QS एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 के हालिया डेटा ने भारतीय टेक्निकल एजुकेशन की ग्लोबल स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लोकसभा में शिक्षा मंत्रालय द्वारा पेश किए गए डेटा के अनुसार, भारत का कोई भी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) एशिया की टॉप 50 यूनिवर्सिटी में जगह बनाने में कामयाब नहीं हुआ है। हालांकि इंस्टीट्यूशन की संख्या बढ़ी है लेकिन देश के सबसे प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूशन अभी भी क्वालिटी के मामले में इंटरनेशनल लेवल पर पीछे हैं।
तमिलनाडु के विल्लुपुरम से सांसद डॉ. डी. रवि कुमार ने लोकसभा में QS एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में IITs की परफॉर्मेंस के बारे में एक सवाल पूछा था। शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. सुकान्त मजूमदार ने 9 मार्च, 2026 को जवाब दिया। जवाब के मुताबिक, IIT दिल्ली लगातार दूसरे साल भारत की टॉप रैंक वाली यूनिवर्सिटी बनी हुई है। लेकिन इसकी एशियन रैंकिंग सिर्फ 59वीं है। इसके बाद, IIT मद्रास 70वें और IIT बॉम्बे 71वें नंबर पर है।
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हालांकि, सरकार का तर्क है कि रैंकिंग में भारतीय संस्थानों की कुल संख्या में काफी वृद्धि हुई है। राज्य मंत्री ने बताया कि 2020 में केवल 100 संस्थान थे, वहीं 2026 तक 294 संस्थानों ने इस रैंकिंग में जगह बनाई है। लेकिन केवल संख्या में वृद्धि पर्याप्त नहीं है जब तक कि हमारे शीर्ष संस्थान टॉप-50 की एलीट लिस्ट से बाहर रहते हैं।
2026 में एशिया की टॉप 5 यूनिवर्सिटी की लिस्ट
- द यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्ग कॉन्ग, (हॉन्ग कॉन्ग)
- पेकिंग यूनिवर्सिटी, (बीजिंग, चीन)
- नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, (सिंगापुर)
- नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर, (सिंगापुर)
- फूडन यूनिवर्सिटी, (शंघाई, चीन)
आपको बता दें कि दुनिया भर में विश्वविद्यालयों की रैंकिंग तय करने के लिए कई चीजों को देखा जाता है। इनमें मुख्य रूप से वहां होने वाला शोध कार्य, विदेशी फैकल्टी की संख्या, दूसरे देशों से आने वाले छात्रों की संख्या, अकादमिक प्रतिष्ठा और उद्योगों से उनका जुड़ाव जैसे मानक शामिल होते हैं।
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सरकार की पहल क्या है?
लोकसभा में दिए गए एक जवाब के अनुसार, सरकार ने कहा कि वह हायर एजुकेशन और टेक्निकल रिसर्च को मजबूत करने के लिए कई पहल कर रही है। जिसमें प्रमुख संस्थानों के आसपास रिसर्च पार्क बनाना, उद्योग-अकादमिक के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और हाई-क्वालिटी रिसर्च को बढ़ावा देना शामिल है।
इसके अलावा 2018-19 में प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप (PMRF) स्कीम शुरू की गई थी। जिसके तहत श्रेष्ठ प्रतिभाओं को उच्च स्तरीय शोध के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। राज्य मंत्री के मुताबिक, PMRF के तहत 3,688 स्कॉलर को एडमिशन मिला है। PMRF के पहले फेज में रिसर्च के अच्छे नतीजे मिले हैं और इसलिए बजट 2025-26 में PMRF के तहत बढ़ी हुई फाइनेंशियल मदद के साथ टेक्निकल रिसर्च के लिए 10,000 फेलोशिप की घोषणा की गई है।
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अपने जवाब में राज्य मंत्री ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत, सरकार IIT प्रणाली को ग्लोबली कॉम्पिटिटिव बनाने के लिए कई खास कदम उठा रही है। इसमें हाई-इम्पैक्ट रिसर्च और इंटरनेशनल स्टूडेंट और फैकल्टी की आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए स्पेशल फंडिंग शामिल है। इसके अलावा, एकेडमिक जर्नल्स तक पहुंच बढ़ाने के लिए 2025 और 2027 के बीच वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (ONOS) योजना के लिए 6,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
