अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ को लेकर संबंध तनावपूर्ण हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, आए दिन ऐसे कई आपत्तिजनक दावे कर रहे हैं, जिनकी वजह से केंद्र सरकार की आलोचना हो रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने अब नई धमकी दी है कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करेंगे, उन पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया जाएगा। अमेरिकी टैरिफ के बढ़ते जवाब के बीच, अमेरिकी सांसदों ने भारत से गुहार लगाई है कि सरकार पीली दालों पर लगाए गए टैक्स कम कर दे।
दो अमेरिकी राज्यों के सांसदों ने भारत के साथ व्यापार तनाव को लेकर डोनाल्ड ट्रंप को नया सुझाव दिया है। मोंटाना के रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डेन्स और नॉर्थ डकोटा के केविन क्रेमर ने ट्रंप से भारत से अमेरिकी दालों के इंपोर्ट पर लगाए जाने वाले टैरिफ को कम करने के लिए भारत पर दबाव डालने की अपील की है। दुनिया ट्रंप से टैरिफ पर राहत मांग रही है, अमेरिकी सांसद, भारत से टैरिफ में राहत की मांग कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें: नई धमकी: ग्रीनलैंड पर जो अमेरिका से सहमत नहीं उस पर टैरिफ लगाएंगे ट्रंप
भारत पर 50 फीसदी टैरिफ, 30 पर ही बेचैन अमेरिका
अमेरिकी राष्ट्रपति को लिखे एक लेटर में, सीनेटरों कहा है कि मोंटाना और नॉर्थ डकोटा दालों की फसलों के शीर्ष उत्पादक हैं। भारत दुनिया की कुल खपत का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल करता था। दोनों सांसदों का कहना है कि भारत ने पीली दालों पर टैक्स बढ़ा दिया है, जिसकी वजह से उनका व्यापार प्रभालित होता है।
अमेरिकी सांसदों का कहना है कि भारत ने पीली दाल पर 30 फीसदी टैक्स लगा दिया है। नवंबर 2025 में एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप दुनियाभर पर टैरिफ थोप रहे थे, दूसरी तरफ भारत ने टैरिफ बढ़ा दिया। डोनाल्ड ट्रंप, दुनियाभर में मनमाने तरीके से टैरिफ थोप रहे हैं, अब दाल पर भारतीय टैरिफ की मार पड़ी तो अमेरिकी सांसदों को यह खटक रही है।
यह भी पढ़ें: एलन मस्क के बच्चे की मां ने ग्रोक के खिलाफ क्यों दायर किया मुकदमा?
क्या कह रहे हैं अमेरिकी सांसद?
भारत के गैर वाजिब टैरिफ की वजह से अमेरिकी दाल उत्पादकों को व्यापार में बड़ा नुकासन हो रहा है। उन्हें महंगी दरों पर टैक्स देना पड़ रहा है। अमेरिकी सांसदों का कहना है कि अब डोनाल्ड ट्रंप, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव बनाएं कि टैरिफ कम करें।
अमेरिकी सांसदों का कहना है कि अगर टैरिफ कम हुआ तो अमेरिकी उत्पादकों और भारत में उपभोक्ताओं दोनों के लिए फायदेमंद होगा। चिट्ठी में कहा गया है कि अमेरिका व्यापार में असमानताओं को ठीक करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी किसान इस कमी को पूरा करने में मदद करने के लिए तैयार हैं।
यह भी पढ़ें: 'मचाडो ने मेरे काम के लिए नोबल दिया', वेनेजुएला की नेता विपक्ष पर फिदा ट्रंप
भारत ने टैरिफ क्यों लगाया था?
भारतीय किसानों की मांग पर यह कदम उठाया गया था। सस्ते विदेशी आयात की वजह से घरेलू दालों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आ गए थे। चना, अरहर, मूंग, उड़द जैसी दालें, अमेरिका बेचता है। भारत कनाडा, रूस, ऑस्ट्रेलिया से भी दाल खरीदता है। किसानों को इसकी वजह से घाटा हो रहा था। सरकार ने सस्ते आयात को रोककर घरेलू दालों की कीमतों को स्थिर करने और किसानों की आय बढ़ाने का फैसला किया था।
यह भी पढ़ें: चुनाव होता है, PM होते हैं, फिर स्पेन में रानी का शासन कैसे आ गया?
टैरिफ पर भारत और अमेरिका में चल क्या रहा है?
नॉर्थ डकोटा और मोंटाना के सांसद भारत के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि टैरिफ 30 फीसदी से कम किया जाए, जिससे किसानों को राहत मिले। अमेरिका ने भारत पर पहले से ही 50 फीसदी टैरिफ रूस के साथ व्यापार को लेकर लाद दिया है। भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर बातचीत जारी है, आम सहमति नहीं बन पाई है।
अमेरिका के व्यापार मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने दावा किया कि समझौता लगभग तय था लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्रंप को फोन नहीं किया, इसलिए डील फेल हो गई। भारत ने इस दावे को खारिज किया है कि और कहा कि दोनों नेता 2025 में 8 बार बात कर चुके हैं। भारत, अमेरिका के साथ संतुलित समझौता कर सकता है।
