यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर इंडिया (UDISE+) के मुताबिक देश में 14.71 लाख से ज्यादा स्कूल हैं। इन स्कूलों में, सरकारी स्कूलों की संख्या 10.13 लाख है। सरकारी और प्राइवेट दोनों स्कूलों को मिलाकर, 24.69 करोड़ से ज्यादा छात्र पढ़ाई करते हैं। 24.69 करोड़ छात्रों पर सिर्फ 1.01 करोड़ शिक्षक हैं। 

नीति आयोग ने अपी रिपोर्ट 'स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया' में कहा है कि इन स्कूलों में 7 प्रतिशत स्कूल ऐसे हैं, जहां सिर्फ 1 शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है। देश के कई दूर-दराज और कम आबादी वाले इलाकों में स्कूल अभी भी सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। 

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7 प्रतिशत स्कूल, सिर्फ 1 शिक्षक के सहारे 

UDISE+ 2024-25 आंकड़ों के अनुसार, पूरे देश में 1,04,125 स्कूल केवल एक शिक्षक के साथ चल रहे हैं। यह कुल स्कूलों का 7 प्रतिशत से ज्यादा है। नीति आयोग ने खुद माना है कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाए, यह मुश्किल है। 

एक शिक्षक, लेकिन जिम्मेदारियां कई 

7 फीसदी इन स्कूलों में इकलौते शिक्षक को कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। अलग-अलग कक्षाओं को पढ़ाना, प्रशासनिक काम, मिड-डे मील बनवाना, रिकॉर्ड रखना, अभिभावकों से संपर्क करना और कई दूसरे लिपिक स्तरीय काम करना पड़ता है। ज्यादातर स्कूलों में मल्टी-ग्रेड क्लासरूम चलते हैं, यानी अलग-अलग कक्षा के बच्चे एक साथ बैठते हैं। इससे शिक्षक का ध्यान बंट जाता है और हर कक्षा के बच्चों को उचित समय नहीं मिल पाता।

देश के 7,993 स्कूलों में कोई एडमिशन नहीं 

UDISE+ की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 7,993 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें एक भी नामाकंन नहीं हुआ है। ऐसे स्कूलों में 20,817 शिक्षक तैनात हैं, जिन्हें बिना काम के वेतन मिल रहा है। देश में एक एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या 1,04,125 है। इन स्कूलों में करीब 33,76,769 बच्चे पढ़ते हैं। 

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ऐसी 'उपलब्धि' हासिल करने वाले राज्य कौन से हैं?

  • पश्चिम बंगाल: 3,812 स्कूल
  • तेलंगाना: 2,245 स्कूल
  • मध्य प्रदेश: 463 स्कूल
  • तमिलनाडु: 311 स्कूल
  • कर्नाटक: 270 स्कूल
  • राजस्थान: 215 स्कूल
  • जम्मू-कश्मीर: 146 स्कूल
  • झारखंड: 107 स्कूल
  • उत्तर प्रदेश: 81 स्कूल
  • मेघालय: 74 स्कूल
  • गुजरात: 63 स्कूल
  • केरल: 47 स्कूल
  • उत्तराखंड: 39 स्कूल
  • मणिपुर: 35 स्कूल
  • मिजोरम: 32 स्कूल
  • अरुणाचल प्रदेश: 21 स्कूल
  • पंजाब: 13 स्कूल
  • लद्दाख: 10 स्कूल
  • बिहार: 5 स्कूल
  • ओडिशा: 3 स्कूल
  • आंध्र प्रदेश: 1 स्कूल

किन राज्यों में ऐसे एक भी स्कूल नहीं हैं?

देश के कई राज्य ऐसे हैं, जहां शून्य नामांकन वाले एक भी स्कूल नहीं हैं। इन राज्यों में असम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, लक्षद्वीप, महाराष्ट्र, नागालैंड, पुडुचेरी, सिक्किम और त्रिपुरा शामिल हैं। 

पश्चिम बंगाल में हाशिए पर पढ़ाई 

UDISE+ के आंकड़े बताते हैं कि देश में कुल 7,993 स्कूल ऐसे हैं जिनमें एक भी छात्र नामांकित नहीं है, अकेले पश्चिम बंगाल में ऐसे स्कूलों की संख्या 3,812 है। तेलंगाना में यह आंकड़ा 2,245 है। पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के आंकड़ों को मिला लें तो  देश के लगभग 76% शून्य नामांकन वाले स्कूल, इन्हीं राज्यों में हैं। मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक भी इस सूची में शीर्ष राज्यों में शामिल हैं। 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक भी शून्य नामांकन वाला स्कूल नहीं है।

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ऐसे स्कूल, जहां सिर्फ 1 शिक्षक के भरोसे हो रही है पढ़ाई 

  • उत्तर प्रदेश: 9,508 एक शिक्षक वाले स्कूल, 6,24,327 छात्र
  • झारखंड: 9,172 एक शिक्षक वाले स्कूल, 4,36,480 छात्र
  • मध्य प्रदेश: 7,217 स्कूल, 2,29,095 छात्र
  • महाराष्ट्र: 8,152 स्कूल, 1,50,146 छात्र
  • आंध्र प्रदेश: 12,912 स्कूल, 1,97,113 छात्र
  • छत्तीसगढ़: 5,973 स्कूल, 2,13,237 छात्र
  • पश्चिम बंगाल: 6,482 स्कूल, 2,35,494 छात्र
  • तेलंगाना: 5,001 स्कूल, 62,288 छात्र