केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को अमेरिका के साथ ट्रेड डील की रूपरेखा क्या होगी, इसके बारे में बात की। अपनी बात रखते हुए गोयल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस शर्त के बारे में सीधा जवाब देने से एर बार फिर से बच निकले कि भारत रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा या नहीं। साथ ही वह ट्रंप के टैरिफ को लेकर दिए गए पिछले बयानों के बारे में भी बोलने से बचे।
पीयूष गोयल ने कहा, 'अमेरिका से क्रूड ऑयल या LNG, LPG खरीदना भारत के अपने रणनीतिक फायदे में है क्योंकि हम अपने तेल सोर्स में विविधता ला रहे हैं।' एक इंटरव्यू में जब पीयूष गोयल से अमेरिका द्वारा रूसी तेल को मुद्दा बनाने, यूक्रेन में युद्ध में रूस की भूमिका और व्लादिमीर पुतिन सरकार के साथ भारत की तेल डील पर बातचीत तो उन्होंने टालते हुए कहा कि यह विदेश मंत्रालय का अधिकार क्षेत्र है।
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ट्रेड डील पर क्या होगा असर?
अगर रूसी तेल या डिफेंस मामलों पर दोनों देशों के बीच आम सहमति नहीं बनती है, तो क्या इसका असर ट्रेड डील पर भी नहीं पड़ेगा? इसपर गोयल ने कहा, 'नहीं, बिल्कुल नहीं। ट्रेड डील यह पक्का करती है कि व्यापार का रास्ता आसान हो, खास पहुंच मिले। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट खास पहुंच के बारे में हैं... जब हमारे पास 18% रेसिप्रोकल टैरिफ होता है, तो हमें दूसरे विकासशील देशों पर तरजीह मिलती है, जो आमतौर पर हमारे प्रतिद्वंदी होते हैं।'
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किसानों के हितों की पूरी रक्षा होगी
वहीं, पीयूष गोयल ने कहा है कि कृषि के मामले में भारत के किसानों और उत्पादकों के हितों का 100% ध्यान रखा गया है। उन्होंने बताया कि भारत ने मांस, पोल्ट्री, जीएम फूड्स या उनके उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी है। इसके अलावा सोया मील, मक्का, चावल, गेहूं जैसे अनाज और ज्वार, बाजरा, रागी जैसी फसलों पर भी कोई छूट नहीं दी गई है।
