कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) संस्थापक अभिजीत दीपके ने युवाओं, छात्रों और अपने समर्थकों से कहा है कि आशुतोष रांका और सौरभ दास के जेल में जाने से आंदोलन कमजोर नहीं पड़ेगा। आप लोग अपना ध्यान रखिए, वे योद्धा हैं, वहां से बाहर आएंगे, आंदोलन फिर शुरू होगा।
अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों के नाम एक वीडियो संदेश जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका के जेल में होने से आंदोलन कमजोर नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'हम डरेंगे नहीं। डरना नहीं है, हम क्यों डरें? हम कोई गलत काम थोड़ी ना कर रहे हैं।'
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'अघोषित आपातकाल लग चुका है देश में'
सौरभ दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर मंतर में बैरिकेड पार करने पर हिरासत में लिया गया था। अगले दिन अदालत ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि जंतर मंतर अब आधिकारिक प्रदर्शन स्थल नहीं है और दोनों ने रोक के आदेश तोड़े। अभिजीत दीपके ने इसे 'अघोषित आपातकाल' बताया है।
'दीपावली तक अपने परिवार के साथ समय बिताएं'
अभिजीत दीपके ने समर्थकों से अपील की है कि कुछ दिन अपने परिवार के साथ समय बिताएं। उन्होंने कहा कि त्योहार आने वाले हैं और हाल की घटनाओं से परिवार चिंतित होंगे। उनके मुताबिक आंदोलन का रास्ता शांति, प्रेम और करुणा का है। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले चाहते हैं कि कार्यकर्ता भड़कें और नफरत से जवाब दें। उन्होंने कहा, 'हमें यह भी तय करना है कि वह नफरत हमारे अंदर ना आए।'
क्यों अभिजीत दीपके ने यह अपील की है?
अभिजीत दीपके ने कहा कि हाल के 10-12 दिनों में कई वालंटियर को सड़कों पर पीटा गया और हिरासत में लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि हिरासत में उन्हें काफी तकलीफ दी गई। उन्होंने बताया कि सौरभ दास की मां और आशुतोष के परिवार से उनकी बात हुई है।
अभिजीत दीपके से दोनों परिवारों ने कहा कि चिंता न करें। आशुतोष के एक अंकल का जेल में रहने के दौरान निधन हो गया और आशुतोष उसमें शामिल नहीं हो पाए। अभिजीत दीपके ने कहा कि वह आंदोलन के नेता नहीं हैं और सौरव और आशुतोष के कहने पर काम करते थे। उन्होंने खुद को भी दो दिन जेल में रखे जाने की बात कही और कहा कि वे डरे नहीं हैं।
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क्या फ्रांस और नेपाल जैसा CJP का मकसद है?
अभिजीत दीपके ने कहा, 'जो लोग फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश का उदाहरण देते हैं, उन्हें देखना चाहिए कि भारत में कार्यकर्ता हंसते हुए जेल गए और भड़के नहीं। यह आंदोलन महात्मा गांधी के मूल्यों और बाबासाहेब आंबेडकर के दिए संविधान के रास्ते पर चलेगा। भावनाएं कमजोरी नहीं, ताकत हैं।' अभिजीत दीपके ने समर्थकों से जेल में बंद दोनों साथियों को त्योहार के समय याद रखने की अपील की।
