लद्दाख को अभी पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा। लद्दाख को भारतीय संविधान की छठवीं अनुसूची में शामिल भी नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि लद्दाख को छठी अनुसूची (Sixth Schedule) का दर्जा या पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जाएगा। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) महीनों से यह मांग कर रहे हैं।
दिल्ली में पिछले हफ्ते 4 फरवरी को गृह मंत्रालय की हाई-पावर्ड कमिटी से बातचीत के बाद लद्दाख के नेताओं ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह बात कही है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है कि केंद्र सरकार ने इसके बजाय एक 'टेरिटोरियल काउंसिल' मॉडल का प्रस्ताव दिया है।
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क्या है टेरिटोरियल काउंसिल मॉडल?
लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (LAHDC) के चीफ एग्जीक्यूटिव काउंसलर को मुख्यमंत्री और डिप्टी चीफ एग्जीक्यूटिव काउंसलर को उप-मुख्यमंत्री बनाने की बात है। KDA के सह-अध्यक्ष असगर अली करबली ने कारगिल में एक सभा में कहा कि वे इसे मजाक समझते हैं। LAB और KDA ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस के एक सदस्य कुंनजेस डोल्मा ने केंद्र से सहमति जताई है।
KDA के को-चेयरमैन असगर अली करबलाई ने कहा, 'हम इसे मजाक कहते हैं। LAB और KDA ने इसे मना कर दिया, सिवाय एक KDA मेंबर, कुनजेस डोल्मा के। डोल्मा ने पहले KDA के एजेंडा को समर्थन दिया था और उन्हें बातचीत के लिए मेंबर के तौर पर नॉमिनेट किया गया था। उन्होंने हाई-पावर्ड कमेटी को बताया कि उन्हें हटाने की साजिश रची गई थी और वह लद्दाख के लिए केंद्र शासित प्रदेश के दर्जे से खुश हैं।'
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असगर अली करबलाई, KDA, को-चेयरमैन:
हम किसी को भी, चाहे डोल्मा हों या कोई और, लद्दाखी पहचान से खिलवाड़ नहीं करने देंगे।
बैठक में क्या हुआ?
कुनजेस डोल्मा के अलग रुख की वजह से उनके खिलाफ नारे लगे हैं। लद्दाख में लोग पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग कर रहे हैं। वह सितंबर 2025 में लेह में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने से जुड़े मामले में जेल में हैं।
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नतीजा क्या निकला?
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की अध्यक्षता वाली कमिटी से बातचीत के बाद करबलाई और लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन के अध्यक्ष त्सेरिंग डोरजे लक्रूक ने इसे बेनतीजा बताया था। जब उन्होंने छठी अनुसूची और राज्य का दर्जा फिर से मांगा तो उन्होंने दावा किया कि गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि छठी अनुसूची अब निष्क्रिय और कमजोर हो गई है। करबलाई ने इसका विरोध किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कई बार इसे मजबूत संवैधानिक सुरक्षा बताया है। अगर यह पूर्वोत्तर राज्यों में प्रभावी है तो लद्दाख के लिए अचानक कमजोर क्यों है?
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केंद्र सरकार क्यों लद्दाख को नहीं देना चाहती है राज्य का दर्जा?
सरकार का तर्क है कि लद्दाख में पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं हैं। करबलाई ने कहा कि वह अपने वकीलों के जरिए बताना चाहते हैं कि क्यों पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। केंद्र सरकार के अधिकारियों ने मना कर दिया। करबलाई का तर्क है कि कोई भी भारतीय राज्य ऐसा नहीं है, जिसमें सारे संसाधन खुद के हों। LAB और KDA एकजुट रहकर छठी अनुसूची का दर्जा और पूर्ण राज्य का दर्जा मांगते रहेंगे, क्योंकि ये उनकी मुख्य मांगें हैं।
