असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि अब कांग्रेस मिया वोटरों के सहारे ही अस्तित्व में रहेगी, पार्टी का जनाधार खत्म हो गया है। उनका दावा है कि कांग्रेस के पास मुस्लिम और मिया समुदाय के अलावा, दूसरे समुदाय का वोट नहीं रह गया है। उन्होंने कांग्रेस पर अल्पसंख्यक तुष्टीकर के आरोप लगाए। वह पहले भी कह चुके है कि 22 सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) का जनाधार बचा है।
हिमंत ने यह दावा, उन 22 सीटों के आधार पर किया है, जहां कांग्रेस और एक जमाने में कांग्रेस की सहयोगी पार्टी रही AIUDF का दबदबा है। ये सीटें अल्पसंख्यक बाहुल सीटें हैं। राज्य की करीब 37 फीसदी जनता मुसलमान है। असम में कुल 31 मुस्लिम विधायक हैं, कोई भी विधायक एनडीए गठबंधन से नहीं चुना गया है। यह बात, उन्हें सियासी तौर पर खटक रही है।
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जिस कांग्रेस को हिमंत, मिया मुसलमानों की पार्टी बता रहे हैं, उस पार्टी में मुस्लिमों की स्थिति क्या है, आइए जानते हैं-
हिमंत बिस्व सरमा, मुख्यमंत्री, असम:-
कांग्रेस सिर्फ मिया पार्टी है। इस बार मिया समुदाय के अलावा कोई अन्य वर्ग इसे वोट नहीं देगा। असम के लोग अब अपनी जमीन पर अवैध कब्जे का विरोध करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और वे मिया पार्टी को असम पर कब्जा नहीं करने देंगे। असमिया लोग भी लड़ने को तैयार हैं। वे मिया पार्टी को असम कब्जा नहीं करने देंगे।
असम कांग्रेस में मुस्लिमों की स्थिति क्या है?
असम में कुल 14 लोकसभा सीटें हैं। 14 में से 3 सीटें कांग्रेस के पास हैं। रकीबुल हुसैन, गौरव गोगोई और प्रद्योत बोरदोलोई सांसद हैं। असम में कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के साथ एक जमाने में गठबंधन था। अब, कांग्रेस ने AIUDF को सांप्रदायिक बताकर अपनी राहें जुदा कर ली हैं। वह बंगाली मुसलमानों के बड़े नेता रहे हैं।
कांग्रेस अपने मुस्लिम विधायकों की वजह से विपक्ष के निशाने पर भी रहती है। असम विधानसभा में कांग्रेस के कुल 26 विधायक हैं। 26 में से 16 मुस्लिम विधायक हैं। असम में 22 सीटें ऐसी हैं, जहां बीजेपी की दाल कभी नहीं गलती है।
विधायक तो खूब हैं लेकिन...
असम में विपक्ष के नेता देवब्रत साकिया हैं। असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई हैं। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में मुस्लिम चेहरे हिंदू चेहरों की तुलना में कम चर्चित हैं। असम में प्रदेश कांग्रेस समिति के सबसे बड़े चेहरे, गौरव गोगोई हैं। राजनीतिक मामलों की समिति जितेंद्र सिंह देखते हैं। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों में देवब्रत सैकिया, भूपेन कुमार बोरा, रकीबुल हुसैन, पवन सिंह घाटोवर, प्रद्युत बोरदोलोई, रिपुन बोरा, जाकिर हुसैन सिकदर, रोसिलिना तिर्की, प्रदीप सरकार, अब्दुल खालिक, प्रणती फुकन, बालिन कुली, नंदिता दास, रानी नाराह, वाजेद अली चौधरी, अजीत सिंह और अरुण दत्ता मजूमदार शामिल हैं। इन चेहरों में सिर्फ 5 सदस्य मुस्लिम हैं।
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कौन हैं कांग्रेस के खेवनहार विधायक?
अब्दुल बादिन खंडाकर, अब्दुर रहीम अहमद, अब्दुर राशिद मंडल, अब्दुस सोभन अली सरकार, अबुल कलाम रशीद िकलम, आफताब आलम मुल्ला, डॉ. आसिफ मोहम्मद नजर, जाकिर हुसैन सिकदर, खलीलुद्दीन मजूमदार , मिसपाहुल इस्लाम लसकर, नुरुल हुदा, रकीबुद्दीन अहमद, शर्मन अली अहमद, सिद्दीकी अहमद और वाजिद अली चौधरी।
असम में कांग्रेस के मुस्लिम चेहरे चर्चित क्यों नहीं?
अमस में गौरव गोगोई और देवब्रत साकिया के अलावा, कोई बड़ा चेहरा, राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में नहीं रहता है। कांग्रेस पर बीजेपी अल्पसंख्यक तुष्टीकरण का आरोप लगाती रही है। बीजेपी नेताओं की रणनीति रही है कि कांग्रेस को अल्पसंख्यक तुष्टीकरण पर जितना घिरेगी, उतना लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलेगा।
