केंद्र सरकार ने शनिवार को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बड़ी राहत दी। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत उनकी हिरासत रद्द कर दी गई है। 170 दिनों बाद वह जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए हैं।

सोनम वांगचुक को सितंबर 2025 में लद्दाख में भड़की हिंसा के बाद गिरफ्तार किया गया था। लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद उन पर NSA लगाया गया था। आंदोलन में भड़की हिंसा के दौरान 4 लोगों की मौत हो गई थी। उन पर हिंसक प्रदर्शन को उकसाने के आरोप लगे हैं। 

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सोनम वांगचुक की रिहाई से टलेगा बंद?

सोनम वांगचुक की रिहाई के बाद भी लद्दाख के लोग 16 मार्च को होने वाले विरोध प्रदर्शनों को जारी रखेंगे। कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) और लेह एपेक्स बॉडी (ABL) ने कहा है कि सोनम वांगचुक की रिहाई से खुशी है, लेकिन लद्दाख की मुख्य मांगें पर उनकी मांगे नहीं सुनी गईं है। 

लद्दाख के लोग पूर्ण राज्य का दर्जा चाहते हैं। उनकी मांग है कि लद्दाख को छठवीं अनुसूची के तहत संरक्षण दिया जाए। केंद्र सरकार से बातचीत में देरी हो रही है, इसलिए प्रदर्शन रद्द नहीं होगा।

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लद्दाख में आंदोलन क्यों शुरू हुआ है?

लद्दाख में 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया था।। लोग केंद्र के सीधे शासन से नाखुश हैं। लद्दाख में कोई विधानसभा नहीं है। 2023 में गृह मंत्रालय ने हाई पावर्ड कमिटी बनाई थी, जिसमें संस्कृति, भाषा और रणनीतिक महत्व को देखते हुए संवैधानिक सुरक्षा देने की बात थी। लद्दाख के लोग जो चाहते थे, वह नहीं मिला।

ABL और KDA जैसी संस्थाएं चाहती क्या हैं?

  • लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा
  • छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा
  • लद्दाख के युवाओं के लिए नौकरियों में आरक्षण
  • लेह-कारगिल के लिए अलग-अलग संसदीय सीटें

लद्दाख के लिए छठवीं अनुसूची की मांग इसलिए भी हो रही है क्योंकि राज्य की 90 फीसदी से ज्यादा आबादी अनुसूचित जाति की है। 

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फरवरी में हुई बैठक का हल क्या निकला?

सरकार ने फरवरी 2026 में बैठक बुलाई थी। यह बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म हुई थी। बैठक दोबारा हो ही नहीं पाई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार देरी कर रही है। लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है। साल 2024-2025 में भी कई बड़े प्रदर्शन हुए थे। ये प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। अब एक बार फिर 16 मार्च को लोग प्रदर्शन करने वाले हैं।