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महायुति vs महागठबंधन: जो दुश्मन है, वही दोस्त है, जो दोस्त, वही दुश्मन

महाराष्ट्र की सियासत में स्थानीय दोस्ती, सियासी गठबंधन पर भारी पड़ रही है। असर यह हो रहा है कि शिंदे गुट की शिवसेना, कांग्रेस के साथ कई जगह मिलकर चुनाव लड़ रही है।

Mahayuti vs MVA

महायुति और महा विकास अघाड़ी के नेता। (AI Edit) (Photo Credit: Sora)

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कभी सोचा है कि धुर विरोधी भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस किसी एक चुनाव के लिए, एक साथ मिलकर लड़ रहे हों? बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं के पोस्टर, एक साथ नजर आ रहे हों, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे एकजुट दिख रहे हों? महाराष्ट्र में यह सच हो रहा है। महाराष्ट्र की 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के लिए 2 दिसंबर को होने वाले चुनावों में कई अप्रत्याशित गठबंधन पैदा हुए हैं, जिन पर लोग यकीन नहीं कर पा रहे हैं।

बीजेपी और कांग्रेस, एक दूसरे के चिर प्रतिद्वंद्वी हैं। स्थापना के बाद से ही दोनों धड़े, अलग-अलग राहों पर चलने वाले हैं लेकिन महाराष्ट्र में कुछ सीट पर दोनों पार्टियां एक हुईं है। साल 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) सियासी दुश्मन हैं।

लोकसभा चुनाव में एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) एक-दूसरे के खिलाफ लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उतर चुकी हैं। दोनों में धुर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है लेकिन दोनों दल, बीजेपी के खिलाफ उतर पड़े हैं। दिलचस्प बात यह है कि महायुति गठबंधन का शिवसेना हिस्सा है, एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस सरकार में डिप्टी सीएम हैं। 

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धुर विरोधी साथ कैसे आ गए हैं?

निकाय चुनाव, स्थानीय समीकरणों पर लड़े जाते हैं। कई जगहों पर दोनों शिवसेना गुटों ने गठबंधन कर लिया है। दोनों दलों के सीनियर नेता इसे स्थानीय तालमेल बता रहे हैं, मतलब साफ है कि विधानसभा और लोकसभा में ऐसा गठबंधन नहीं देखने को मिलेगा। यह स्थानीय गठबंधन है। एकनाथ शिंदे का कदम हैरान करने वाला है कि वह बीजेपी के खिलाफ कई सीटों पर उम्मीदवार उतार रहे हैं, वह भी कभी कांग्रेस से मिलकर, कभी एनसीपी (शरद गुट) के साथ मिलकर। एकनाथ शिंदे ने साल 2022 में उद्धव ठाकरे से अलग होने का फैसला किया था। उन्होंने कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन को बेमेल बताया था। उन्होंने शिवसेना से अलग जाने के फैसले को सही ठहराया था और कहा था कि असली शिवसैनिक उनके साथ हैं। चुनाव में यह साबित भी हुआ। अब खुद वह बेमेल दोस्ती करते नजर आ रहे हैं।  

कैसे हो गया है यह गठबंधन?

एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं। बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर ऐसे गठबंधन बन पड़े हैं। जमीन पर बीजेपी मजबूत हो रही है। स्थानीय जातीय समीकरणों को साधना है तो निकाय चुनावों में पार्टी कैडर को मजबूत करना ही होगा। स्थानीय नेताओं ने बीजेपी को रोकने और मजबूत निर्दलीय पैनलों को टक्कर देने के लिए यह दांव चला है। 

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कहां हुए हैं ऐसे बेमेल गठबंधन?

  • चाकन, पुणे: एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना एक हो गई है। दोनों की लड़ाई बीजेपी से है।
  • कणकवली, सिंधुदुर्ग: एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना एक साथ हैं। बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।
  • उमरगा, धाराशिव: एकनाथ शिंदे की शिवसेना, कांग्रेस के साथ मिलकर बीजेपी के हर्षवर्धन चालुक्य को चुनौती दे रही है।
  • चोपड़ा, जलगांव: एकनाथ शिंदे की शिवसेना और कांग्रेस गठबंधन में हैं, सामने बीजेपी है। 
  • येओला, नासिक: एकनाथ शिंदे की शिवसेना और शरद पवार की शिवसेना एक साथ है। अजीत पवार और बीजेपी गठबंधन के खिलाफ चुनाव लड़ा जा रहा है।
  • डहाणू, पालघर: एकनाथ शिंदे की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी और अजीत पवार की एनसीपी एकजुट, मुकाबला बीजेपी से है।
  • कागल, कोल्हापुर: एनसीपी के दोनों धड़े मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, एकनाथ शिंदे की शिवसेना निशाने पर है।
  • जयसिंगपुर, कोल्हापुर: बीजेपी, कांग्रेस और स्वाभिमानी शेतकरी संघटना एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। एकनाथ शिंदे के खिलाफ जंग है।
  • भागूर, नासिक: बीजेपी, एनसीपी, शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के एक साथ हैं, सबकी लड़ाई एकनाथ शिंदे की शिवसेना से है। 

अब क्या हो सकता है?

स्थानीय गठबंधन, BMC चुनावों में अहम भूमिका निभाएंगे। इसे लिटमस टेस्ट की तरह देखा जा रहा है। महायुति और महा विकास अघाड़ी दोनों दलों की पार्टियां, जमीन पर अपनी ताकत आजमा रहीं हैं। महायुति में तनाव की स्थिति है। एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस की अनबन मुखर हो रही है। 

 

कई शहरों में बीजेपी और शिंदे सेना के बीच सीधे मुकाबले हो रहे हैं। पश्चिमी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के कुछ हिस्सों में बीजेपी और शिंदे की शिवसेना में सीधा मुकाबला है। बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी के भीतर लगातार तनाव बढ़ रहा है।

 

बीजेपी नेताओं का कहना है कि अगर स्थानीय स्तर पर समीकरण साधने हैं तो कुछ जगहों पर दोस्ताना मुकाबले जरूरी हैं। एकनाथ शिंदे के तेवर साफ हैं कि वह कई जगहों पर महायुति के साथ हैं लेकिन अपने कार्यकर्ताओं को अंसतुष्ट नहीं करेंगे। स्थानीय इकाइयों को गठबंधन के लिए स्वायत्तता दी गई है क्योंकि ये जमीनी स्तर के चुनाव हैं।

 

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नतीजे जो भी आएंगे, जीत महायुति की होगी

एकनाथ शिंदे के नेता कई बार सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि निकाय चुनाव के नतीजे, महायुति की जीत के तौर पर ही देखे जाएंगे। अध्यक्ष, महापौर और नगर निगम अध्यक्ष, महायुति के ही होंगे। 

 


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