोन का नोटिफिकेशन ऑन रखें, वरना कोशिश करें कि फोन का नोटिफिकेशन बंद रखें।
फोन की समय सीमा तय करनी चाहिए। यानी एक दिन में हम कितने घंटे फोन चला रहे हैं इसका ध्यान रखना चाहिए और केवल जरूरी काम के लिए ही फोन का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर ऑफिस की छुट्टियां चल रही हों तो कुछ दिनों के लिए फोन को बंद भी किया जा सकता है। हालांकि फोन बंद करने से पहले अपने परिवार और करीबी दोस्तों को इसकी जानकारी दे देनी चाहिए ताकि उन्हें चिंता न हो। इस प्रक्रिया से फोन चलाने की लत कम हो जाएगी।
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डिजिटल डिटॉक्स के फायदे
दिमाग को आराम - डिजिटल डिटॉक्स के कारण हमारे दिमाग को आराम मिलता है, जिससे दिमाग शांत और स्वस्थ रहता है।
तनाव कम - दिमाग को अगर समय पर आराम मिल जाए तो चिंता और तनाव के लक्षण कम हो जाते हैं।
बेहतर नींद - अगर फोन चलाने की लत कम हो जाएगी तो व्यक्ति बेवजह रात को सोने से पहले फोन इस्तेमाल नहीं करेगा और सही समय पर सो पाएगा, जिससे उसकी नींद पूरी होगी।
बॉडी फिट रहेगी - डिजिटल डिटॉक्स से हमारी आंखों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है, गर्दन और पीठ पर पड़ने वाला तनाव भी कम हो जाता है। साथ ही शारीरिक गतिविधि भी बढ़ती है।
