विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कोलकाता स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) के एक कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया। उन्होंने मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में कहा, 'यह एक ऐसा युग है, जहां राजनीति तेजी के साथ अर्थशास्त्र पर हावी हो रही है और यह कोई मजाक नहीं है।' उनका यह बयान भारत और अमेरिका के बीच व्यापार के मुद्दे पर जारी तनाव के बीच आया है। उन्होंने आपूर्ति स्रोतों में विविधिता लाने की वकालत की, ताकि राष्ट्रीय जरूरतों को निर्बाध रूप से पूरा किया जा सके। बता दें कि आईआईएम-कलकत्ता ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया है।
अपने संबोधन में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, 'यह एक ऐसा युग है, जहां राजनीति तेजी से अर्थशास्त्र पर हावी हो रही है और यह कोई मजाक नहीं है। आज की अनिश्चित दुनिया में यह बेहद जरूरी है कि हम अपनी राष्ट्रीय जरूरतों को पूरा करने के लिए आपूर्ति स्रोतों में लगातार विविधता लाएं। मौजूदा व्यवस्था का लंबे समय से समर्थक रहे अमेरिका ने आज संबंधों की बिल्कुल नई शर्तें तय की हैं। वह ऐसा देशों के साथ वन-ऑन-वन बेसिस पर डील करके कर रहा है।' चीन के बारे में विदेश मंत्री ने कहा कि वह लंबे समय से अपने नियमों से चलता आ रहा है और अब भी यही कर रहा है।
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चीन पर वैश्विक निर्भरता का जिक्र
जयशंकर ने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक उत्पादन का एक तिहाई हिस्सा चीन में होता है। इससे सप्लाई चेन के लचीलेपन और भरोसे पर सभी का ध्यान जाता है। संघर्षों और जलवायु संबंधी घटनाओं ने व्यवधान की संभावना को बढ़ा दिया है। ग्लोबलाइजेशन, बिखराव और आपूर्ति असुरक्षा के दबाव और खिंचाव का सामना करते हुए बाकी विश्व सभी आकस्मिकताओं से बचाव करके अपनी प्रतिक्रिया देता है।
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हर मानदंड पर आगे बढ़ रहा भारत
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत में तेजी के साथ हाईवे, रेलवे, विमानन, बंदरगाह, ऊर्जा और बिजली के क्षेत्र में विकास हो रहा है। इससे भारत और एशिया की अन्य अर्थव्यवस्थाओं के बीच अंतर कम हो रहा है। हम हर मानदंड से आगे बढ़ रहे हैं। दुनिया भी भारत की प्रगति पर ध्यान दे रही है। यही वजह है कि हम नई व्यापार व्यवस्था बनाने और नई कनेक्टिविटी पहल को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में सक्रिय तौर पर काम कर रहा है।
