सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से जुड़े वायरल ‘शूटिंग’ वीडियो मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे पहले गौहाटी हाई कोर्ट का रुख करें और उसकी अधिकारिता को कमजोर न करें। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हर मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट लाने की प्रवृत्ति चिंताजनक है।

 

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने पूछा कि याचिकाकर्ताओं ने गौहाटी हाई कोर्ट का दरवाज़ा क्यों नहीं खटखटाया? इस बेंच ने कहा, 'हाई कोर्ट की अथॉरिटी को कमतर मत आंकिए… आपको संवैधानिक मर्यादा में रहकर संयम बरतने को कहा जाएगा लेकिन चुनाव से पहले यह एक ट्रेंड बनता जा रहा है।'

 

अदालत ने यह भी जोड़ा कि पर्यावरण और वाणिज्यिक मामलों में पहले ही हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र सीमित हुए हैं और हर विवाद का सीधे सुप्रीम कोर्ट आना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मामले की सुनवाई जल्दी कराने को कहा है। 

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि हिमंत बिस्वा सरमा आदतन और बार-बार ऐसे काम करते हैं, इसलिए अदालत को मामले पर विचार करना चाहिए। बेंच ने अनुरोध अस्वीकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया। इससे पहले 10 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने वाम दलों के नेताओं की एक याचिका पर विचार करने की सहमति जताई थी और कहा था कि चुनाव से पहले कई मुद्दे वास्तविक मतदान से पहले ही लड़े जाते हैं।

 

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विवाद 7 फरवरी को तब शुरू हुआ जब बीजेपी असम के आधिकारिक एक्स हैंडल से एक वीडियो साझा किया गया, जिसके कैप्शन में 'पॉइंट ब्लैंक शॉट' लिखा था। वीडियो में कथित तौर पर सरमा को एक राइफल से निशाना साधते और दो व्यक्तियों की तस्वीर पर गोली चलाते हुए दिखाया गया, जिनमें दोनों स्कल कैप पहने हुए थे। पोस्ट में यह भी लिखा था, 'पहचान, जमीन और जड़ें पहले; पाकिस्तान क्यों गए; बांग्लादेशियों के लिए कोई माफी नहीं।' विपक्षी दलों ने इसे लेकर आपत्ति जताई है। बाद में यह पोस्ट डिलीट कर दिया गया था।

विपक्ष का तीखा हमला, पोस्ट हटाई गई

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कांग्रेस ने वीडियो को 'अत्यंत दुखद और परेशान करने वाला' बताते हुए कहा कि यह 'अल्पसंख्यकों की पॉइंट-ब्लैंक हत्या का महिमामंडन' प्रतीत होता है। पार्टी ने इसे 'जनसंहार की खुली पुकार' करार दिया और जिम्मेदारी तय करने की मांग की। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी इसे महज ट्रोल सामग्री नहीं, बल्कि 'ऊपर से फैलाया जा रहा जहर' बताया। बढ़ते विरोध के बीच बीजेपी ने पोस्ट हटा दी।

 

इस बीच, सीपीआई(एम) और सीपीआई नेता एनी राजा ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर सरमा के खिलाफ धार्मिक पहचान और नफरत भरे भाषण के आरोप में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। अब मामले की अगली सुनवाई गुवाहाटी हाई कोर्ट में होने की संभावना है।