पिछले दस सालों में देश की हायर ज्यूडिशियरी के जजों के खिलाफ बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज की गई हैं। यह जानकारी विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से 13 फरवरी को दी गई। राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का लिखित जवाब चौंकाने वाला है। मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश किए गए डेटा के अनुसार, पिछले दस सालों में उच्चतर न्यायपालिका के न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों की संख्या में उतार-चढ़ाव आया है, जो कुल हजारों में है। अब सवाल यह उठता है कि इन मामलों का निपटारा कैसे होता है, और इन्हें कौन देखता है?
अपने जवाब में, मंत्रालय ने 2016 से 2025 तक का डेटा पेश किया। इस लिखित जवाब के अनुसार सबसे ज्यादा शिकायतें 2024 में दर्ज की गईं, जबकि सबसे कम मामले 2020 में COVID-19 महामारी के दौरान दर्ज किए गए। इस डेटा के अनुसार, 2016 से 2025 तक हायर ज्यूडिशियरी के जजों के खिलाफ कुल 8,630 शिकायतें दर्ज की गईं।
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साल दर साल शिकायतों की संख्या
| साल | धशकायतों की संख्या |
| 2016 | 729 |
| 2017 | 682 |
| 2018 | 717 |
| 2019 | 1037 |
| 2020 | 518 |
| 2021 | 686 |
| 2022 | 1012 |
| 2023 | 977 |
| 2024 | 1170 |
| 2025 | 1102 |
कैसे होता है उच्चतर न्यायपालिका के न्यायाधीशों का निपटारा?
मंत्रालय ने लिखित जवाब में बताया कि न्यायाधीशों के खिलाफ आने वाली शिकायतों का निपटारा न्यायपालिका के भीतर तय आंतरिक व्यवस्था के तहत किया जाता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान में सुरक्षित है, इसलिए उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के विरुद्ध शिकायतों की जांच और कार्रवाई भी न्यायपालिका स्वयं करती है।
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दिए गए जवाब के अनुसार, वर्ष 1997 में सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक आचरण से जुड़े दो अहम संकल्प अपनाए थे। इनमें 'न्यायिक जीवन के मूल्यों' का पालन तथा न्यायाधीशों के खिलाफ उचित कार्रवाई के लिए एक 'आंतरिक प्रक्रिया' तय की गई। इसी ढांचे के तहत शिकायतों की जांच की जाती है और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई तय होती है।
प्रक्रिया के मुताबिक, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों या उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतें भारत के मुख्य न्यायाधीश को भेजी जाती हैं। वहीं किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के विरुद्ध शिकायत संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास जाती है। CPGRAMS जैसे सरकारी पोर्टल या अन्य माध्यम से प्राप्त शिकायतों को भी जांच के लिए सक्षम प्राधिकारी को अग्रेषित किया जाता है।
