साल 1984 के दिल्ली के कई इलाकों में सिख विरोधी दंगे हुए थे। इस केस में आरोपी रही सज्जन कुमार को अब दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया है। दिल्ली के जनकपुरी और विकासपुरी में हुए दंगों में सज्जन कुमार पर हत्या का आरोप था। अब कोर्ट ने सज्जन कुमार को इन आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले पर पीड़ितों के परिजन ने रोष प्रकट किया है। पीड़ितों के परिवार का कहना है कि उनके परिवार के 11 लोग मार दिए गए तो कोर्ट ने बरी कैसे कर दिया? लोगों ने अपील की है कि इन लोगों को जेल में बंद किया जाए।

 

यहां यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि 1984 में हुए दंगों के कई मामले कोर्ट में चल रहे हैं। ऐसे 2 मामलों में सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा हुई है और अब तक दो मामलों में बरी भी किया जा चुका है। पीड़ित परिवार मांग कर रहे हैं कि सज्जन कुमार को फांसी दी जानी चाहिए।

 

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भड़क गए पीड़ित परिवारों के लोग

 

कोर्ट में सुनवाई के लिए पहुंचे पीड़ित परिवार की एक महिला ने कहा, 'क्यों बरी किया है? 42 साल हो गए हमें केस लड़ते-लड़ते। हमें तो आस थी कि इंसाफ मिलेगा। उसे उम्रकैद की सजा दी गई थी तो आज क्यों बरी किया है? 18 केस लगे हुए हैं इस पर, दोषी नहीं है तो क्यों बंद था? हमारा परिवार मारा गया। बंद करो इसको। हमारे 11-11 बंदे मारे गए। वह झूठ बोल रहा है। सरकार हमें क्यों गुमराह कर रही है?'

 

 

 

 

एक और महिला ने कहा, 'मेरा नाम मांगी कौर है। मेरे घर के 10 जने गए हैं, हमारे घर में लाशों के ढेर लगे हुए थे। इन्होंने हमारे साथ क्या किया है? ये लोग क्या झूठे हैं? एक इंदिरा गांधी मरी थी, लाखों सिखों का कत्लेआम हो गया। कहते हैं कि वह देश की मां थी, मां थी तो मां थी। हमारे सिखों को क्यों मारा? इसको क्यों फांसी नहीं दी। सज्जन कुमार ने खड़े होकर लोगों को मरवाया। अभी तो गवाह हैं। कब तक बचेगा? हम हाई कोर्ट जाएंगे, सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे।'

 

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उम्रकैद मिली है तो बरी कैसे हुए?


पिछले साल यानी 21 फरवरी 2025 को इसी राउज एवेन्यू कोर्ट ने सज्जन कुमार को सरस्वती विहार इलाके में हुए दंगे के मामले में दोषी पाया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह सजा जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या के मामले में सुनाई गई थी। इससे पहले एक और मामले में सज्जन सिंह को दोषी पाया गया था और उम्रकैद हुई थी। अभी भी सज्जन सिंह तिहाड़ जेल में बंद है और उम्रकैद की सजा चल रही है।

 

दूसरा मामला दिल्ली कैंट की पालम कॉलोनी में 5 सिखों की हत्या और गुरुद्वारा जला देने का था। दिल्ली हाई कोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को इस मामले में सज्जन सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में 3 सिखों की हत्या के एक मामले में भी सज्जन सिंह को बरी किया गया था।

 

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क्या है 1984 दंगा केस?

 

31 अक्तूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही दो बॉडीगार्ड बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने कर दी थी। दोनों सिख थे इसलिए 1 नवंबर से पूरे देश में सिख विरोधी दंगे शुरू हो गए।  राजधानी दिल्ली के कई सिख बहुल इलाकों में लोगों के घरों की पहचान करके उन्हें मार दिया गया। कई सिखों को जिंदा जला दिया गया और गुरुद्वारे तक फूंक दिए गए। इसमें कांग्रेस के नेता सज्जन कुमार और जगदीश टाइटगर जैसे नेताओं पर आरोप लगे और इनके खिलाफ आज भी कई केस चल रहे हैं।