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रामविलास को ‘बेचारा’ कहने पर बवाल, 85 फीसदी आरक्षण पर बिहार में हंगामा

लोक जनशक्ति के विधायक, बिहार विधानसभा के बाहर राष्ट्रीय जनता दल के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। उन्होंने अपने नेता राम विलास पासवान के अपमान का आरोप लगाया है।

Bihar Vidhan Sabha Protest

बिहार विधानसभा प्रोटेस्ट । Photo Credit : ANI

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बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के 10वें दिन सोमवार को सदन में जमकर हंगामा देखने को मिला। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक भाई वीरेंद ने लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक राम विलास पासवान को ‘बेचारा’ कह दिया। बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों ने उनकी इस बात का विरोध किया और आरजेडी के खिलाफ नारेबाजी की। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक राजू तिवारी ने इस टिप्पणी को दलितों का अपमान बताया है। जिसके बाद सदन में भारी हंगामा हुआ और कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

 

हंगामे की शुरुआत तब हुई जब लोक जनशक्ति पार्टी के विधायक राजू तिवारी ने सदन में खड़े होकर कहा कि रामविलास पासवान ने छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है और 50 साल लंबा राजनीतिक जीवन जिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनता दल उनके सम्मान को ठेस पहुंचा रही है। राजू तिवारी ने राष्ट्रीय जनता दल विधायकों की ओर इशारा करते हुए तीखी टिप्पणी की, जिस पर विपक्षी सदस्य, भाई वीरेंद्र समेत कई विधायक, अपनी-अपनी सीटों से खड़े हो गए और विरोध जताने लगे। उसके बाद नारेबाजी शुरू हो गई।

रामविलास पासवान को बताया देश का दूसरा अंबेडकर

कार्यवाही शुरू होते ही लोक जनशक्ति पार्टी के विधायकों ने सदन में ‘रामविलास पासवान जिंदाबाद’ के नारे लगाए। पोस्टरों के जरिए उन्हें ‘देश का दूसरा आंबेडकर’ बताया गया और राष्ट्रीय जनता दल पर दलितों के अपमान का आरोप लगाया गया। सत्ता पक्ष के विधायकों का कहना था कि ‘बेचारा’ शब्द का इस्तेमाल एक दलित नेता की गरिमा के खिलाफ है।

 

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'बेचारा' शब्द पर बढ़ा विवाद 

राष्ट्रीय जनता दल विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि ‘बेचारा’ शब्द में कोई अपमानजनक अर्थ नहीं है और सरकार मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इसे तूल दे रही है। उन्होंने कहा कि आज सदन में इस विषय पर जोरदार बहस होगी और विपक्ष 'आर-पार' के मूड में है। राष्ट्रीय जनता दल के अन्य नेताओं ने भी कहा कि किसी व्यक्ति के लिए ‘बेचारा’ शब्द का प्रयोग दलित समुदाय के अपमान के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

भाई वीरेंद्र, विधायक, मनेर:-
आरजेडी के विधायक कुमार सर्वजीत हमारी पार्टी के नेता हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि बेचारा इसलिए कहा गया है कि अगर वह बेचारे होते तो जिस तरह यह सरकार आरक्षण विरोधी है, गरीबों के साथ अन्याय हो रहा है। वह नहीं होता। वह आज भी उस बात पर कायम हैं। बेचारा शब्द कोई असंसदीय नहीं है।

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विवाद की जड़ पिछले दिनों की उस टिप्पणी से जुड़ी है, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल विधायक सर्वजीत ने सदन में रामविलास पासवान को ‘बेचारा’ कहा था। इसके विरोध में रविवार को लोक जनशक्ति पार्टी कार्यकर्ताओं ने विपक्ष के नेता तेजश्वी यादव का पुतला फूंका था। सोमवार को भी सदन में विधायकों ने पोस्टर और नारेबाजी के जरिए विरोध प्रदर्शन किया।

85 फीसदी आरक्षण की मांग पर विपक्ष का प्रदर्शन

विधानसभा में राष्ट्रीय जनता दल के विधायकों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर प्रदर्शन किया। विपक्ष ने नितीश कुमार सरकार को ‘आरक्षण विरोधी’ बताते हुए 85 फीसदी आरक्षण लागू करने की मांग की है। ‘85 फीसदी आरक्षण देना होगा’ और ‘सरकार जवाब दो’ जैसे नारों से परिसर गूंजता रहा। विपक्ष का आरोप था कि सरकार सामाजिक न्याय के मुद्दे से ध्यान भटका रही है।

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