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आवारा कुत्तों का जिक्र कर वेटरनरी काउंसिल की मांग क्यों करने लगे मोहन भागवत?

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में एक कॉलेज में आवारा कु्त्तों के मुद्दे पर बात रखते हुए वेटरनरी काउंसिल की मांग की। उन्होंने वेटरनरी डॉक्टरों की भूमिका को अहम बताया।

RSS chief Mohan Bhagwat

संघ प्रमुख मोहन भागवत, Photo Credit: PTI

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पिछले कुछ समय से भारत में आवारा कुत्तों को लेकर काफी बवाल हो रहा है। मामला सुप्रीम कोर्ट से सड़कों तक हर जगह फैला हुआ है। इस बीच अब राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को कुत्तों और अन्य पालतु जानवरों और पशुओं पर अपनी बात रखी। एक कॉलेज में अपनी स्पीच के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि कुत्तों को लेकर जो विवाद चल रहा था उसमें वह बीच के रास्ते की पैरवी कर रहे थे। इसके साथ ही उन्होंने इंसानों और पशुओं के मिलजुलकर रहने की वकालत की और किसानों के लिए पशुओं के महत्व पर भी प्रकाश डाला। 

 

 इंडियन सोसाइटी फॉर एडवांसमेंट ऑफ कैनाइन प्रैक्टिस और महाराष्ट्र एनिमल एंड फिशरी साइंसेज यूनिवर्सिटी (MAFSU) में आयोजित एक कार्यक्रम में संघ प्रमुख शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में उन्होंने पशु डॉक्टरों यानी वेटरनरी डॉक्टरों की समाज में भूमिका को अहम बताया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जानवरों से जुड़े फैसले वेटरनरी डॉक्टों और एक्सपर्ट्स के मार्गदर्शन में लेने चाहिए। 

 

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कुत्तों मे मुद्दे पर क्या बोले?

मोहन भागवत ने अपने भाषण की शुरुआत में ही कहा कि उन्होंने इसी कॉलेज से पढ़ाई की है और वह एक छात्र के रूप में आज बात कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने वेटरनरी क्षेत्र करीब 50 साल पहले छोड़ दिया है। संघ प्रमुख ने लावारिस कुत्तों को लेकर हुए बवाल का जिक्र करते हुए कहा कि वह बहस दो चरम सीमाओं पर पहुंच गई थी। उन्होंने कहा, 'एक पक्ष कह रहा था कि सभी कुत्तों को मार दो, दूसरा कह रहा था कि उन्हें छुओ भी मत लेकिन अगर इंसानों को कुत्तों के साथ रहना है, तो यह सोचना होगा कि कैसे साथ रहें।'

कुत्तों की समस्या का क्या हल?

मोहन भागवत ने अपने भाषण में आवारा कुत्तों की समस्या पर अपनी बात रखी और इसका हल भी बताया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को हल करने के लिए बीच का रास्ता निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा,  'कुत्तों की संख्या नसबंदी के जरिए कंट्रोल की जा सकती है। इंसानों के लिए खतरा कम करने के कई उपाय हैं। यह भावनाओं से नहीं, ज्ञान से निकले समाधान हैं।'

वेटरनरी काउंसिल की मांग 

मोहन भागवत ने इस कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए वेटरनरी डॉक्टर की अहमियत पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने एक खास मांग भी की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में संस्थागत सुधार होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अलग वेटरिनरी काउंसिल होनी चाहिए। मेरा  विश्वास है कि यह जरूरी है। जानवरों से जुड़े फैसले उन्हीं के हाथ में होने चाहिए जो इस विषय को समझते हैं।' उन्होंने कहा कि जिस तह खेल को खिलाड़ी बेहतर तरीके से समझता है इसी तरह जानवरों को एक , 'अलग वेटरिनरी काउंसिल होनी चाहिए। मेरा दृढ़ विश्वास है कि यह जरूरी है। जानवरों से जुड़े फैसले उन्हीं के हाथ में होने चाहिए जो वेटरनरी डॉक्टर अच्छे से समझता है। 

 

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किसानों के जीवन में पशुओं का रोल

मोहन भागवत ने कहा कि वेटरनरी डॉक्टर का रोल जितना समझा जाता है उससे अधिक है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश को तब तक लाभ मिल रहा है जब तक किसान कृषि के साथ पशुपालन भी कर रहा है। संघ प्रमुख ने वेटरनरी प्रोफेशन के दायरे को सीमित मानने की सोच को गलत बताते हुए कहा कि पहले माना जाता था कि वेटरनरी डॉक्टरों की भूमिका सीमित है लेकिन यह सोच सही नहीं है। उन्होंने कहा कि वेटरनरी डॉक्टर की भूमिका समाज, जनस्वास्थय और नीति निर्माण में अहम है। 

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