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अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों को प्रयागराज में पुलिस ने पीट क्यों दिया?

ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरोप लगया है कि उनके शिष्यों से प्रयागराज में पुलिस ने बदसलूकी की है। उन्होंने संगम में बिना स्नान किए अपनी पालकी लौटा ली। अब हंगामा हो रहा है।

Swami Avimukteshwaranand Saraswati

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। Photo Credit: PTI

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ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन, शिष्यों से कथित बदसलूकी के बाद अपनी पालकी लौटा ली है। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि उनके शिष्यों को जानबूझकर पुलिस ने पीटा है, उन्हें उठाया गया है। उन्होंने कहा है कि उनकी आंखों के सामने शिष्यों को चुन-चुनकर मारा गया है। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि यह सनातन धर्म का अपमान है। 

अब अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या पर संगम स्नान करने का फैसला टाल दिया है। वह संगम नोज की तरफ आगे बढ़ रहे थे, अब आधे रास्ते से पालकी अपने अखाड़े में लौटा ली। उन्होंने आरोप लगाया है कि यूपी सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता ने शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की की, जिसके बाद हंगामा बढ़ा और पुलिस ने शिष्यों को पीट दिया।

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क्यों संगम स्नान नहीं करेंगे अविमुक्तेश्वरानंद?

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, 'मेरे शिष्यों को मारा जा रहा है। अधिकारी मार रहे हैं, मैं स्नान नहीं करूंगा। मैंने अपनी आंखों से देखा है कि पुलिसकर्मी डंडे बरसा रहे हैं। उन्हें मेले से उठाया जा रहा है, बदसलूकी की जा रही है।'

अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पर प्रशासन ने क्या कहा?

प्रयागराज डिवीजन की डिविजनल कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने इस मामले पर शंकराचार्य की आलोचना की है। उन्होंने कहा, 'स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, परंपराओं के खिलाफ और बिना किसी इजाजत के, करीब 200 फॉलोअर्स के साथ रथ पर बैठकर 'स्नान' करने आए थे। संगम पर बहुत भीड़ थी और उनके फॉलोअर्स ने बैरिकेड तोड़ दिया। करीब 3 घंटे तक वापसी का रास्ता जाम कर दिया। इसकी वजह से आम नागरिकों को बहुत परेशानी हुई। कोई भी हादसा हो सकता था।'

प्रयागराज पहुंचे लाखों श्रद्धालु

प्रयागराज के माघ मेला में मौनी अमावस्या पर देशभर से लाखों श्रद्धालु संगम नहाने पहुंचे हैं। PTI की एक रिपोर्ट के मुताबिक रविवार को मौनी अमावस्या पर सुबह आठ बजे तक 1.3 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई है। प्रयागराज में शनिवार रात 12 बजे से ही स्नान करने के लिए लोगों का गंगा और संगम क्षेत्र में आना जारी है। मकर संक्रांति के अवसर पर 1.03 करोड़ जबकि एकादशी पर लगभग 85 लाख लोगों ने गंगा और संगम में स्नान किया था।

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माघ मेले के इंतजाम क्या हैं?

मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि श्रद्धालुओं को सही रास्ता दिखाने के लिए मेला प्रशासन ने खंभों पर रिफ्लेक्टिव टेप लगाए हैं और नागरिक सुरक्षा स्वयं सेवक भी श्रद्धालुओं का की मदद कर रहे हैं। माघ मेला 800 हेक्टेयर क्षेत्र में सात सेक्टरों में लगाया गया है। मेला क्षेत्र में 25,000 से अधिक शौचालय बनाए गए हैं और 3500 से अधिक सफाईकर्मी तैनात हैं।

कम दिनों तक कल्पवास करने के इच्छुक लोगों के लिए माघ मेला में टेंट सिटी बनाई गई है। ध्यान और योग की सुविधाएं यहां दी जा रहीं हैं। श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए बाइक टैक्सी और गोल्फ कार्ट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

10 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी संभाल रहे हैं सुरक्षा

पुलिस अधीक्षक (माघ मेला) नीरज पांडेय ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए पूरे मेला क्षेत्र में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं। उन्होंने कहा कि भीड़ प्रबंधन और बेहतर ट्रैफिक के लिए 42 अस्थायी पार्किंग बनाए गए हैं। माघ मेला 2025-26 में कुल 12,100 फुट लंबे घाटों का निर्माण किया गया है। 

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