शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद एक बार फिर से विवादों में हैं। इस बार वह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में स्नान के लिए पहुंचे थे लेकिन उनके शिष्यों संग हुई मारपीट के बाद वह धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने आरोप लगाए हैं भगदड़ कराकर उन्हें मारने की साजिश रची गई है। पिछले साल महाकुंभ के समय भी वह खूब चर्चा और विवादों में रहे थे। कभी वह राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर सवाल उठाते हैं तो कभी संत समाज का ही निशाना बनते हैं। कई बार तो उनके शंकराचार्य होने पर ही सवाल उठा दिए जाते हैं, जिसका जवाब वह अपने तर्कों के हिसाब से देते हैं।
कभी इन्हीं अविमुक्तेश्वरानंद को 'कांग्रेस का एजेंट' बताया जाता है तो कभी यही अविमुक्तेश्वरानंद राहुल गांधी के बारे में कहते हैं कि वह तो हिंदू ही नहीं हैं। उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के विवादों में रहने की वजह उनकी राजनीतिक टिप्पणियां भी हैं। हाल ही में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि वह बिहार में अपने उम्मीदवार भी उतारेंगे। आइए समझते हैं कि आखिर अविमुक्तेश्वरानंद कौन हैं और इतने विवादों में क्यों रहते हैं।
नया विवाद क्या है?
मौनी अमावस्या के मौके पर अविमुक्तेश्वरानंद संगम स्नान के लिए माघ मेला क्षेत्र प्रयागराज पहुंचे थे। उनके समर्थक और शिष्य जब उनकी सवारी लेकर घाट की ओर जा रहे थे तभी प्रशासन ने उन्हें रोका। इसी को लेकर विवाद हुआ और जमकर धक्का-मुक्की हुई। आरोप लगे हैं कि पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ मारपीट की। उन्होंने कहा कि जब संतों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाएगा तो वह स्नान नहीं करेंगे।
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इस पर प्रशासन ने कहा, 'शंकराचार्य के शिष्य एक साथ संगम नोज जाने की कोशिश कर रहे थे जबकि प्रशासन ने उनसे छोटे समूहों में जाने को कहा।' आखिर में अविमुक्तेश्वरानंद नाराज हो गए और बिना स्नान किए ही वापस लौट गए।
शंकराचार्य हैं भी या नहीं?
अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर पहला विवाद तो यह है कि वह शंकराचार्य हैं या नहीं? दरअसल, सनातन में आदि शंकराचार्य के चार मठ हैं। बद्रीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम और पुरी। इन चारों में एक-एक शंकराचार्य होते हैं। अविमुक्तेश्वरानंद बद्रीनाथ के ज्योतिर्मठ से संबंधित हैं। 11 सितंबर 2022 को स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का निधन हुआ था। तब वही इस पीठ के शंकराचार्य थे। उनकी वसीयत के आधार पर स्वरूपानंद के निजी सचिव सुबोधानंद महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य घोषित किया था।
हालांकि, संन्यासी अखाड़े और अन्य अखाड़ों ने उन्हें शंकराचार्य मानने से इनकार कर दिया। तब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का कहना था कि अविमुक्तेश्वरानंद की नियुक्ति नियमों के खिलाफ हुई है। हालांकि, इन विवादों के बावजूद वह इस पीठ का जिम्मा संभाल रहे हैं और ज्योतिर्मठ का प्रतिनिधित्व भी वही करते हैं।
मोदी की खुलकर आलोचना
अपने गुरु स्वरूपानंद सरस्वती की तरह ही अविमुक्तेश्वरानंद भी राजनीतिक रूप से खूब सक्रिय रहते हैं। साल 2024 में जब राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होनी थी, तब अविमुक्तेश्वरानंद इसके खिलाफ थे। उन्होंने इसके बहाने पीएम नरेंद्र मोदी की भी आलोचना की थी। उनका तर्क था कि सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए आधे-अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कराई जा रही है। वह खुद को 'मोदी विरोधी' कहना स्वीकार नहीं करते लेकिन ज्यादातर मौकों पर आलोचना करते जरूर नजर आते हैं।
वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण कार्य के दौरान जब तमाम घरों को तोड़ा गया था और उन घरों से निकले विग्रहों की तस्वीर सामने आई थी तब अविमुक्तेश्वरानंद ने पीएम मोदी की खूब आलोचना की थी। इसी मामले में उन्होंने 'मंदिर बचाओ, धरोहर बचाओ' यात्रा भी शुरू की थी।
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लाठी के हुए थे शिकार
साल 2015 की बात है। वाराणसी प्रशासन ने अनुमति दी थी कि गणेश प्रतिमा को लक्ष्मी कुंड में विसर्जित किया जा सकता है। हालांकि, संत समाज इसे गंगा में विसर्जित करना चाहता था। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ जाकर अविमुक्तेश्वरानंद और तमाम साधु संत विसर्जन करने आगे बढ़े थे। इसी के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया था। इसमें अविमुक्तेश्वरानंद समेत दर्जनों साधु-संत घायल हुए। लंबे चले गतिरोध के बाद लाठीचार्ज करके ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाया था। इस लाठीचार्ज का वीडियो कई बार अलग तथ्यों के साथ शेयर भी किया जाता है।
इस वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही पुलिस अविमुक्तेश्वरानंद को लाठी मारती है, वह दोनों हाथ फैलाकर खड़े हो जाते हैं और कहते हैं- मारो मुझे।
महाकुंभ में क्या हुआ था?
पिछले साल महाकुंभ के दौरान भी अविमुक्तेश्वरानंद खूब चर्चा में आए थे। महाकुंभ में स्नान के दौरान संगम पर हुई भगदड़ में कई लोगों की जान चली गई थी। उन्होंने आरोप लगाए थे कि सरकार को पूरे मामले की जानकारी थी लेकिन इस मामले को शाम तक छिपाया गया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस्तीफा भी मांगा था। धर्म संसद के दौरान उन्होंने एक प्रस्ताव भी पास करवाया था जिसमें योगी आदित्यनाथ से इस्तीफा देने की मांग की गई थी।
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तब अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था, 'ये लोग काबिल नहीं हैं। इन्होंने संत समाज के साथ धोखा किया और भगदड़ की बात को अफवाह बताया। हमने इनकी बात पर भरोसा कर लिया और मृत आत्माओं की शांति के लिए मौन रखे बिना ही हमने शाही स्नान कर लिया। यह बहुत दुखद है। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री समेत बीजेपी अध्यक्ष को चाहिए कि वे सीएम योगी आदित्यनाथ तो पद से हटा दें।'
