पंजाब की राजनीति इन दिनों स्कूलों तक आ गई है। स्कूलों की रैंकिंग को लेकर तमाम राजनीतिक दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं। नीति आयोग की शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 के ताजा आंकड़ों में पंजाब की स्कूली शिक्षा की स्थिति बेहतर दिखती है। पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार इसे अपनी उपलब्धि बता रही है और इसका प्रचार कर रही है। वहीं, विपक्षी पार्टियां बता रही हैं कि रैंकिंग उनके समय में भी अच्छी थी और इसको लेकर दोनों पक्षों के दावे के बीच जनता के मन में सवाल है कि यह रैंकिंग तय कैसे होती है और किसकी सरकार में स्कूलों की रैंकिंगे में सुधार हुआ?
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 तक देश में 27वें नंबर पर पंजाब आता था लेकिन अब पंजाब के सरकारी स्कूल देश में नंबर-1 स्कूल हैं। आयोग की रिपोर्ट में बताया गया है कि बुनियादी शिक्षा और सीखने की क्षमता के मामले में पंजाब ने देश के सबसे साक्षर राज्य केरल को भी पीछे छोड़ दिया है।
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रिपोर्ट में क्या-क्या दिखा?
नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि तीसरी कक्षा के भाषा स्तर में पंजाब के बच्चों ने 82 प्रतिशत दक्षता हासिल की है, जबकि केरल 75 प्रतिशत पर रहा। गणित में पंजाब ने 78 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि केरल 70 प्रतिशत पर रहा। नौवीं कक्षा के गणित में पंजाब का प्रदर्शन 52 प्रतिशत रहा, जबकि केरल केवल 45 प्रतिशत तक पहुंच पाया।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार
इस रैंकिंग का एक बड़ा पैमाना डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी था। पंजाब के स्कूलों ने पिछले कुछ सालों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया है। आज पंजाब के 99.9 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में बिजली उपलब्ध है। 99 प्रतिशत स्कूलों में चालू कंप्यूटर मौजूद हैं। 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाए जा चुके हैं। स्मार्ट क्लासरूम की उपलब्धता में पंजाब 80.1 प्रतिशत पर है
किस आधार पर किया रैंक?
लोगों के मन में एक बड़ा सवाल यह भी है कि नीति आयोग ने स्कूलों को किस आधार पर रैंक किया या विश्लेषण किया। नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ही इस बारे में बताया है कि किस आधार पर राज्यों को शिक्षा में रैंक दिए गए हैं। इसके लिए आयोग ने मुख्य रूप से 7 आधार रखे थे।
- कितने बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं और नामांकन करवा रहे हैं।
- कितने बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं और कितने पढ़ाई जारी रख रहे हैं।
- बच्चे वास्तव में क्या सीखते हैं।
- स्कूल में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर है या नहीं।
- सभी वर्गों के लड़के और लड़कियां स्कूल आ रहे हैं या नहीं।
- शिक्षक छात्र अनुपात कितना है।
- शिक्षा के लिए डिजिटल और ऑलाइन सुविधाएं कितनी उपलब्ध हैं।
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विपक्ष क्या कह रहा है?
नीति आयोग की रिपोर्ट में पंजाब टॉप पर पहुंच गया है और AAP समर्थक इसे क्रांति कह रहे हैं। उनका कहना है कि चार साल में जो काम हुआ है वह इससे पहले कभी नहीं हुआ है। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि उनकी सरकार में भी काम हुए हैं और स्कूलों की रैंकिंग अच्छी थी। कांग्रेस के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा कि यह कहना सरासर गलत है कि पंजाब ने पहली बार टॉप किया है। पंजाब 2019-20 में ही शिक्षा में नंबर 1 पर पहुंच गया था जब सरकार कांग्रेस की थी। कांग्रेस पार्टी के नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पोस्ट कर लिखा, '2019-20 में ही कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान पंजाब स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में देश में नंबर 1 बन चुका था।' इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उस सम दिल्ली में AAP की सरकार थी, लेकिन उसके बा भी दिल्ली पंजाब से पीछे रही।