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I-PAC को जिस कंपनी से मिला 13.50 करोड़ का कर्ज, वह कागज और जमीन पर मिली ही नहीं

आई-पैक को मिले 13.50 करोड़ के लोन मामले में नई जानकारी सामने आई है। दस्तावेजों में जिस कंपनी से लोन मिलने का दावा किया गया, वह मौके पर मिली ही नहीं।

I-PAC Loan Case

प्रतीकात्मक फोटो। (AI Generated Image)

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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 8 जनवरी को कोलकाता स्थित इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के दफ्तर और निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी। हालांकि छापे के बीच पश्चिम बंगाल सीएम ममता बनर्जी के वहां पहुंचने पर सियासी हंगामा मच गया था। ईडी ने ममता बनर्जी पर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और अपने साथ सबूत ले जाने का आरोप लगाया था।

 

 I-PAC ने दावा किया था कि उसे 2021 में रामासेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया (पी) लिमिटेड से 13.50 करोड़ रुपये का असुरक्षित लोन मिला था। कंपनी का पता तीसरी मंजिल, अशोक प्लाजा, दिल्ली रोड, रोहतक (हरियाणा) दर्ज है। इंडियन एक्सप्रेस ने जब इस मामले की पड़ताल की रामासेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया (पी) लिमिटेड नाम की कोई कंपनी कागजों पर नहीं मिली। रोहतक के इसी पते पर एक अन्य कंपनी जरूर मिली, लेकिन उसने आई-पैक को कर्ज देने से इनकार कर दिया।

 

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अपनी रिपोर्ट में इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि कंपनी रजिस्ट्रार (ROC) दस्तावेजों के मुताबिक 13 अप्रैल 2015 को पटना में I-PAC का गठन हुआ। सात साल बाद फरवरी 2022 में कंपनी ने अपना पंजीकृत कार्यालय कोलकाता में ट्रांसफर कर लिया। 17 दिसंबर 2021 को I-PAC ने अपने दस्तावेज में बताया कि रोहतक की कंपनी से उसे 2021 में 13.50 करोड़ रुपये का लोन मिला। 27 जून 2025 को एक अन्य जानकारी में I-PAC ने बताया कि उसने 2024-25 में एक करोड़ रुपये चुका दिया। अब 12.50 करोड़ रुपये का ऋण बकाया है।

 

I-PAC ने अपने दस्तावेजों में रोहतक स्थित कंपनी का नाम रामासेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया (पी) लिमिटेड बताया। एक्सप्रेस की जांच में मौके पर कोई कंपनी नहीं मिली। यह भी बताया कि आरओसी रिकॉर्ड में कभी रामासेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया (पी) लिमिटेड नाम की कोई कंपनी अस्तित्व में ही नहीं थी।

रोहतक के पते पर दर्ज मिली एक कंपनी

आधिकारिक रिकॉर्ड में रोहतक के पते पर रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक कंपनी दर्ज थी। इस कंपनी का गठन अक्टूबर 2013 में हुआ और 8 अगस्त 2018 को आरओसी ने कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 248 (1) के तहत इसे भंग कर दिया। मतलब आई-पैक को लोन मिलने से तीन साल पहले ही कंपनी बंद हो गई थी। अखबार से बातचीत में कंपनी के छह शेयरधारकों ने I-PAC को किसी भी तरह का लोन देने से इनकार किया। इस संबंध में अखबार ने I-PAC के निदेशक और चार्टर्ड अकाउंटेंट से ऋणदाता और कर्ज के सोर्स के बारे में जानकारी मांगी। हाालांकि अभी तक कोई जवाब नहीं मिला।

 

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रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के शेयरधारक

  • विक्रम मुंजाल (रोहतक)
  • संदीप राणा (हिसार) 
  • विजेंदर (जींद) 
  • बलजीत जांगड़ा (हिसार)
  • प्रदीप कुमार (हिसार) 
  • जगबीर सिंह (सोनीपत)

किसी भी कंपनी ने लोन की बात नहीं स्वीकारी

सभी छह शेयरधारकों ने I-PAC को किसी भी तरह का लोन देने से इनकार किया। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी को कुछ ही वर्षों में बंद कर दिया गया था। अंग्रेजी अखबार ने उन आठ कंपनियों के आरओसी दस्तावेज की समीक्षा की, जिनके नाम मिलते-जुलते थे। हालांकि किसी ने भी 2021 और उसके बाद 13.50 करोड़ के लेनदेन का जिक्र अपने दस्तावेजों में नहीं किया है। 

 

 

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